खुदा, कुदरत और किस्मत ने मिलकर एक हल्का सा थप्पड़ मारा और ‘आशीर्वाद’में दिन में रात हो गई

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यदि केवल राजेश खन्ना को यह पता होता कि जीवन केवल कुछ अलिखित नियमों के अनुसार खेला जाने वाला एक छोटा खेल है, तो वे शायद अधिक लंबा जीवन जीते और आने वाले वर्षों तक सुपरस्टार बने रहते। यदि केवल राजेश खन्ना जानते थे कि जीवन और मृत्यु के बीच केवल एक ही सांस का फासला है, तो वह जितना जीते उससे कहीं बेहतर जीवन जीते। यदि केवल राजेश खन्ना अपनी सफलता की कहानी के साथ प्यार में पागल नहीं होते और जीवन के एक ऐसे तरीके के रूप में सफलता हासिल कर लेते जो उनके जीवन का हिस्सा नहीं बन सकता, तो वह एक बेहतर इंसान होते। लेकिन एक आदमी के लिए मेरी सोच का क्या फायदा जिसने यह तय कर लिया था कि वह अपनी मर्जी के मुताबिक जिंदगी जीएगा।

 ये वो विचार थे जो मेरे दिमाग में चलते रहते थे और मैं आमिर खान के घर के पास से निकल रहा था जो प्रसिद्ध ‘आशीर्वाद’ के ठीक पीछे था।

मुझे पता था कि गिरते हुए  सुपरस्टार का अच्छा स्वास्थ्य नहीं था। आखिरी बार जब मैं उनसे ‘आशिर्वाद’ में मिला था, तब एक टीवी चैनल उन्हें एक लोकप्रिय शो में लाने की कोशिश कर रहा था और उन्होंने मुझसे कहा था कि वह केवल तभी शो करेंगे, जब उन्हें उसी पैसे का भुगतान किया जाएगा जो अमिताभ बच्चन को केबीसी के लिए पे किया जाता था और चैनल की टीम ‘आशीर्वाद’ से बाहर चली गई थी और वापस नहीं लौटी थी। उन्होंने ‘अदा’ नामक एक फिल्म की थी जो उन्होंने मुझे दिखाई थी और मेरे पास पूर्व सुपरस्टार को यह बताने का साहस नहीं था कि उन्होंने अपने करियर के अंत में बहुत खराब फिल्म की थी। मैंने अभिनेत्री दीप्ति नवल से उनका परिचय कराया था जब उन्होंने मुझे पहली बार बताया था कि उन्होंने उनके बारे में नहीं सुना था और फिर कहा था ‘वो छोटी सी काली लड़की, हाँ उसको लेकर आओ’ और इससे पहले कि मैं दीप्ति से उन्हें मिलवाता, वे पहले ही मिल चुके थे और उन्होंने साथ में समय भी बिताया था। वह रिट्जवी कॉलेज के बाहर और मेन रोड पर अपनी मारुति कार के बोनट पर नशे में पाए गए थे। वह बहुत कमजोर हो गए थे और एक फीकी छाया की तरह लग रहे थे। उनके परिवार ने उन्हें वर्षों के लिए छोड़ दिया था, लेकिन वे तब एक साथ आए थे और वे उन्हें सबसे अच्छे रेस्तरां और छुट्टियों पर ले गए थे। वह जानते थे कि वह मर रहे है और उन्होंने अपनी विल भी लिखी थी।

मैं आमिर के अपार्टमेंट पर पहुँच गया था, लेकिन दरवाजा खुलने से पहले, मुझे दुबई से फोन आया और संदेश मिला कि राजेश खन्ना मर चुके हैं।

मैं बलैंक हो गया था और आमिर के साथ अपनी मुलाकात के बारे में सब भूल गया और आशीर्वाद चला गया जहाँ मैंने देखा कि पूरा इलाका सुनसान था। सौभाग्य से, एक सुरक्षा गार्ड जिसने मुझे देखा हुआ था, उसने मुझे पहचान लिया और मुझे ‘आशीर्वाद’ के अंदर जाने दिया। सुपरस्टार ने जहाँ एक बार राज किया था वहाँ उनकी कुछ बेहतरीन पार्टियाँ होती थीं, खासतौर पर उनके चम्मचों के साथ। (चम्मचों) पुरुषों की एक नस्ल जिसका एकमात्र काम चापलूसी करना होता है और उनकी पसंदीदा लाइन्स में से एक थी ऊपर आका, नीचेे काका, बाकी सबकी माका।

हॉल में ऐसा लग रहा था जैसे उसने लंबे समय से रूम नहीं देखा है। और जैसे ही मैंने पहली मंजिल की ओर देखा, मैंने देखा कि दो आदमी राजेश खन्ना के शव को नीचे ला रहे हैं, वही राजेश खन्ना जिसका मानना था कि वह भगवान था और अमर था। मैं महान राजेश खन्ना को गंदी बेडशीट में ले जाने की कल्पना नहीं कर सकता था। उन्होनें शव को नीचे एक चटाई पर लिटा दिया उसे उसी बेडशीट से ढंक दिया। उन्हें इतनी सजा क्यों दी जा रही थी, मैं खुद से पूछता रहा। पुरुष जल्दबाजी में उनकी एक ब्लैक एंड वाइट तस्वीर ले आए और उसे एक दीवार के पास रख दिया, जहाँ उनका शरीर रखा था। मैं एक बार फिर उस आदमी के बारे में कैसे सोचू जिसकी उंगलियाँ लड़कियों चूमा करती थी और जिसके पैरों को छूने के लिए हजारों लोग मरे जाते थे अब अचानक एक बॉडी में बदल दिया गया था।

मैं भारत के पहले सुपरस्टार के शरीर को देखने वाला पहला बाहरी व्यक्ति था। मैं रोना चाहता था, लेकिन आँसूओं ने मेरा सहयोग करने से इनकार कर दिया और इससे पहले कि मैं कुछ और सोच पाता, उनके दोस्तों और प्रशंसकों की भीड़ आशीर्वाद में चली आई और मुझे सचमुच बाहर धकेल दिया गया था। सुपरस्टार फिर से एक सुपरस्टार के रूप में उठने और चमकने वाले थे।

मैं चुपचाप घर आ गया और यह सोचकर खुद को सांत्वना दी कि मैं अगली सुबह जुहू श्मशान में उनके अंतिम संस्कार में भाग लूंगा, लेकिन मैं आधे रास्ते तक भी नहीं पहुंच पाया था जब मैंने जाने-माने लोगों को अपनी कारों को घर वापस मोड़ते देखा और मुझे यह बताया गया कि श्मशान के पास पहुंचना असंभव है। मेरा अनुमान सही था। राजेश खन्ना फिर से सुपरस्टार बन गए थे, तो क्या हुआ अगर यह उनकी मृत्यु के बाद हुआ था तो।

मैंने अगली बार उनके चैथा में जाने का फैसला किया और बताया गया कि यह बांद्रा में ताज लैंड्स एंड में आयोजित किया जा रहा था। मैं अपने दोस्त कल्याण रॉय के साथ ताज में पहुंचा था, जो मानते थे कि मैं एक बड़ा आदमी था, जिसे इंडस्ट्री में हर कोई जानता था। रॉय को मेरे बारे में सच्चाई का पता तब चला जब हम एंट्रेंस गेट पर पहुंचे जहा सुरक्षा गार्डों ने मुझसे पूछा कि क्या मुझे आमंत्रित किया गया है और जब मैंने कहा कि नहीं, तो उन्होंने मुझे वहां से चले जाने के लिए कहा क्योंकि वहाँ एक समस्या थी। मैंने यह जानने का इंतजार नहीं किया था कि समस्या क्या थी। सच कहूं, तो मुझे हर्ट हुआ था और एक सुपरस्टार से जुड़े एक कार्यक्रम से मुझे बाहर निकलने के लिए मुझे अपमानित महसूस हुआ था, वह सुपरस्टार जो मेरे साथ ड्रिंक्स के लिए इंतजार करते थे और फिर अपने हाथों से खाना भी खिलाते थे। और अपने आदमी बाला को न केवल मुझे घर छोड़ने के लिए कहते थे, बल्कि यह देखने के लिए भी कहते थे कि मैं सही से अपने घर में प्रवेश कर चुका हूं और बिना किसी समस्या के सो गया हूं या नहीं।

क्या क्या याद रखे, काकाजी? ये यादें ही है आपकी जो मुझे और मेरे जैसे लाखों चाहने वालो के पास आपको हमारे करीब रखती है, आने वाले लाखों दिनों में मैं लोगों को बताऊंगा की मैं आप को कुछ करीब से जानता था, लोग माने या ना माने।

अनु- छवि शर्मा

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Mayapuri