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हॉलीवुड की मेगा डील से भारत तक हलचल:  Netflix और Warner ब्रदर्स विलय पर क्यों बढ़ी चिंता?

नेटफ्लिक्स और वार्नर ब्रदर्स के बीच प्रस्तावित मेगा डील केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक स्तर पर, खासकर भारतीय सिनेमा और ओटीटी इकोसिस्टम पर भी हो सकता है।

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हॉलीवुड की कॉरपोरेट लड़ाइयाँ अक्सर अमेरिका तक सीमित नहीं रहतीं—उनकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देती है.स्ट्रीमिंग दिग्गज नेटफ्लिक्स (Netflix) और हॉलीवुड स्टूडियो वार्नर ब्रदर्स (Warner) के बीच प्रस्तावित मेगा डील भी ऐसी ही एक लड़ाई है, जिसका असर भारतीय सिनेमा और ओटीटी इकोसिस्टम पर भी पड़ सकता है. अमेरिकी सीनेट (US Senate) में उठे सवाल, थिएट्रिकल रिलीज़ को लेकर चिंता और क्रिएटिव फ्रीडम पर बहस—ये सभी मुद्दे भारत जैसे बड़े फिल्म बाज़ार के लिए अहम संकेत देते हैं.

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Warner Bros-Netflix deal: Is the Tudum effect harmful for Indian cinema?  'The risk is two-fold' - The Times of India

सीनेट हियरिंग में नेटफ्लिक्स से तीखे सवाल

अमेरिका में हुई एक अहम सीनेट हियरिंग के दौरान नेटफ्लिक्स को अपने प्रस्तावित 82 अरब डॉलर के विलय को लेकर कड़े सवालों का सामना करना पड़ा. यह सुनवाई केवल अमेरिकी मनोरंजन उद्योग तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके असर की चर्चा भारत जैसे बड़े कंटेंट मार्केट में भी होने लगी है.डेमोक्रेट और रिपब्लिकन—दोनों ही दलों के सीनेटरों ने चिंता जताई कि इस डील से प्रतिस्पर्धा घट सकती है और सिनेमाघरों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है.

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Netflix Leader Pushes Warner Deal Before Skeptical Lawmakers - The New York  Times

“कम कीमत में ज्यादा कंटेंट” का दावा

सुनवाई के दौरान नेटफ्लिक्स ने दलील दी कि यह विलय दर्शकों के लिए फायदेमंद होगा.कंपनी का कहना था कि इससे उपभोक्ताओं को कम कीमत में ज्यादा कंटेंट मिलेगा. नेटफ्लिक्स ने यह भी बताया कि उसके करीब 80 प्रतिशत सब्सक्राइबर पहले से ही HBO Max के लिए भुगतान कर रहे हैं. हालांकि, सांसद इस तर्क से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे. उनका मानना था कि बड़े प्लेटफॉर्म्स के आपस में मिलने से विकल्प सीमित होंगे, जिसका असर दर्शकों, कर्मचारियों और क्रिएटिव टैलेंट—तीनों पर पड़ेगा.

नौकरियों और लेबर मार्केट पर सवाल

नेटफ्लिक्स ने दावा किया कि इस डील से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, लेकिन कानून निर्माताओं ने चेतावनी दी कि इससे लेबर मार्केट में प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है. उनका कहना था कि जब विकल्प कम होते हैं, तो कलाकारों, तकनीशियनों और कर्मचारियों की मोलभाव करने की ताकत भी घट जाती है—एक चिंता जो भारत के फिल्म और ओटीटी वर्कफोर्स के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक है.

The Netflix-Warner Bros. Deal Could Revive Hollywood - WSJ

‘वोक कंटेंट’ को लेकर राजनीतिक बहस

सुनवाई के दौरान सांस्कृतिक राजनीति भी चर्चा में रही.  कुछ अमेरिकी सांसदों ने नेटफ्लिक्स पर “ओवरली वोक” यानी ‘दर्शक को लगे कि फिल्म/सीरीज़ उसे एंटरटेन करने के बजाय कुछ समझाने या सिखाने आई है’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. भारतीय संदर्भ में यह बहस इसलिए अहम है क्योंकि नेटफ्लिक्स इंडिया पहले ही अपने कंटेंट को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक आलोचनाओं का सामना करता रहा है.  आलोचकों ने चेतावनी दी कि चाहे यह विलय पैरामाउंट के साथ हो या वार्नर ब्रदर्स के साथ—हर स्थिति में शोबिज में पावर सेंट्रलाइजेशन बढ़ेगा.

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यूट्यूब को बताया सबसे बड़ा मुकाबला

हियरिंग के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब सब-कमेटी ने अल्फाबेट के स्वामित्व वाले यूट्यूब को संभावित प्रतिस्पर्धी के रूप में उठाया. इस पर नेटफ्लिक्स के को-सीईओ टेड सारैंडोस ने कहा, “हम एक ही कंटेंट, एक ही दर्शकों और कई बार एक ही विज्ञापन रेवेन्यू के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. यूट्यूब अब सिर्फ कैट वीडियो नहीं है—यूट्यूब अब टीवी है.”
यह बयान भारत के लिहाज़ से खास मायने रखता है, जहां यूट्यूब ग्रामीण और शहरी—दोनों बाजारों में सबसे बड़ा वीडियो प्लेटफॉर्म बन चुका है.

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क्रिस्टोफर नोलन की खुली चेतावनी

इसी बीच मशहूर फिल्ममेकर और डायरेक्टर्स गिल्ड ऑफ अमेरिका के नए प्रमुख क्रिस्टोफर नोलन (Christopher Nolan) ने भी इस डील को लेकर गंभीर चिंता जताई.अपने पहले इंटरव्यू में नोलन ने कहा, “यह इंडस्ट्री के लिए बेहद चिंता का समय है. एक बड़े स्टूडियो का खत्म होना अपने आप में एक बहुत बड़ा झटका है.”
नेटफ्लिक्स द्वारा 45 दिन की थिएट्रिकल विंडो के वादे पर प्रतिक्रिया देते हुए नोलन ने Variety से कहा कि संकेत भले ही सकारात्मक हों, लेकिन ये पक्की प्रतिबद्धताएं नहीं हैं.उनके मुताबिक, थिएट्रिकल विंडो इस बात का प्रतीक है कि वार्नर ब्रदर्स को थिएटर-फर्स्ट स्टूडियो की तरह चलाया जाएगा या सिर्फ एक स्ट्रीमर बनाकर छोड़ दिया जाएगा.

भारत के लिए क्यों अहम है यह डील?

भारत दुनिया के सबसे बड़े और विविध फिल्म बाज़ारों में से एक है, जहां बॉलीवुड, साउथ सिनेमा और रीजनल इंडस्ट्रीज़ थिएटर और ओटीटी—दोनों पर निर्भर हैं.ऐसे में नेटफ्लिक्स और वार्नर ब्रदर्स जैसे ग्लोबल फैसले भारतीय इंडस्ट्री पर सीधा असर डाल सकते हैं.

Netflix's antitrust hearing morphed into a culture-war fight over  'wokeness' | CNN Business

भारत में आज भी बड़ी फिल्में पहले सिनेमा हॉल्स में रिलीज़ होती हैं.अगर हॉलीवुड में स्ट्रीमिंग-फर्स्ट मॉडल मजबूत होता है, तो भारत में भी थिएटर विंडो कम हो सकती है.इसका असर मिड-बजट फिल्मों की रिलीज़ रणनीति पर पड़ेगा, जहां सीधी ओटीटी रिलीज़ बढ़ सकती है और सिंगल-स्क्रीन थिएटर्स पर दबाव और गहराएगा.साथ ही, ओटीटी के एल्गोरिदम-ड्रिवन मॉडल से बड़े बजट और प्रयोगधर्मी सिनेमा पर भी असर पड़ सकता है.अगर कुछ गिने-चुने ग्लोबल स्ट्रीमर्स ही इंडस्ट्री को कंट्रोल करने लगते हैं, तो भारतीय क्रिएटर्स की सौदेबाजी की ताकत कमजोर पड़ने की आशंका भी बढ़ जाती है.

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नेटफ्लिक्स बनाम वार्नर ब्रदर्स की यह लड़ाई अब सिर्फ अमेरिका की एक कॉरपोरेट डील नहीं रह गई है.यह उस बदलाव का संकेत है, जो आने वाले वर्षों में भारतीय सिनेमा, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और दर्शकों की देखने की आदतों को भी प्रभावित कर सकता है. सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कंटेंट कहां दिखेगा—सवाल यह भी है कि किसके नियमों पर और किसके लिए कंटेंट बनाया जाएगा.

Netflix Warner Bros deal | OTT ecosystem India | Indian cinema impact not present in content

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