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जब भी हिंदुस्तान की जंगों की बात होती है, तो सबसे पहले दिमाग़ में हमारे जवानों की तस्वीर आती है। झुलसाती धूप में तपते चेहरे, ठिठुरती सर्दी में भी चाक चौबंद चुस्ती, आंखों में देश के लिए जुनून और दिल में बस एक ही बात… ‘वतन पर कुर्बान यह जान’। सालों पहले (1997) जेपी दत्ता की फिल्म 'बॉर्डर' ने हमें यही एहसास कराया था। आज भी उसका हर सीन रूह को निचोड़ जाता है।और अब, उसी विरासत को आगे बढ़ाने आ रही है 'बॉर्डर 2,' जो एक ब्लॉक बस्टर का मात्र सीक्वल नहीं बल्कि एक नई पीढ़ी को उस जज़्बे से जोड़ने की कोशिश है।
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फ्राइडे 23 जनवरी (2026) को रिलीज़ के साथ 'बॉर्डर 2' आज के दौर की सबसे बहुप्रतीक्षित देशभक्ति फिल्मों में गिनी जा रही है। लेकिन इसकी खासियत सिर्फ़ इतनी नहीं कि यह बॉर्डर का अगला भाग है। इसकी सबसे बड़ी ताक़त है कहानी की सच्चाई, प्रस्तुतीकरण की ईमानदारी और असली हीरो की कहानियां।
इस बार फिल्म सिर्फ़ एक ज़मीनी मोर्चे की नहीं, बल्कि ज़मीन, आसमान और समंदर, तीनों जगहों की लड़ाइयों को पर्दे पर उतारती है। मतलब इंडियन आर्मी के साथ-साथ इंडियन एयर फ़ोर्स और नेवी के जांबाज़ अफसरों की बहादुरी भी पहली बार इतने बड़े लेवल पर परदे पर उतारी गई है। यही वजह है कि 'बॉर्डर 2' बाकी पैन इंडिया फिल्मों से अलग खड़ी नज़र आती है। आज के ज़माने की हाई ऑक्टेन बॉलीवुड फ़िल्मों की तरह इस फिल्म में सिर्फ़ बड़े सेट, भारी डायलॉग या स्लो मोशन एंट्री नहीं है, बल्कि अपने देश के जाँबाज रक्षकों की असली ज़िंदगी की कहानियां हैं, जिनमें दर्द भी है, डर भी है और सबसे ऊपर देश के लिए मर मिटने का जज़्बा है।
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यह बात भी गौर करने लायक है कि पिछली बॉर्डर की तरह फिल्म की कास्टिंग फिर एक बार बेहद सोच-समझकर की गई है। बात जब देश भक्ति और देश की हिफाजत करने वाले चरित्र की आती है तो सनी देओल से बेहतर कलाकार और कौन हो सकता है? एक बार फिर वे फौजी अफसर के किरदार में लाजवाब है। उनका भारी-भरकम अंदाज़, बुलंद आवाज़ और आंखों में देशभक्ति की धधकती लौ, यही तो बॉर्डर की पहचान रही है। इस बार वे लेफ्टिनेंट कर्नल फ़तेह सिंह कलेर के किरदार में हैं, जो असल ज़िंदगी में हमारे देश के एक बहादुर अफसर थे। यह किरदार मेजर जनरल हरदेव सिंह कलेर से प्रेरित है, जिन्होंने 1971 के युद्ध में शत्रु सेना के विशाल आत्मसमर्पण का नेतृत्व किया था। सनी देओल का कहना है, “ये फिल्म 'बार्डर 2' मेरे लिए सिर्फ़ एक फिल्म नहीं, इमोशन है। बॉर्डर मेरे दिल के बहुत करीब है। ”
' बॉर्डर 2' के एक और जीवन्त किरदार है वरुण धवन। फिल्म में वे मेजर होशियार सिंह दहिया का रोल निभा रहे हैं, जो परमवीर चक्र से सम्मानित रहे थे। वरुण ने इस रोल के लिए महीनों,कठिन और सख्त ट्रेनिंग ली। फौजी की दम ख़म वाले डायलॉग से लेकर फौजी की बॉडी लैंग्वेज तक, वरुण ने सब कुछ सीखा। वरुण का ये अवतार उनके फैन्स के लिए भी एक बड़ा सरप्राइज़ है , क्योंकि यहां वरुण अपने अब तक के खेले गए रोल्स के मुताबिक रोमांस या कॉमेडी में लिप्त नहीं, बल्कि वे पूरी तरह देश के सिपाही बने दिख रहे हैं। वास्तविक कहानी: यह फिल्म बसंतर की लड़ाई में मेजर होशियार सिंह की वीरता पर आधारित है, जहाँ उन्होंने घायल होने के बावजूद लड़ाई जारी रखी थी।
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बात करें हर दिल अजीज दिलजीत दोसांझ की जो इंडियन एयर फ़ोर्स के अफसर निर्मलजीत सिंह सेखों के किरदार में हैं। यह वही अफसर हैं जिन्होंने अकेले दुश्मन के कई जहाज़ों से मुकाबला किया था।निर्मलजीत सिंह सेखों की वीरता की कहानी यह है कि उन्होंने अकेले मोर्चा संभाला। 14 दिसंबर, 1971 को श्रीनगर एयरबेस पर जब छह पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने हमला किया, तब सेखों अकेले अपने विमान 'F-86 Sabre' से दुश्मन का सामना किया और दुश्मन को किया ढेर। उन्होंने दो पाकिस्तानी विमानों को मार गिराया, लेकिन उनका विमान भी क्षतिग्रस्त हो गया और वे शहीद हो गए।
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उनकी इस असाधारण वीरता और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान, परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। दिलजीत ने इस रोल की औथेंटिसिटी के लिए फ्लाइट सिमुलेटर पर ट्रेनिंग ली और एयर बेस पर समय बिताया ताकि किरदार असली लगे। उनका कहना है, “जब मैंने इस हीरो की कहानी सुनी, तो आंखें भर आईं। ऐसे लोग ही असली स्टार होते हैं.”
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बता दूँ कि अहान शेट्टी ने 'बॉर्डर 2' में भारतीय नौसेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर एम.एस. रावत का किरदार निभाया है, जिनका किरदार असल जिंदगी के महावीर चक्र विजेता कमांडर जोसेफ पी.ए. नोरोन्हा से प्रेरित है। उन्होंने 1971 के युद्ध में INS पनवेल का नेतृत्व किया था। कमांडर जोसेफ पी.ए. नोरोन्हा , जिन्हें उनकी बहादुरी के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। वे नौसेना अधिकारी के रूप में INS खुकरी से जुड़े थे और युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। समंदर में होने वाली जंग के सीन्स इस फिल्म का एक बहुत जबरदस्त हाईलाइट बताए जा रहे हैं। असली वॉरशिप्स पर शूटिंग, समुद्र के बीच एक्शन। यह सब भारतीय सिनेमा में कम ही देखने को मिला है।
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'बॉर्डर 2' की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहां देशभक्ति जाहिर करने के लिए ज़रूरत से ज़्यादा शो शा नहीं मचाया गया। ना बेवजह के भाषण, ना ओवरडोज़ डायलॉग। बस कहानी खुद अपनी कहानी कहती है। जब एक जवान अपने घरवालों से आख़िरी बार फोन पर बात करता है, जब कोई अफसर अपने साथी के निर्जीव देह को गोद में उठाकर रो पड़ता है, तब शब्द नहीं, खामोशी बोलती है। यही असली कहानी की हूबहू सिनेमैटिक रूपांतर है। यही असली एहसास है।
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आजकल पैन इंडिया फिल्मों का ट्रेंड चल रहा है, जहां हर चीज़ ‘लार्जर दैन लाइफ ’ दिखाने की चलन भी है और होड़ भी । ट्रेडिंग सुपर स्टार हीरो, ट्रेडिंग टॉप की हीरोइन, साउथ या नॉर्थ फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा सुपर विलेन, जादू का एहसास दिलाता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निर्मित मशीनी एक्शन वगैरह। लेकिन 'बॉर्डर 2' एक युद्ध फिल्म होने के बावजूद इन सब ढकोसलों से अलग थलग खड़ी है। इस फिल्म के युद्ध दृश्य बिल्कुल औथेंटिक है, जैसे आज भी जंग के मैदान, जंग के आसमान या जंग के समुन्दर में हमारे जाँबाज जवान अपने सूझबूझ वाले अनुभवी ऑफिसर के कडे निर्देश पर लड़ते हैं। यह फिल्म आपको आंखों में आंसू और दिल में गर्व दोनों एक ही साथ देगी। यहां हमारे देश के जाँबाज जवान बने हीरो, हवा में उड़ता नहीं, बल्कि मिट्टी में लोटता है, पसीना और खून बहाता है, दर्द सहता है, मौसम की मार सहता है, दुश्मन को नाको चने चबवा देता है और फिर भी मुस्कुराकर कहता है, “सब ठीक है सर। ”
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फिल्म के टीज़र ने पहले ही सोशल मीडिया पर धूम मचा दी थी। विजय दिवस के मौके पर रिलीज़ हुए टीज़र में सनी देओल की गर्जना करती आवाज़ और बैकग्राउंड में युद्ध के सीन देखकर लोग भावुक हो गए थे। कई दर्शकों ने कमेंट किया, “ फिर से 1997 वाला बॉर्डर का चौंकाने वाला एहसास वाला है। ” इस हिस्टोरिकल वॉर ड्रामा फिल्म ‘बॉर्डर 2’ की एडवांस बुकिंग कब के शुरू हो चुकी है। इस फिल्म की टिकट लोग धड़ल्ले से बुक कर रहे हैं।
हाल ही में फिल्म को लेकर कुछ विवाद भी सामने आए, खासकर दिलजीत दोसांझ की कास्टिंग पर। लेकिन मेकर्स ने साफ कहा कि फिल्म का मकसद सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारे जवानों को सलाम करना है। राजनीति या विवाद से इसका कोई लेना-देना नहीं। और यही बात फिल्म की सोच को और मजबूत बनाती है।'
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म्यूज़िक की बात करें तो इस बार भी देशभक्ति से भरे गाने सुनने को मिलेंगे। जिनमें दर्द, उम्मीद और गर्व तीनों का मिश्रण होगा। बॉर्डर 2 का म्यूजिक एल्बम इस समय काफी चर्चा में है, खासकर इसलिए क्योंकि यह पुरानी 'बॉर्डर' की विरासत को समेटे हुए है। एल्बम में कुल 9 गाने हैं, जिन्हें टी-सीरीज के लेबल तले रिलीज़ किया गया है।
यहाँ फिल्म के प्रमुख गानों और उनकी बारीकियों की जानकारी दी गई है:
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‘घर कब आओगे’ यह सुपर हिट गीत, ‘संदेशे आते हैं’ का नया वर्जन है। इसमें सोनू निगम और रूप कुमार राठौड़ के साथ-साथ अरिजीत सिंह, विशाल मिश्रा और दिलजीत दोसांझ ने अपनी आवाज़ दी है। इसे मिथून ने रिक्रिएट किया है और अतिरिक्त बोल मनोज मुंतशिर ने लिखे हैं।
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‘मिट्टी के बेटे’ सोनू निगम द्वारा गाया गया यह एक बेहद भावुक देशभक्ति गीत है, जिसे मिथून ने कंपोज़ किया है और मनोज मुंतशिर ने इसके बोल लिखे हैं।
‘इश्क दा चेहरा’ यह एक रोमांटिक-सूफी टच वाला गाना है जिसे दिलजीत दोसांझ, सचेत टंडन और परंपरा टंडन ने गाया है।
‘हिंदुस्तान मेरी जान’ मूल फिल्म के गाने ‘हिंदुस्तान हिंदुस्तान’ का रिक्रिएटेड वर्जन, जिसे मोहित चौहान और बी प्राक ने गाया है।
अन्य प्रमुख गाने हैं, जाते हुए लम्हों’- विशाल मिश्रा और रूप कुमार राठौड़ की आवाज़ में।
‘मोहब्बत हो गई है’: सोनू निगम और पलक मुच्छल द्वारा गाया गया।
‘तारा रम पम पम’: सुखविंदर सिंह की आवाज़ में एक जोशीला गाना।
फिल्म का संगीत अनु मलिक, मिथून, विशाल मिश्रा, सचेत-परंपरा और गुरमोह ने मिलकर तैयार किया है। बोल जावेद अख्तर, मनोज मुंतशिर, कौसर मुनीर और कुमार ने लिखे हैं।
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इस फिल्म में ऐसे कई डायलॉग है जो दर्शकों की तालियां बटोरने को तैयार है, जैसे - - "म्हारे गांव में एक कहावत है हम भले ही पूजा राम की करते हैं।लेकिन तेवर परशुराम की रखते हैं'
"भले ही हमारी तादात कम हो सर, लेकिन ताकत किसी से कम नहीं है। यह आसमान हमारा है, हमारा ही रहेगा...'
"इन पानियों में भी दुश्मन का हमला होगा, चाहे कुछ भी हो जाए, दुश्मन यह बॉर्डर कभी पार नहीं कर पाएगा."
" जब आर्मी, एयरफोर्स और नेवी एक साथ हो जाए, तो हमे कोई नहीं हरा सकता है'" . 'दुनिया का हर ऑफिसर यही कहेगा की हम यह जंग हारेंगे लेकिन मैं कहता हूं कि यह जंग हम जीतेंगे.'फौजी के लिए बॉर्डर सिर्फ नक्शे पर खींची हुई एक लकीर नहीं है। बल्कि एक वादा है अपने देश से कि जहां वो खड़ा है उसके आगे कोई नहीं जाएगा उसके आगे कोई नहीं जाएगा.’ ।
तो आखिर क्यों देखनी चाहिए बॉर्डर 2? क्योंकि यह फिल्म सिर्फ़ कोई टाइम पास फिल्म नहीं है। यह आपको सोचने पर मजबूर करेगी कि हम चैन की नींद इसलिए सो पाते हैं क्योंकि कोई सरहद पर जाग रहा है। यह फिल्म आपको अपने फोन से नज़र हटाकर परदे पर टिकी रहने को मजबूर करेगी।यह आपको अपने बच्चों को बताने का मौका देगी कि असली हीरो कौन होते हैं।
'बॉर्डर 2' उन फिल्मों में से है जो थिएटर से निकलने के बाद भी आपके साथ चलती है। शायद आप अपने घर पहुंचकर अपने पापा से कहें, “आपने बॉर्डर देखी थी ना?” या अपने बच्चे को गले लगाकर सोचें कि काश हर कोई अपने देश से इतना प्यार करे।
आज के दौर में जब सिनेमा सिर्फ़ ग्लैमर और कमाई का ज़रिया बनता जा रहा है, वहां बॉर्डर 2 एक ताज़ी हवा की तरह है। यह फिल्म कह रही है कि सिनेमा सिर्फ़ एंटरटेनमेंट नहीं, जिम्मेदारी भी है।
और शायद यही वजह है कि बॉर्डर 2 सिर्फ़ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक एहसास है… एक सलाम है… उन सबको, जो बिना किसी शोहरत के हमारी हिफ़ाज़त करते हैं।
फिल्म की कुछ हाइलाइट्स
सनी देओल की धमाकेदार वापसी
वरुण, दिलजीत और अहान पहली बार फौजी अवतार में
ज़मीन, आसमान और समंदर – तीनों मोर्चों की असली कहानी
1971 की जंग के अनसुने हीरो
फिल्म फैक्ट्स
क्या आप जानते हैं?
वरुण धवन ने इस फिल्म के लिए 6 महीने फौजी ट्रेनिंग ली
दिलजीत दोसांझ ने एयर फोर्स के असली पायलट्स से मुलाकात की
समंदर के सीन असली वॉरशिप पर शूट किए गए।
फिल्म में कोई फेक यूनिफॉर्म नहीं, सब असली डिज़ाइन।
कई सीन में रियल आर्मी अफसर भी दिखेंगे।
सनी देओल ने कई डायलॉग खुद इम्प्रोवाइज किए
फिल्म के लिए खास मिलिट्री सलाहकार रखे गए
बॉर्डर 1 के कुछ क्रू मेंबर्स इस फिल्म में भी शामिल हैं
लेटेस्ट न्यूज़ सेक्शन
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बॉर्डर 2 को सेंसर बोर्ड ने बिना कट के पास किया।
टीज़र को 24 घंटे में मिलियन से अधिक व्यूज़ मिले।
सोशल मीडिया पर #Border2 ट्रेंड कर चुका है।
फौजी परिवारों के लिए फिर से स्पेशल स्क्रीनिंग रखी जाएगी,
कई आर्मी कैंप में फिल्म की चर्चा हो रही है।
मेकर्स स्कूलों में स्पेशल शो प्लान कर रहे है।
dia mirza | Actress Dia Mirza | Bollywood Actress | Environmental Activist | climate change awareness not present in content
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