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आज थोड़ी देर पहले जब श्री आनंद सागर (लीजेंडरी फ़िल्म एंड टेलीविजन डाइरेक्टर प्रोड्यूसर डॉक्टर रामानंद सागर के पुत्र) के निधन की खबर मिली, तो दिल अवसाद से भर उठा. अभी कुछ ही समय पहले ही तो उनके छोटे भाई प्रेम सागर के मृत्यु के दर्द से बॉलीवुड उबर भी नहीं पाई थी और आज यह दुखद खबर ने दिल कचोट दिया.
आनंद सागर पिछले पंद्रह साल से बीमारी से लड़ रहे थे. आज बड़ी खामोशी के साथ सुबह उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. आनंद सागर ने सिर्फ अपने लीजेंड पिता, निर्माता निर्देशक, डॉक्टर रामानंद सागर के नाम पर पहचान नहीं बनाई, बल्कि उन्होंने पिता के छत्र छाया और निर्देश में अपना रास्ता खुद बनाया, अपनी मेहनत से, अपने अंदाज़ से.
उनका फिल्मी सफर सत्तर के दशक में शुरू हुआ.
मशहूर फ़िल्ममेकर रामानंद सागर के बेटे आनंद सागर ने ज़्यादातर फ़ीचर फ़िल्मों और टेलीविज़न सीरीज़ को डायरेक्ट करने पर फ़ोकस किया, और अक्सर फ़ैमिली बैनर, सागर आर्ट्स के तहत काम किया. वे एक ऐसे डायरेक्टर थे जो दर्शकों की नब्ज समझते थे और एक्शन, रोमांस और कॉमेडी को आसानी से मिलाते थे. आनंद सागर की डायरेक्ट की हुई फ़िल्में हैं, हमराही (1974), राम भरोसे (1977), प्यारा दुश्मन (1980), अरमान (1981), ज़ुल्फ़ के साये साये (1983), बादल(1985), मोती घर नी लाज (गुजराती 2000), भगत सिंह (2002) आकली पोराटम (2017 तेलुगु फ़िल्म). सागर परिवार में, प्रोडक्शन का काम अक्सर उनके भाई सुभाष या प्रेम सागर संभालते थे, जबकि आनंद अक्सर डायरेक्शन या एग्जीक्यूटिव रोल निभाते थे. वैसे उनके विशिष्ट कार्यकारी निर्माता क्रेडिट में शामिल हैं, फिल्म आँखें, अरमान.
आनंद सागर को टेलीविजन में उनके सशक्त काम, कई प्रतिष्ठित श्रृंखलाओं के निर्देशन और निर्माण के लिए भी व्यापक रूप से पहचाना जाता है, पिता रामानंद सागर के साथ तो वे 1987 के मेगा टीवी सीरीज़ 'रामायण' में सहायक थे ही साथ ही उन्होने कई और टीवी सीरीज़ का निर्देशन किया जैसे अलिफ़ लैला, जय गंगा मैया, बसेरा, जय जय जय बजरंग बली. फिर 2008–2009 में भी उन्होने बतौर निर्देशक फिर से रामायण सिरीज़ बनाया.
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वे सिर्फ निर्देशक नहीं थे, बल्कि सागर परिवार की उस परंपरा के रक्षक थे, जहाँ काम को इबादत माना जाता है. उन्होंने हमेशा अपने पिता की निर्देशन विरासत को संभाल कर रखा, लेकिन उसमें अपनी सोच भी जोड़ी. मेरे लिए ये खबर सिर्फ एक फिल्मकार के जाने की नहीं है. मैं, सुलेना मजुमदार अरोरा, जब अपने पत्रकारिता के शुरुआती दिनों में अंधेरी में रहती थी, तब सागर परिवार से काफी मिलना-जुलना होता था. नटराज स्टूडियो का माहौल अपनेपन से भरा रहता था. आनंद जी शांत स्वभाव के थे, ज्यादा बोलते नहीं थे.मैं उनके छोटे भाई प्रेम सागर जी के सम्पर्क में ज्यादा थी.
आज जब आनंद सागर नहीं रहे, तो लगता है जैसे मेरे अपने अतीत का एक हिस्सा चला गया. उनके साथ जुड़ी यादें, वो दौर, वो स्टूडियो… सब आँखों के सामने घूम रहा है. आनंद सागर ने कभी सुर्खियों के पीछे भागने की कोशिश नहीं की, लेकिन उन्होंने जो काम किया, वो आज भी लोगों के दिल में जिंदा है. ईश्वर उनकी आत्मा को सुकून दे. और हम सबको उनकी बनाई कहानियों में उनका चेहरा हमेशा दिखता रहे.
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सागर परिवार ने यह मेसेज पोस्ट किया था
बहुत दुख और शोक के साथ, सागर परिवार अपने प्यारे पिता, श्री आनंद रामानंद सागर चोपड़ा के दुखद निधन की घोषणा करता है, जिनका आज, 13 फरवरी 2026 को शांति से निधन हो गया.
अंतिम संस्कार इस तारीख को होगा:
तारीख: शुक्रवार, 13 फरवरी 2026
समय: शाम 4:30 बजे
जगह: हिंदू श्मशान भूमि (पवन हंस), मुंबई.
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