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ताजा खबर: भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और नेताKamal Haasan ने हाल ही में Rajya Sabhaमें अपना पहला भाषण देकर एक नई राजनीतिक पारी की गंभीर और विचारशील शुरुआत की. अपने संबोधन में कमल हासन ने प्रगतिशील लोकतंत्र की वकालत की और कहा कि भारत जैसे देश में लोकतंत्र की जड़ें केवल राजनीति में ही नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और खासतौर पर सिनेमा में भी गहराई से जुड़ी हुई हैं.
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सिनेमा को लेकर एक्टर ने क्या कहा (Kamal Haasan Rajya Sabha speech)
कमल हासन (Kamal Haasan maiden speech) ने अपने भाषण में सिनेमा को समाज का आईना बताते हुए कहा कि भारतीय फिल्में दशकों से सामाजिक बदलाव, सवाल उठाने और जनभावनाओं को अभिव्यक्त करने का माध्यम रही हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि सिनेमा ने आम जनता को सोचने, सवाल करने और अपनी आवाज़ पहचानने की ताकत दी है. उनके अनुसार, यही सोच लोकतंत्र को मजबूत बनाती है. कमल हासन ने यह भी कहा कि जब कला स्वतंत्र होती है, तभी लोकतंत्र जीवंत रहता है.
प्रगतिशील सोच की जरूरत पर जोर (Kamal Haasan Parliament address)
अपने पहले संसदीय भाषण में कमल हासन ने “प्रगतिशील लोकतंत्र” शब्द का बार-बार इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे लोकतंत्र की जरूरत है, जो समय के साथ विकसित हो, नई पीढ़ी की आकांक्षाओं को समझे और बदलाव से न डरे. उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नीति निर्माण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय में भी दिखना चाहिए.
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कला और राजनीति का संगम (Kamal Haasan makes first Rajya Sabha speech)
कमल हासन ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे सिनेमा में बिताए वर्षों ने उन्हें समाज को करीब से समझने का मौका दिया. उन्होंने कहा कि एक कलाकार होने के नाते उन्होंने लोगों के दर्द, संघर्ष और उम्मीदों को परदे पर उतारा, और वही अनुभव अब उनकी राजनीतिक सोच को दिशा दे रहा है. उनके मुताबिक, जब राजनीति मानवीय संवेदनाओं से जुड़ती है, तभी वह जनता के लिए सार्थक बनती है.
युवा भारत के लिए संदेश
अपने संबोधन के दौरान कमल हासन ने युवाओं का खासतौर पर जिक्र किया. उन्होंने कहा कि युवा भारत बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है और उन्हें केवल दर्शक नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सक्रिय भागीदार बनना चाहिए. उन्होंने युवाओं से सवाल पूछने, तर्क करने और जिम्मेदारी से अपनी बात रखने का आह्वान किया. कमल हासन ने कहा कि सिनेमा ने हमेशा युवाओं को प्रेरित किया है और अब वही ऊर्जा लोकतंत्र को आगे बढ़ा सकती है.
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एक नई राजनीतिक भूमिका की शुरुआत
राज्यसभा में कमल हासन का यह पहला भाषण केवल औपचारिक संबोधन नहीं था, बल्कि यह उनके विचारों, अनुभवों और भविष्य की राजनीति की झलक भी था. सिनेमा से राजनीति तक का उनका सफर यह दर्शाता है कि कला और लोकतंत्र एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं. उनके इस भाषण को एक ऐसे नेता की आवाज़ के रूप में देखा जा रहा है, जो संवाद, प्रगतिशील सोच और सांस्कृतिक मूल्यों के जरिए लोकतंत्र को मजबूत करना चाहता है.
FAQ
कमल हासन ने राज्यसभा में पहला भाषण कब दिया?
Kamal Haasan ने हाल ही में राज्यसभा में अपना पहला औपचारिक भाषण दिया.
अपने पहले भाषण में कमल हासन ने किस मुद्दे पर जोर दिया?
उन्होंने प्रगतिशील लोकतंत्र की वकालत की और कहा कि इसकी जड़ें सिनेमा, कला और संस्कृति में भी हैं.
कमल हासन ने लोकतंत्र और सिनेमा को कैसे जोड़ा?
उनका कहना था कि सिनेमा समाज को सोचने, सवाल करने और अभिव्यक्ति की आज़ादी देता है, जो लोकतंत्र को मजबूत बनाता है.
क्या कमल हासन ने युवाओं का जिक्र किया?
हां, उन्होंने युवाओं को लोकतंत्र का सक्रिय भागीदार बनने और सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया.
कमल हासन के भाषण को खास क्यों माना जा रहा है?
यह उनका पहला राज्यसभा भाषण था, जिसमें उन्होंने अपने सिनेमा अनुभव को राजनीतिक सोच से जोड़ा.
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