‘पीके’ मूवी रिव्यु: धर्म और ईश्वर की सच्चाईं जाननी है तो ‘पीके’ देखें

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राजकुमार हिरानी शायद बाॅलीवुड के इकलौते ऐसे राइटर, डायरेक्टर है जो इतनी बैलेंस फिल्में बनाते है जो मास और क्लास दोनों की पंसद पर खरी साबित होती हैं। इसके बाद आमिर खान के बारे में कहना होगा कि वो भी शायद इकलौते ऐसे एक्टर है जिसे स्क्रिप्ट की भारी समझ है दूसरे वो एक्टर तो विलक्षण है ही। जब ये दोनों मिलकर काम करते हैं तो ‘पीके’ जैसी बेहतरीन फिल्म सामने आती है। जिसका एक-एक फे्रम मिनिंग फुल है। जिसमें ह्यूमर है इमोशन है और सटायर भी है। एक ऐसी फिल्म जो, जो भी कहती है वो आंख खोल देने वाला सच होता है जिसे मानने पर बाध्य होना पड़ता है और सबसे बड़ी बात कि ऐसी सच्चाई से एक दूसरे ग्रह का शक्स आकर बताता है।

PK movie stills 2014

एक दूसरे ग्रह से आया एक एलियन (आमिर खान) राजस्थान में उतरता है। उस ग्रह के लोग कपड़े नहीं पहनते। लेकिन उनके गले में एक चेन होती है जिसमें एक डायमंड नुमा चीज होती है जिससे वे एक दूसरे से संपर्क कर सकते हैं। उसी दौरान एक चोर उस एलियन की चेन चुराकर भाग जाता है।लेकिन भागते हुए वह अपना एक टू इन टेपरिकार्डर छोड़ जाता है। अब एलियन के लिये सबसे बड़ी मुसीबत ये हैं कि वो अपनी चेन को कैसे ढूंढे जो उसके ग्रह से संपर्क करने का एकमात्र साधन था। दूसरी प्राॅब्लम उसके साथ ये थी कि न तो उसके पास पहनने के लिये कपड़े थे और न ही उसे कोई भाषा का ज्ञान था। लिहाजा पहले तो वो कपड़ों का इंतजाम करता है फिर अपनी चेन ढूंढने निकलता है तो एक टेक्सी टेंपो चालक संजय दत्त के टेंपो से टकरा जाता है। अस्पताल में डाक्टर उसकी याददाश जाने की बात कहते है तो वो एलियन को अपने घर ले आता है। एलियन को बोलने के लिये एक भाषा चाहिये वो उसे तभी आ सकती है जब वो किसी का हाथ पकड़ ले तो उसके जरिये उसकी भाषा उसके भाीतर ट्रांसफर हो सकती है इसलिये जब भी वो किसी ओरत का हाथ पकड़ना चाहता है तो उसे गलत समझ लिया जाता है। संजय उसे एक वैश्या के पास ले जाता है जिसका वो करीब 6 घंटे तक हाथ पकड़ पूरी भाषा ट्रान्सफर कर लेता है लेकिन वो महिला भोजपुरी होती है इसलिये वो भोजपुरी बोलने लगता है। तब वो सजंय को बताता है कि उसकी चेन किस तरह और कहां चोरी हुई। सजंय उसे कहता है कि अगर चेन मंहगी है तो चोर उसे यहां नहीं, दिल्ली ले जाकर बेचेगा। एलियन दिल्ली आ जाता है और जब वो किसी से भी अपनी बात कहने की कोशिश करता है तो उसे कहते हैं क्या ‘पीके’ आया है। बाद में उसका नाम ‘पीके’ पड़ जाता है। एक नाम वो हर किसी की जुबान से सुनता है वो है भगवान। जब भी वो किसी से अपनी चेन के बारे सवाल करता है तो उसे कहा जाता है भगवान का नाम लो वही दिलवायेगा तुम्हारी खोई हुई चेन। अनुष्का उर्फ जग्गू उर्फ जगत जननी एक टीवी रिपोर्टर है। उसके पिता (परीक्षित साहनी) एक स्वामी सौरभ शुक्ला के अन्नय भक्त हैं। वे हर काम उनसे पूछकर ही करते हैं। जब उनकी बेटी विदेश में पढ़ने गई तो वहां उसका एक पाकिस्तानी लड़के सुशांत सिहं राजपूत से प्यार हो जाता है जब ये बात उसके पिता को पता चलती है तो वे भागे-भागे स्वामी के पास जाते हैं तो स्वामी भविष्वाणी करता हैं कि वो लड़का उससे शादी नहीं करेगा। बाद में ऐसा ही होता हैं। अनुष्का वापस दिल्ली आ जाती है और एक चैनल में रिपोर्टर बन जाती है। लेकिन उसके पिता उससे नाराज रहते हैं इसलिये वो उनसे अलग रहती है जबकि वो अपने पिता को बहुत चाहती है। खैर एक बार उसकी मुलाकात ‘पीके’ से होती हैं तो उसे वो अजीब सा प्राणी लगता है। जो वो कहता है वो उसे कोरी गप्प लगती है। लेकिन जब वो एक बार साबित कर देता है कि वो वाकई दूसरे ग्रह से आया प्राणी है जो अपना संपर्क यंत्र ढूंढ रहा है। अनुष्का उसे अपने घर ले आती है और उसे वादा करती है कि वो उसकी चेन ढूंढने में मदद करेगी। और एक दिन उसे वो यंत्र स्वामी के पास दिखाई देता है जिसे स्वामी भोले शंकर की माला से टूटा हुआ मनका बताता है। और जब उसे लगता है कि स्वामी धर्म के नाम पर लोगों को बेवकूफ बना रहा है तो उससे ऐसे-ऐसे सवाल करता है कि स्वामी को अपनी पोल खुलती नजर आती है। अनुष्का के चैनल एडिटर बोमिन इरानी पहले तो ‘पीके’ की स्टोरी चलाने से मना कर देते हैं लेकिन ‘पीके’ से मिलने के बाद उन्हें यकीन हो जाता है कि ये शक्स जरूर स्वामी पर भारी पड़ने वाला है। दरअसल एक बार स्वामी ने बोमन इरानी को बेइज्जत किया था इसलिये वे चाहते थे कि स्वामी का बैंड बजना चाहिये। एक दिन ‘पीके’, स्वामी का बैंड बजाकर उसे बेनकाब कर देता है। यही नहीं ‘पीके’ इस बात का भी पर्दाफार्श कर देता हैं कि सुशांत सिंह ने अनुष्का से शादी करने से मना नहीं किया था बल्कि वो भी स्वामी जी का ही षड्यंत्र था इसलिये वो तो आज भी उसका इंतजार कर रहा है। दूसरे ग्रह का होने के बाद भी ‘पीके’ अनुष्का से प्यार करने लगता है लेकिन जब उसे पता चलता हे कि वो किसी और से प्यार करती है तो वो अपना प्यार अपने साथ लिये चुपचाप अपने ग्रह लौट जाता है।

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‘पीके’ एक फिल्म के रूप में ऐसा दस्तावेज हैं जिसके लिये राजू हिरानी और आमिर खान को याद किया जायेगा। हालांकि फिल्म में एलियन कहानी का सिर्फ बैकड्राप है अपने आपको एलियन साबित करने के लिये आमिर कुछ नही करते सिर्फ अदाकारी के। कौन कहेगा कि वे 48 वर्ष के हो चुके हैं। फिल्म में वे महज बीस बाइस साल के लगते हैं। फिल्म के एक-एक फ्रेम में उनकी अदाकारी देखते बनती हैं। वे जिस अदा से हंसाते हैं उतनी ही शिद्दत से रूलाते भी हैं। बेशक फिल्म में अनुष्का ने भी अपनी भूमिका बहुत अच्छे से निभाई है। और सुशांत सिंह को भी काफी स्पेस मिला है आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि फिल्म में अनुष्का उसकी हीरोइन है। इनके अलावा रोहिताशव गोड, परिक्षित साहनी, ब्रिजेन्द काला, राम सेठी, अरूण बाली, रूखसार आदि आर्टिस्ट एक दो सीन करने के बावजूद याद रह जाते हैं। सौरभ शुक्ला, स्वामी जी की भूमिका को यादगार बना जाते हैं वहीं संजय दत्त फिल्म में जितना अरसा दिखाये देते है अच्छा लगता है। राजू हिरानी के साथ अभिजात जोशी ने कथा और पटकथा तथा सवांद इतने उम्दा लिखे हैं कि वे अगर हंसाते हैं तो उतनी ही शाइस्तगी से रूलाते भी है। फिल्म देखते हुए फिल्म ‘ओह माई गाॅड’ की याद आती है लेकिन ये उसे कहीं ज्यादा प्रभावशाली और बेहतरीन फिल्म है। फिल्म का बस एक ही वीक प्वाइंट है म्युजिक। जो थोड़ा वीक है। लेकिन फिल्म में वो भी अच्छा लगता है। जहां तक फिल्म के बारे में कहने की बात है। तो पूरी फर्राखदिली से कहा जा सकता है कि आपको धर्म और ईश्वर के बारे में जानना है तो ‘पीके’ देख लें।

– श्याम शर्मा


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