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TTT Movie : पागलपन की भी होती है समझदारी—‘थलाइवर थम्बी थलैमैयिल’ का मज़ेदार रिव्यू

ताजा खबर: कहते हैं, एक इंसान की समझदारी दूसरे के लिए पागलपन हो सकती है. यही बात निर्देशक नितीश साहदेव की तमिल फिल्म ‘थलाइवर थम्बी थलैमैयिल’ (TTT) पर बिल्कुल फिट...

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ताजा खबर: कहते हैं, एक इंसान की समझदारी दूसरे के लिए पागलपन हो सकती है. यही बात निर्देशक नितीश साहदेव की तमिल फिल्म ‘थलाइवर थम्बी थलैमैयिल’ (Thalaivar Thambi Thalaimaiyil) पर बिल्कुल फिट बैठती है. पोंगल के मौके पर रिलीज़ हुई यह डार्क कॉमेडी अपने अजीबोगरीब किरदारों और उलझे हालात के जरिए दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करती है.

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क्या है कहानी (TTT movie story)

फिल्म की शुरुआत होती है एक मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति से, जो अपने चाचा के घर में खुद को बंद कर आग लगाने की कोशिश करता है. तभी पंचायत अध्यक्ष जीवा रत्नम (जीवा) पहुंचते हैं और उससे पूछते हैं—“मैं अच्छा इंसान हूं या पागल?”यही सवाल पूरी फिल्म में गूंजता रहता है और हर किरदार की हरकतें इसी दुविधा को और गहरा करती जाती हैं.

शादी बनाम मातम: जब हालात हो जाएं बेकाबू (Thalaivar Thambi Thalaimaiyil review)

कहानी उस दिन की है, जब एक तरफ इलवरसु की बेटी सौम्या की शादी होने वाली है और दूसरी तरफ उनके बुज़ुर्ग पड़ोसी की अचानक मौत हो जाती है. इलवरसु को शक हो जाता है कि यह मौत जानबूझकर करवाई गई है ताकि शादी में खलल डाला जा सके.
वहीं मणि (थम्बी रामैय्या) अपने बीमार पिता की जिंदगी में तो उनकी परवाह नहीं करता, लेकिन मौत के बाद अचानक उनका सबसे बड़ा शुभचिंतक बन जाता है—सिर्फ इसलिए ताकि इलवरसु को नीचा दिखा सके. वह उसी वक्त भव्य अंतिम संस्कार की घोषणा करता है, जब पड़ोस में शादी का मुहूर्त है.

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पंचायत अध्यक्ष की मुश्किल: सबको संभालने की जद्दोजहद

इन दो उन्मादी परिवारों के बीच फंसे हैं पंचायत अध्यक्ष जीवा रत्नम (Jiiva new movie), जो दोनों समारोहों को संभालने का बीड़ा उठाते हैं. मगर हर कदम पर हालात और बिगड़ते चले जाते हैं. उनकी नीयत भले ही सही हो, पर परिस्थितियां उन्हें बार-बार कीचड़ में धकेल देती हैं—यहीं से फिल्म की कॉमिक टाइमिंग और धारदार हो जाती है.

कॉमेडी का खज़ाना: छोटे पल, बड़ी हंसी (Tamil dark comedy film)

नितीश साहदेव की स्क्रिप्ट की सबसे बड़ी ताकत है साधारण हालात से असाधारण हंसी निकालना.कभी किसी झगड़ालू आदमी को बेहद शांति से कमरे से बाहर कर दरवाज़ा बंद कर देना,कभी केले बेचने वाले का गलत आदमी से लिफ्ट मांग लेना,तो कभी अंतिम संस्कार की जगह शादी में घुस आईं ‘ओप्पारी’ दादियां—हर पांच मिनट में कोई न कोई ऐसा पल आता है, जो दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर देता है.

हंसी के पीछे छिपी सोच

‘TTT’ सिर्फ कॉमेडी नहीं है. इसके भीतर कई ऐसे सबटेक्स्ट हैं, जो बिना उपदेश दिए समाज की छोटी-छोटी सच्चाइयों पर उंगली रखते हैं. पंचायत के पानी के टैंक से जुड़ा सब-प्लॉट यह दिखाता है कि निर्देशक कैसे हल्के-फुल्के अंदाज में भी गहरी बात कह जाते हैं.

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कलाकारों की दमदार परफॉर्मेंस

फिल्म में जीवा का हल्का-फुल्का, जमीन से जुड़ा किरदार उन्हें लंबे समय बाद बेहद पसंदीदा बनाता है.थम्बी रामैय्या और इलवरसु अपने-अपने अजीब लेकिन असरदार रोल्स में पूरी तरह फिट बैठते हैं.साथ ही विष्णु विजय का बैकग्राउंड स्कोर इस अराजक दुनिया को सही लय देता है और फिल्म की एनर्जी बनाए रखता है.

तमिल सिनेमा के लिए नई दिशा?

लंबे समय तक यह धारणा रही कि मलयालम-टच वाली फिल्में मतलब स्लो और आर्ट-हाउस सिनेमा. लेकिन ‘थलाइवर थम्बी थलैमैयिल’ जैसी फिल्में इस सोच को तोड़ती हैं. यह साबित करती हैं कि बिना भारी संदेश दिए भी, सिर्फ कहानी और किरदारों के दम पर दर्शकों को भरपूर एंटरटेन किया जा सकता है.

FAQ 

Q1. ‘थलाइवर थम्बी थलैमैयिल’ किस तरह की फिल्म है?

उत्तर: यह एक डार्क कॉमेडी ड्रामा है, जिसमें अजीब हालात और पागलपन भरे किरदारों के जरिए हंसी और सोच—दोनों का मेल दिखाया गया है.

Q2. फिल्म का निर्देशन किसने किया है?

उत्तर: फिल्म का निर्देशन नितीश साहदेव ने किया है.

Q3. फिल्म में मुख्य भूमिका कौन निभा रहा है?

उत्तर: मुख्य भूमिका में जीवा नजर आते हैं, जो पंचायत अध्यक्ष जीवा रत्नम का किरदार निभाते हैं.

Q4. कहानी का मुख्य कॉन्फ्लिक्ट क्या है?

उत्तर: एक तरफ शादी और दूसरी तरफ पड़ोसी की मौत—इसी टकराव से शुरू होता है पूरा हंगामा और कॉमेडी.

Q5. फिल्म का सबसे खास डायलॉग/थीम क्या है?

उत्तर:मैं अच्छा इंसान हूं या पागल?” — यही सवाल पूरी फिल्म की आत्मा है.

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