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अमिताभ बच्चन और होली का रिश्ता इतना गहरा है कि इनके बिना इस त्योहार की कल्पना करना भी मुश्किल लगता है। बच्चन साहब के लिए होली सिर्फ रंगों का खेल नहीं है बल्कि ये उनके बचपन की यादों और उनके बाबूजी हरिवंश राय बच्चन जी की परंपराओं से जुड़ी है।
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अमित जी अक्सर याद करते हैं कि उनके बचपन की होली इलाहाबाद (अब प्रयागराज) की वादियों में बीती थी। वो मासूम दिन थे। वे बताते हैं कि "बचपन में हम बच्चे-बच्चे दोस्त टोलियां बनाकर निकलते थे और घर-घर जाकर फाग गाते थे। मिट्टी और कीचड़ से होली खेलना उस वक्त आम बात थी और तब कोई बुरा नहीं मानता था।" इलाहाबाद की उस मिट्टी की खुशबू आज भी उनके जेहन में बसी है। वो कहते हैं कि "बाबूजी हमें सिखाते थे कि होली का मतलब है सबको गले लगाना और पुराने गिले-शिकवे भूल जाना।" (Amitabh Bachchan Holi)
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अमित जी ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि कैसे उनके बाबूजी हरिवंश राय बच्चन जी होली के दिन घर के दरवाजे सबके लिए खोल देते थे। अमिताभ जी भी जब अपने बंगले में होली का आयोजन करते थे तो खुद द्वार पर जाकर सभी मेहमानों का स्वागत करते थे,
दिल्ली में भी उन्होंने होली मनाई, वहां की होलियों की बात करें तो अमिताभ जी ने बताया कि मार्च महीने में भी दिल्ली में ठंड रहती है, इसलिए वहां होली की हुड़दंग ज़रा सम्भल सम्भल कर होती थी।
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जब अमिताभ जी मुंबई आए और सुपरस्टार बने तब भी उन्होंने अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा। प्रतीक्षा और जलसा में होने वाली उनकी होली पार्टियां पूरे बॉलीवुड में मशहूर रही हैं। अमित जी का कहना है कि "उन दिनों प्रतीक्षा में होली का मतलब होता था बड़ा सा कढ़ाया जिसमें गुजिया छन रही हो, भुजिया पक रही हो और ठंडाई का दौर चल रहा हो।" वहां राज कपूर से लेकर शत्रुघ्न सिन्हा तक सब आते थे। तरह तरह के पकवान की खुश्बू,रंग में रंगे मेहमान और ढोलक की थाप पर अमित जी का डांस उस दौर की सबसे बड़ी हाईलाइट होती थी। (Bachchan childhood Holi)
अमिताभ बच्चन जी की होली से जुड़ी एक बहुत ही मशहूर घटना है जो उनके 'प्रतीक्षा' बंगले की होली के जलसे से जुड़ी है।
उस समय अमिताभ बच्चन की होली पार्टियों का पूरे बॉलीवुड में दबदबा था। राज कपूर जी उनके घर होली खेलने आए थे
उस दिन मस्ती इतनी बढ़ गई थी कि लोग एक-दूसरे को रंगने के लिए होड़ मचा रहे थे।
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इसी बीच एक मजेदार घटना घटी। वहां गार्डन में एक बड़ा सा हौद बनाया गया था जिसमें रंगीन पानी भरा हुआ था। मस्ती के मूड में अमिताभ जी और राज कपूर जी होली खेल रहे थे कि तभी राज कपूर जी ने अमित जी को उस रंग वाले पानी के कुंड में डाल दिया। फिर बारी आई राज जी को रंग भरे कुंड में डालने की। दोनों पूरी तरह से रंग से भीग चुके थे और सिर से पांव तक गुलाबी हो गए थे। लेकिन उस खेल में जो अपनापन और ख़ुशी महसूस हुई वो आज की पार्टियों में नहीं मिलती। अमिताभ जी भी जाते थे आर के स्टूडियो में राज जी के साथ होली खेलने राज जी को होली का बहुत शौक था और वो पूरे जोश में थे।
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अमित जी याद करते हुए बताते हैं कि "उस वक्त हम लोग घंटों तक उस रंग के कुंड के पास बैठकर गाने गाते थे और ढोलक बजाते थे।" (Bollywood Holi party)
उस घटना के बाद ही 'रंग बरसे' गाने का आइडिया और पुख्ता हुआ था। क्योंकि अमित जी ने देखा था कि कैसे रंग में सराबोर होकर लोग अपनी सुध-बुध खो देते हैं और बस त्योहार का आनंद लेते हैं।उन्होंने कहा कि 'सिलसिला' फिल्म का 'रंग बरसे' गाना उनके पिता द्वारा लोकगीत के तर्ज़ पर लिखी हुई पंक्तियों पर आधारित है।
एक और छोटी सी बात जो वे अक्सर बताते हैं वो ये कि बचपन में एक बार होली खेलते वक्त उनके हाथ में चोट लग गई थी। लेकिन बाबूजी ने कहा था कि "होली हर घाव भर देता है।" तब से अमित जी मानते हैं कि ये त्योहार सिर्फ शरीर को नहीं बल्कि मन के घावों को भी भरने का काम करता है।
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अमित जी कहते हैं कि "वो दौर और था जब लोग बिना बुलाए घर आ जाते थे और गले लग जाते थे, अब तो लोग आने से पहले फोन करके पूछते हैं कि होली खेलनी है या नहीं।"
अमित जी अपनी यादों को लेकर बहुत इमोशनल रहते हैं। उन्होंने खुद कई बार बताया है कि कैसे उनके बाबूजी हरिवंश राय बच्चन जी होली के दिन 'मधुशाला' की पंक्तियां सुनाते थे और घर आए मेहमानों को टीका लगाते थे। (Mumbai Holi celebration)
अमित जी होली के दिन की शुरुआत हमेशा अपने माता-पिता की तस्वीर पर गुलाल लगाकर और उनका आशीर्वाद लेकर करते हैं। उनके लिए ये दिन परिवार के साथ वक्त बिताने का होता है। वे कहते हैं कि "अब वक़्त के साथ, परिवार के हमारे पूजनीय बुजुर्गों के ना रहने से, और उम्र बढ़ने के साथ हुड़दंग थोड़ा कम हो गया है लेकिन उत्साह वही है। अब मुझे अपने पोते-पोतियों के चेहरे पर रंग देखना ज्यादा अच्छा लगता है।"
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फिल्म 'सिलसिला' का जिक्र किए बिना होली त्योहार अधूरी है। 'रंग बरसे' गाना आज भी हर गली मोहल्ले में बजता है। इस गाने के बारे में वे बताते हैं कि "ये लोकगीत मेरे बाबूजी की देन थी और यश चोपड़ा जी ने इसे जिस तरह से फिल्माया वो यादगार बन गया।"
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आज के दौर की होली पर अमिताभ जी का नजरिया थोड़ा बदल गया है। वे अब सूखी होली खेलने और पानी बचाने पर जोर देते हैं। उनके हिसाब से होली कैसे मनानी चाहिए इस पर वे कहते हैं कि "रंगों में वो केमिकल नहीं होने चाहिए जो किसी की त्वचा को नुकसान पहुंचाएं। जबरदस्ती किसी पर रंग डालना बहादुरी नहीं है बल्कि शालीनता से खुशियां बांटना ही असली त्योहार है।"
उनका मानना है कि आजकल लोग त्यौहार सिर्फ सोशल मीडिया के लिए मनाते हैं। वे सलाह देते हैं कि "फोन को एक तरफ रखकर अपनों से रूबरू मिलिए, होली खेलिए, बात कीजिए और साथ में बैठकर पकवान खाइए तभी होली सार्थक होगी।"
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अमित जी के लिए होली एक ऐसा मौका है जहां राजा और रंक सब एक हो जाते हैं। वे अक्सर कहते हैं कि "होली का रंग चढ़े तो ऐसा चढ़े कि फिर कोई दूसरा रंग उस पर टिक न पाए और वो रंग होना चाहिए इंसानियत और प्यार का।
आजकल वे पानी की बर्बादी को देखते हुए अक्सर 'सूखी होली' (Dry Holi) की सलाह देते हैं और अपने सोशल मीडिया पर भी यही लिखते हैं कि त्यौहार सादगी और प्यार से मनाना चाहिए।
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FAQ
प्रश्न 1: अमिताभ बच्चन का होली से क्या संबंध है?
उत्तर: अमिताभ बच्चन का होली के साथ गहरा रिश्ता है। उनके लिए यह केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि उनके बचपन की यादों और उनके पिता हरिवंश राय बच्चन की परंपराओं से जुड़ा है।
प्रश्न 2: अमिताभ बच्चन ने अपना बचपन कहाँ होली मनाई?
उत्तर: उन्होंने अपना बचपन इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में बिताया, जहाँ वह दोस्तों के साथ टोली बनाकर फाग गाते, मिट्टी और कीचड़ में होली खेलते और त्योहार का आनंद लेते थे।
प्रश्न 3: सुपरस्टार बनने के बाद अमिताभ बच्चन ने होली कैसे मनाई?
उत्तर: मुंबई में अमिताभ ने प्रतीक्षा और जलसा में भव्य होली पार्टियां आयोजित कीं, जिसमें बॉलीवुड सेलेब्स शामिल होते थे, पारंपरिक पकवान, ठंडाई, संगीत और डांस का आनंद लिया जाता था।
प्रश्न 4: अमिताभ ने अपने पिता से होली के बारे में क्या सीखा?
उत्तर: उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि होली का मतलब है सबको गले लगाना, पुराने गिले-शिकवे भूल जाना और प्यार और इंसानियत के साथ त्योहार मनाना।
प्रश्न 5: दिल्ली में अमिताभ बच्चन की होली कैसे होती है?
उत्तर: उन्होंने बताया कि मार्च महीने में दिल्ली में ठंड रहती है, इसलिए होली का जश्न संभलकर होता है, लेकिन रंग, मस्ती और आनंद हमेशा मौजूद रहता है।
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