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एक ऐसी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में जहाँ अक्सर स्टार अपनी बनी बनाई इमेज को महत्व देते रहे हैं, कुछ कलाकार ऐसे भी होते हैं जो अपने इमेज और असली व्यक्तित्व को पूरी तरह से पीछे छोड़कर अपने किरदार में पूरी तरह ढल जाते हैं. ये कलाकार पर्दे पर सिर्फ अभिनय नहीं करते, बल्कि खुद ही किरदार बन जाते हैं. आश्चर्यजनक शारीरिक बदलाव, अलग स्टाइल से बोलचाल, बॉडी लैंग्वेज और शिद्दत से किरदार को समझना, ये सब उनकी पहचान बन जाती है. ये कोई सामान्य अभिनेता नहीं, बल्कि सिनेमा के “गिरगिट” हैं, और दर्शक हमेशा उत्साहित रहते हैं कि अगली बार ये किस रूप में नज़र आएंगे.
यहाँ ऐसे ही कुछ कलाकारों का जिक्र है जो हर बार दर्शकों को हैरान कर देते हैं.
रणवीर सिंह
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रणवीर सिंह शायद बॉलीवुड के सबसे रंगीन और रंग बदलते रहने वाले कलाकार हैं. 'धुरंधर' और 'पद्मावत' में उनका अलग अंदाज़, 'बाजीराव मस्तानी' के लिए सिर मुंडवाना, 'गली बॉय' में स्ट्रीट रैपर की बॉडी लैंग्वेज अपनाना और '83' में कपिल देव की चाल-ढाल और ऊर्जा को हूबहू दर्शाना - हर बार वे खुद को पूरी तरह बदल लेते हैं. उनकी आवाज़, लहजा, हाव-भाव और ऊर्जा हर फिल्म में अलग होती है.
आमिर खान
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आमिर खान को बॉलीवुड का “मिस्टर परफेक्शनिस्ट” कहा जाता है. शारीरिक बदलाव का ट्रेंड शुरू होने से पहले ही आमिर ने इसकी मिसाल पेश कर दी थी. 'दंगल' के लिए उन्होंने पहले पहलवान जैसा शरीर बनाया और फिर वज़न बढ़ाया. 'सितारे ज़मीन पर' में उन्होंने अपने लुक और उम्र के साथ प्रयोग किया. 'लाल सिंह चड्ढा' में उन्होंने लंबी दाढ़ी रखी और एक सिख व्यक्ति का किरदार पूरी निष्ठा और सच्चाई से निभाया. 'मंगल पांडे: द राइजिंग' के लिए उन्होंने लंबे बाल और घनी मूंछ रखी.
रणदीप हुड्डा
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रणदीप हुड्डा अपने बेखौफ बदलाव के लिए जाने जाते हैं. 'सरबजीत' में उनका शारीरिक बदलाव बेहद भावुक करने के साथ साथ चौंकाने वाला भी था. 'स्वतंत्र्य वीर सावरकर' में उन्होंने एक क्रांतिकारी का किरदार गहराई से निभाया. 'मैं और चार्ल्स' और 'सुल्तानv में भी उन्होंने अपने किरदार के अनुसार खुद को बदला. हॉलीवुड फिल्म' एक्सट्रैक्शन' में उन्होंने एक कातिल की भूमिका निभाई. अपने हर किरदार के लिए वे कभी अपना वज़न कम या कभी ज़्यादा कर लेते हैं. वे आश्चर्यजनक रूप से देखते ही देखते अपनी मांसपेशियां बना लेते हैं. चलने-बोलने का तरीका भी बदलते हैं और अलग अलग लहजे को अपनाते हैं. वे सिर्फ एक्टिंग नहीं करते, बल्कि किरदार को जीते हैं.
आदर्श गौरव
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आदर्श गौरव ने बड़ी खामोशी के साथ खुद को अपनी पीढ़ी के सबसे समर्पित कलाकारों में शामिल कर लिया है. 'द व्हाइट टाइगर' से लेकर 'गन्स एंड गुलाब्स', 'खो गए हम कहां' और 'सुपरबॉयज़ ऑफ मालेगांव' तक उन्होंने हर तरह के किरदार निभाए हैं. अपनी नई फिल्म 'तू या मैं' में वे नालासोपारा के एक लोकल रैपर बने हैं. इसके लिए उन्होंने मुंबई की स्ट्रीट भाषा सीखी और खुद रैप परफॉर्म किया. अपने किरदार को रियल दिखाने के लिए उन्होंने शरीर में बदलाव किया, चेहरे पर पियर्सिंग करवाई और लहजा भी बदला. उनकी अंतरराष्ट्रीय फिल्म 'एलियन: अर्थ' यह साबित करती है कि उनकी प्रतिभा सीमाओं से परे है.
आर. माधवन
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आर. माधवन अपने करियर के कई सालों बाद भी दर्शकों को चौंकाते रहते हैं. 'धुरंधर' में उनका रफ अंदाज, 'शैतान' में उनकी गहरी भूमिका, 'रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट' में सटीक अभिनय और 'केसरी चैप्टर 2' व 'द रेलवे मेन' में प्रभावशाली किरदार - हर बार उन्होंने खुद को सरापा बदला है. अपनी आने वाली तमिल सिरीज़ 'लेगेसी' के साथ वे फिर साबित कर रहे हैं कि उम्र प्रयोग करने में बाधा नहीं है. वज़न बढ़ाना, घटाना या आवाज़ और हाव-भाव में बदलाव - माधवन हर बार खुद को नया रूप देते हैं.
गुलशन देवैया
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गुलशन देवैया समकालीन सिनेमा के सबसे बहुमुखी कलाकारों में से एक हैं. वे नए प्रयोग करने से कभी नहीं डरते ना पीछे हटते हैं . 'घोस्ट स्टोरीज' में उन्होंने भारी प्रोस्थेटिक्स और बॉडी सूट पहनकर एक डरावने किरदार को निभाया. 'मर्द को दर्द नहीं होता' में उन्होंने दो अलग-अलग तरह के किरदार कितनी खूबी से निभाए है - एक अजीब बॉडी लैंग्वेज वाला कॉन्ट्रैक्ट किलर 'चार कट आत्माराम' और एक शारीरिक रूप से कमज़ोर कराटे मास्टर. और कमाल की बात ये है कि यह सब उन्होंने अपनी घुटने की सर्जरी से उबरते हुए किया.
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