22 जनवरी, 1980 को हुई थी ऋषि कपूर और नीतू की शादी, मीडिया से केवल मायापुरी के रिपोर्टर हुए थे शामिल, देखें अनदेखी तस्वीरें

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सुलेना मजूमदार की यादों के पन्ने से कुछ यादें….यादों ने करवट ली और ऋषि कपूर का वो चेहरा उभर आया जो हँसते हँसते गुलाबी पड़ गया था। आज दुनिया जब कोरोना के कहर से ग्रस्त है, तब हमारे बॉलीवुड को भी एक ऐसे ग्रहण से गुज़रना पड़ रहा है जहां काल ग्रसित होने लगे हैं बॉलीवुड के ऐसे ऐसे सितारे जिनकी उम्र भी नहीं थी अलविदा कहने की। 54 वर्षीय इरफान खान के गुज़रने के अगले दिन ही बॉलीवुड के सुपरस्टार रह चुके 67 वर्षीय ऋषि कपूर का देहावसान की स्तब्ध करने वाली खबर ने बॉलीवुड की भावनात्मक कमर तोड़ दी। ऐसे वक्त में जब कोविड 19 के चलते कोई किसी से मिल नहीं सकता, कोई किसी के दुख दर्द में शामिल नहीं हो सकता, हमारे हाथ मे कुछ नहीं सिवाय दर्द और ढेर सारी यादों के।इन यादों में चन्द खुशनुमा यादें भी हैं जो बॉलीवुड की लोकप्रिय पत्रिका मायापुरी के संपादक श्री पी के बजाज ने हमसे साझा की, जब वर्ष 1980 की 22 जनवरी को सुपरस्टार ऋषि कपूर और प्रसिद्ध एक्ट्रेस नीतू सिंह की बिग फैट पंजाबी वेडिंग में उनके पापाजी (मायापुरी के प्रोपराइटर तथा तत्कालीन संपादक ए पी बजाज) शामिल हुए थे। वह जमाना स्मार्ट मोबाइल का नहीं था। कलर फोटोग्राफ्स भी बड़ी कीमती और सोच समझ कर खींची जाती थीं। जिसे डेवलप होकर हाथ में आते आते दो-तीन दिन लग जाते थे। बात हो रही थी ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शादी की जिसमें शामिल होने और आशीर्वाद देने के लिए द ग्रेट शो मैन ऑफ बॉलीवुड राज कपूर की तरफ से श्री ए पी बजाज एंड फैमिली को निमंत्रित किया गया था। बजाज जी के साथ मायापुरी के तत्कालीन व्यवस्थापक जे एन कुमार साहब और मायापुरी पत्रिका के निजी फोटोग्राफर भी थे। संगीत सेरेमनी, नाच गाना तथा कई अन्य रिचुअल्स राज कपूर के घर पर सम्पन्न हुए, लेकिन शादी चेंबूर के विशाल गोल्फ कोर्स में होनी थी क्योंकि मेहमानों की फेहरिस्त लंबी थी।पापाजी ए पी बजाज साहब, अपनी टीम के साथ वेडिंग वेन्यू पहुँचे तो वहां बॉलीवुड के सारे टॉप सेलिब्रिटीज की आवभगत में लगे, सर पर गुलाबी पगड़ी बाँधे, व्यस्त राज कपूर जी ने बजाज जी को गले से लगा लिया। उस दिन, वे बॉलीवुड के एकमात्र महान शो मैन और सपनों के सौदागर राज कपूर नहीं, सिर्फ एक पिता थे जो अपने बेटे ऋषि की शादी के आयोजन में कोई कमी नहीं रखना चाहते थे। मायापुरी के पर्सनल फोटोग्राफर ने अपना कीमती विदेशी कैमरा हाथों में लेकर सबसे पहले, सबसे एक्सक्लूसिव फोटोज खींचने की तैयारी कर ली लेकिन बजाज साहब ने उन्हें यह कहकर रुक जाने को कहा कि इस वेडिंग की पहली तस्वीरें खींचने का हक राज कपूर साहब के पर्सनल फोटोग्राफर्स और उनके पर्सनल सिने कैमरामैन को मिलना चाहिए , पहले वे लोग फोटो खींचना शुरू करें तब मायापुरी के फोटोग्राफर फोटो खींचना शुरू करें। बहुत ही धूमधाम से ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शादी सम्पन्न हुई। अन्य कई नामचीन अंग्रेजी पत्र पत्रिकाओं के फोटोग्राफर्स ने भी फुल इवेंट की तस्वीरें खींची। लेकिन उसके बाद जो हुआ उससे पूरी इंडस्ट्री हैरान रह गई… बजाज जी ने अपने कमाल के सोर्स और आईडियाज़ से उन तस्वीरों को रातों रात डेवेलप करवाया और मायापुरी के नवीनतम अंक में प्रकाशित कर दिया। एक तरह से तहलका मच गया। जब आर के स्टूडियो में रखे शादी के बाद रिसेप्शन में बजाज जी ने दूल्हा दुल्हन ऋषि और नीतू की रंगीन खूबसूरत तस्वीरों और शादी समारोह पर लेखों से भरी मायापुरी की ताजातरीन अंक भेंट की तो सब आश्चर्य मिश्रित खुशी से भर गए, वहां उपस्थित सभी सेलिब्रिटीज (हेमा मालिनी, देवानन्द, अमिताभ बच्चन, दिलीप कुमार, सायरा बानो, यश चोपड़ा, जीतेन्द्र, शशि कपूर, राजेन्द्र कुमार, रेखा, राजेश खन्ना, राखी, प्रेमनाथ, तथा और भी बहुत सारे टॉप स्टार्ज) ने मायापुरी में रातोंरात प्रकाशित हो चुके ऋषि कपूर और नीतू सिंह की टेक्निकलर एक्सट्रेवगंज धूमधाम वाली ग्रैंड, आर के ट्रेडिशन शादी की चमचमाती तस्वीरें और राइट अप देख आश्चर्य में पड़ गए। कोई शक नहीं कि राज कपूर, ऋषि कपूर के लिए वो मायापुरी संस्करण स्पेशल भेंट साबित हुई और मायापुरी की प्रसिद्धि भी इससे रातोंरात बढ़ गई।आज जब यादें करवट ले रही हैं तो ऋषि कपूर के साथ मेरी वो मुलाकात भी याद आ रही है जो सन नब्बे में होली अंक के लिए मैंने उनसे की थी। किस्मत से उन दिनों भी ए पी बजाज जी दिल्ली से मुंबई आए थे। तय समय में बजाज जी (जिन्हें मैं दादू पुकारती थी और वे मुझे दीदी पुकारते थे), मेरे गुरु पन्नालाल जी और मैं, तीनों आर के स्टूडियो पहुँच गए। ऋषि जी अपने स्पेशल रूम में लंच कर रहे थे, हमारे आने की खबर पर उन्होंने लंच लेते लेते ही हमे अंदर निमंत्रित किया और हमारे लाख मना करने के बावजूद हम तीनों के साथ अपने लार्ज, सात आठ डब्बों वाले टिफिन बॉक्स से लंच शेयर किया, वे बोले, ‘अक्सर मैं घर पर ही लंच लेने जाता हूँ, या फिर यहीं लंच बनता है लेकिन आज स्पेशल डे है इसलिए सैवन डेकर लंच बॉक्स हाजिर है। इंटरव्यू शुरू होने से पहले शरारत से उन्होंने दादू बजाज साहब से पूछा, ‘साहब इंटरव्यू तो होता रहेगा, आज मैं आपसे एक प्रश्न करता हूँ कि मायापुरी पत्रिका का नाम मायापुरी कैसे पड़ा, आज तो दिल्ली का वो पूरा इंडस्ट्रियल इलाका ही मायापुरी के नाम से वर्ल्ड फेमस है?’ इस प्रश्न पर बजाज जी ने जवाब दिया, ‘हमारी पुश्तैनी पब्लिकेशन लाहौर में अरोरबंस प्रेस के नाम से सौ साल (1882) से भी पुरानी है। पार्टीशन के बाद दिल्ली में शिफ्ट होकर यही प्रेस का काम शुरू किया, फिर बच्चों की पहली हास्य पत्रिका ‘लोटपोट’ शुरू की और उसकी जबरदस्त कामयाबी के बाद हमारे शुभचिंतकों के जोर देने पर एक फिल्म पत्रिका शुरू करने की सोची तो प्रश्न उठा पत्रिका का नाम क्या रखा जाए? उन दिनों उस इंडस्ट्रियल स्टेट का नाम था रेवाड़ी लाइन इंडस्ट्रियल एरिया जहाँ हमारी प्रेस थी, उन दिनों वहां तक जाने के लिए कोई वाहन तैयार नहीं होता था। एक दिन मैं रेवाड़ी लाइन इंडस्ट्रियल एरिया जाने के लिए कोई वाहन ढूंढ रहा था, जे एन कुमार जी भी साथ थे, बड़ी देर खड़ा रहा,

नोटः इन तस्वीरों पर मायापुरी पत्रिका का कॉपीराइट है। किसी भी तरीके से इन्हें कॉपी नहीं किया जा सकता।
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Mayapuri