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आज के दौर में जब हम 'वूमेंस डे' यानी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की बात करते हैं, तो बॉलीवुड की चमक-धमक के पीछे छिपी उन अनगिनत महिलाओं की आवाज़ें सुनाई देती हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और जिद्द से समाज की बरसों पुरानी सोच को बदल कर रख दिया है। भारतीय सिनेमा, जिसे हम बॉलीवुड के नाम से जानते हैं, वह केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि हमारे समाज का आईना भी है। पिछले कई दशकों में इस आईने में महिलाओं की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पहले जहाँ फिल्मों में हीरोइन का काम सिर्फ हीरो के पीछे नाचना, सुंदर दिखना या मुसीबत पड़ने पर रोना होता था, आज वही महिलाएं अपनी फिल्मों को अपने दम पर बॉक्स ऑफिस पर हिट करा रही हैं और दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रही हैं।
बॉलीवुड के इतिहास से लेकर आज तक ऐसी कई महिलाएं रही हैं जिन्होंने यह साबित किया कि वे किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं हैं।
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बॉलीवुड की वो महिलाएं जिन्होंने साबित की 'नारी शक्ति' की महिमा :
नरगिस दत्त: फिल्म 'मदर इंडिया' में नरगिस ने एक ऐसी माँ का किरदार निभाया जो अपने सिद्धांतों और सच्चाई के लिए अपने ही बेटे को गोली मार देती है। यह फिल्म और उनका किरदार आज भी भारतीय सिनेमा में नारी शक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। उन्होंने दिखाया कि औरत सिर्फ कोमल नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर चट्टान जैसी मजबूत भी हो सकती है।
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दीपिका पादुकोण: दीपिका कहती है, "नारीत्व का जश्न मनाने के लिए हमें किसी एक खास दिन का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है। एक महिला की असली शक्ति उसकी सहनशीलता और उसकी संवेदनशीलता में होती है।" दीपिका मानती हैं कि महिलाएं बिना अपनी कोमलता खोए दुनिया पर राज कर सकती हैं। वे कहती हैं कि नारी की ताकत उनके वजूद में है।
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प्रियंका चोपड़ा: बरेली जैसे छोटे शहर से निकलकर हॉलीवुड तक का सफर तय करना कोई मामूली बात नहीं है। प्रियंका ने साबित किया कि अगर आपके सपने बड़े हैं और आप कड़ी मेहनत करने को तैयार हैं, तो आसमान की कोई सीमा नहीं है। वे आज दुनिया भर की लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं।प्रियंका चोपड़ा जो अब एक ग्लोबल आइकन बन चुकी हैं, उनका विचार बहुत प्रेरणादायक है। प्रियंका कहती हैं कि नारी शक्ति का मतलब यह नहीं है कि हम पुरुषों की तरह व्यवहार करें, बल्कि इसका मतलब यह है कि हम अपनी स्त्री शक्ति को अपनी ताकत बनाएं। वे कहती हैं कि एक महिला एक साथ बुद्धिमान, महत्वाकांक्षी और दयालु हो सकती है।प्रियंका चोपड़ा का मानना है कि एक महिला एक साथ उदार और स्त्री सुलभ दोनों हो सकती है, उसे अपनी शक्ति साबित करने के लिए पुरुषों की नकल करने की जरूरत नहीं है।
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आलिया भट्ट का कहना है कि आज की नारी को किसी के सहारे की ज़रूरत नहीं है। आलिया मानती हैं कि जब एक महिला खुद पर भरोसा करना शुरू कर देती है, तो पूरी दुनिया उसके सामने झुक जाती है।
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वहीं कंगना रनौत जैसे सितारे यह मानते हैं कि महिलाओं को समाज के बनाए खांचों में फिट होने की ज़रूरत नहीं है, उन्हें अपनी खुद की राह बनानी चाहिए। उन्हे अपनी खुद की उड़ान खुद तय करना चाहिए।
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विद्या बालन: विद्या ने 'द डर्टी पिक्चर' और 'कहानी' जैसी फिल्मों से यह साबित किया कि फिल्म हिट कराने के लिए किसी बड़े खान या कपूर (हीरो) की ज़रूरत नहीं होती। उन्होंने अपनी बॉडी इमेज और सशक्त किरदारों से नई मिसाल पेश की। एक समय था जब बॉलीवुड में माना जाता था कि फिल्म तभी हिट होगी जब उसमें कोई बड़ा हीरो होगा। लेकिन विद्या बालन ने इस धारणा को चकनाचूर कर दिया। उन्होंने साबित किया कि अगर कहानी अच्छी हो और अदाकारी में दम हो, तो एक महिला अपने दम पर पूरी फिल्म का बोझ उठा सकती है।
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सुष्मिता सेन: सुष्मिता ने न केवल 'मिस यूनिवर्स' का खिताब जीतकर देश का मान बढ़ाया, बल्कि असल जिंदगी में भी नारी शक्ति की मिसाल पेश की। उन्होंने बहुत कम उम्र में अकेले दम पर दो बेटियों को गोद लिया और एक 'सिंगल मदर' के रूप में उन्हें पाला। समाज की पुरानी सोच को चुनौती देना ही उनकी असली शक्ति थी। ब्रह्मांड सुंदरी (Miss Universe) बनने के बाद उन्होंने अकेले दम अभिनय क्षेत्र में अपनी धाक जमाई और पर्सनल लाइफ में दो बेटियों को गोद लेकर 'सिंगल मदर' के रूप में समाज की पुरानी सोच को चुनौती दी।
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एकता कपूर: कैमरे के पीछे रहकर मनोरंजन जगत की शक्ल बदलने वाली एकता कपूर ने यह साबित किया कि महिलाएं न केवल अच्छी कलाकार होती हैं, बल्कि वे बहुत ही काबिल बिजनेस वुमन भी होती हैं। उन्होंने टीवी इंडस्ट्री पर सालों तक राज किया और हज़ारों महिलाओं को रोजगार दिया।एकता कपूर ने कैमरे के पीछे रहकर मनोरंजन की दुनिया को बदल कर टीवी और फिल्मों में महिलाओं के किरदारों को घर-घर पहुँचाया। उन्हें इंडस्ट्री की सबसे पावरफुल बिजनेस वुमन माना जाता है।
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वूमेंस डे सिर्फ one day की बात नहीं है। अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख खान तक का मानना है कि महिलाओं का सम्मान हर दिन होना चाहिए।
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन हमेशा कहते हैं कि परिवार में एक बेटी का होना किसी भी परिवार के लिए गर्व की बात है और महिलाओं को वह दर्जा मिलना चाहिए जिसकी वे हकदार हैं।
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आज फिल्मों में नारी को 'बेचारी' या 'त्याग की मूर्ति' के रूप में नहीं दिखाया जाता है, आज की भारतीय सिनेमा महिलाओं को एक नई रोशनी में दिखा रहा है।
आज की फिल्मों में हम देखते हैं कि महिलाएं डॉक्टर, पायलट, जासूस, देश की रक्षक और पहलवान बन रही हैं। 'दंगल' फिल्म में लड़कियों को पहलवानी करते देखना या 'गुंजन सक्सेना' में एक महिला पायलट की कहानी देखना यह साबित कर रहा है कि अब समाज की सोच बदल रही है। फिल्म 'थप्पड़' ने यह संदेश दिया कि नारी का थोड़ा सा अपमान भी बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए, और फिल्म 'पिंक' ने पूरी दुनिया को समझाया कि जब एक महिला 'ना' कहती है, तो उसका मतलब सिर्फ 'ना' ही होता है। सिनेमा का इतिहास गवाह है कि बॉलीवुड की कई महिलाओं ने मुश्किल रास्तों पर चलकर अपनी पहचान बनाई है:
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बॉलीवुड और वूमेंस डे का रिश्ता अब सिर्फ सोशल मीडिया पर फूलों की फोटो डालकर 'हैप्पी वूमेंस डे' लिखने तक सीमित नहीं रह गया है। आज की बॉलीवुड की महिलाएं—चाहे वह पर्दे पर हों या पर्दे के पीछे—अपनी फिल्मों, अपने विचारों और अपनी असल जिंदगी के फैसलों से यह बता रही हैं कि वे पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
अब woman's power का मतलब यह नहीं है कि हम पुरुषों से बहस या लड़ाई करें , या उनसे आगे निकलने की होड़ में लगें रहें या कम कपड़े पहन कर उन्हे ललकारें और अगर मर्द उनके इस रूप को देखकर बहक जाए तो उसकी धुनाई कर दें करें। नारी शक्ति का असली मतलब है अपनी पहचान बनाना, अपनी आवाज़ उठाना और हर हाल में अपना आत्मसम्मान बनाए रखना। बॉलीवुड की ये गौरवशाली महिलाएं हमें सिखाती हैं कि हर महिला के अंदर एक 'शक्ति' छिपी है, बस ज़रूरत है तो उस शक्ति को पहचानने की और उसे बाहर निकालने की। इस महिला दिवस पर हमें यही संकल्प लेना चाहिए कि हम हर महिला के सपनों का सम्मान करेंगे और उन्हें एक ऐसा माहौल देंगे जहाँ वे खुलकर सांस ले सकें और अपनी मंजिल पा सकें।
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