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ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हुई वेब सीरीज़ ‘तस्करी’ (Taskaree) को दर्शकों से जबरदस्त सराहना मिल रही है. इस सीरीज़ में इमरान हाशमी (Emraan Hashmi), शरद केलकर (Sharad Kelkar), जोया अफ़रोज़ (Zoya Afroz) और नंदिश संधू (Nandish Sandhu) जैसे कलाकारों ने दमदार अभिनय से कहानी को मजबूती दी है, जबकि निर्देशन की कमान संभाली है मशहूर फिल्ममेकर नीरज पांडे (Neeraj Pandey) ने. इसी सफलता के बीच पूरी टीम ने एक खास इंटरव्यू में अपने-अपने किरदारों, शूटिंग के अनुभव, इंडस्ट्री में बदलती सोच, ओटीटी पर कास्टिंग के नए ट्रेंड और नीरज पांडे के साथ काम करने के अनुभव को लेकर खुलकर बातचीत की. आइये जानते हैं सभी ने क्या कहा...
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‘तस्करी’ की कहानी को आप कैसे देखते हैं?
इमरान: हमारी स्क्रिप्ट में तस्करी को बिल्कुल एक ‘हाइड एंड सीक’ गेम की तरह दिखाया गया है. जब तस्कर पकड़े जाते हैं, तो वे नए-नए तरीके खोजते हैं. यही इसे दिलचस्प बनाता है.
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क्या आपको कभी एयरपोर्ट पर कस्टम्स या इमिग्रेशन पर रोका गया है?
इमरान: हां, इमिग्रेशन पर कई बार रोका गया है, खासकर शुरुआती दौर में. उस समय मेरे कानों में ईयररिंग्स और बाल स्पाइक्स हुआ करते थे, शायद मैं किसी प्रोफाइल में फिट बैठता था. लेकिन कस्टम्स के साथ कभी कोई दिक्कत नहीं हुई, मैं हमेशा सिविल रहा हूं.
शरद: मुझे व्यक्तिगत अनुभव तो नहीं हुआ, लेकिन मेरे कस्टम्स में दोस्त हैं. उनसे कई किस्से सुने हैं. उनके अपने तरीके और टेक्निक्स होते हैं, जो बहुत दिलचस्प हैं.
जोया: मैं गोवा के कस्टम म्यूज़ियम गई हूं. वहां देखा कि किस तरह लोग सीट, जूते, चॉकलेट और वेफर्स के जरिए तस्करी करते हैं. वो जगह बहुत ही रोचक है.
‘बैंड्स ऑफ बॉलीवुड’ के बाद मिले प्यार को कैसे देखते हैं?
इमरान:.यह मेरे लिए बहुत बड़ा कॉम्प्लिमेंट है. रोल छोटा था, लेकिन उसका इम्पैक्ट बड़ा निकला. पहले 10 सालों में मुझे लगता था कि पुरुष दर्शक मुझे पसंद नहीं करते थे, लेकिन अब यह बदल रहा है.
टीवी से ओटीटी और फिल्मों तक का सफर कितना मुश्किल रहा?
शरद: अनलर्निंग बहुत जरूरी है. हर प्रोजेक्ट के बाद आपको अपना पिछला किरदार भूलना पड़ता है. टीवी ने मुझे एक्टिंग की मजबूत नींव दी, लेकिन मैं हमेशा अलग-अलग किरदार करता रहा, ताकि किसी एक इमेज में न फंसूं.
नंदिश : मेरे लिए ‘तस्करी’ खास है क्योंकि मैं हमेशा यूनिफॉर्म वाला किरदार निभाना चाहता था. मैं मिलिट्री स्कूल से पढ़ा हूं और सेना में जाना चाहता था. यह रोल मेरे दिल के बहुत करीब है.
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महिला किरदारों को लेकर आपकी क्या सोच है?
जोया: मैं अभी करियर की शुरुआत में हूं, इसलिए चुनने की स्थिति में नहीं हूं. लेकिन नीरज सर के साथ काम करना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है. उन्होंने मेरे किरदार ‘प्रिया’ को बहुत लेयर्ड बनाया है. यह सिर्फ शो का हिस्सा नहीं, बल्कि कहानी को आगे बढ़ाने वाला किरदार है.
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ग्रे शेड और नेगेटिव किरदार निभाने का अनुभव कैसा रहा?
इमरान: मैं ऐसे किरदार चुनता हूं जिनसे मैं रिलेट नहीं कर पाता, क्योंकि वही ज्यादा चुनौतीपूर्ण होते हैं. ‘शंघाई’ (Shanghai) मेरा पहला ऐसा किरदार था, जिसके लिए मुझे सात दिन की वर्कशॉप करनी पड़ी.
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नीरज पांडे जैसे सख्त निर्देशक के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
इमरान: वह सख्त नहीं, बल्कि बहुत स्वीट हैं. लेकिन स्क्रिप्ट को लेकर बेहद सटीक. मैंने दो बार इम्प्रोवाइज करने की कोशिश की, तो उन्होंने प्यार से कहा—‘स्क्रिप्ट पर ही टिके रहो.’ उनकी प्लानिंग कमाल की होती है.
शरद: .वह वन-शॉट्स में शूट करना पसंद करते हैं. दो टेक में सीन खत्म. उन्हें पता होता है कि एडिट में क्या चाहिए.
जोया: .मेरे पहले ही दिन सबसे भारी सीन शूट कराया गया. इससे लगा कि उन्हें अपने कलाकारों और अपनी स्क्रिप्ट पर पूरा भरोसा है.
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क्या एक्टर के लिए इमेज तोड़ना जरूरी है?
इमरान: अगर आप लंबी रेस का घोड़ा बनना चाहते हैं, तो दर्शकों को समय-समय पर सरप्राइज देना जरूरी है. ओटीटी ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है.
ऑन-स्क्रीन इमेज और ऑफ-स्क्रीन पर्सनैलिटी को लेकर क्या कहना चाहेंगी?
जोया: .इमरान की ऑन-स्क्रीन इमेज काफी इंटेंस है, लेकिन ऑफ-स्क्रीन वह बेहद जेंटलमैन हैं. उनके साथ काम करना मेरे लिए बहुत अच्छा अनुभव रहा.
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