अमिताभ बच्चन की वो रात जो उन्होंने बिना सोये गुज़ारी इस चिंता में की उनकी फोटो ‘स्क्रीन’ के फ्रंट पेज़ पर छपेगी या नहीं

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अली पीटर जॉन

आज के जमाने में कोई ऐसा अखबार, मैग़जीन, टी.वी.चैनल या सोशल मीडिया नहीं है जो अमिताभ बच्चन के बारे में बिना कुछ लिखे रह पाता है. लेखक, रिपोर्टर और यहाँ तक की एडिटर भी हर तरीके से अमिताभ बच्चन के बारे में कोई न कोई न्यूज़ बनाकर डालना पसंद करते हैं. और अमिताभ बच्चन भी अपना हर संभव प्रयास करते हैं कि वो मीडिया की नज़र से दूर रहे. उनकी सिक्योरिटी है जो हमेशा इस अरेंजमेंट का ध्यान रखती है कि वो किसी भी वैन्यू, ऑडिटोरियम या फाइव स्टार होटल में वहां के गुप्त दरवाजे से ही जाए और आएँ, ताकि पैपराजीस से बच सकें.
यह अलग दौर है और वो अलग दौर था जब अमिताभ बच्चन मीडिया की अटेंशन के लिए बेताब रहते थे. उस वक मीडिया में बहुत से ऐसे लोग थे जो मानते थे कि अमिताभ बच्चन के बारे में कुछ भी छापना जरूरी नहीं है क्योंकि  कोई भी अमिताभ बच्चन के बारे में पढ़ना नहीं चाहेगा.
अमिताभ अपने करियर में उस वक्त असफलता का सामना कर रहे थे क्योंकि उनकी लगातार बहुत सी फिल्में फ्लॉप हो चुकी थी. उसी दौरान उनके एक मित्र ने सुझाव दिया कि अमिताभ अपनी फोटो ‘स्क्रीन’ के फ्रंट पेज़ पर छपने कि लिए भेज दे क्योंकि यही एक तरीका था फिल्म मेकर्स के ध्यान में आने का. उनका मानना था कि स्क्रीन के फ्रंट पेज़ पर अगर किसी कलाकार की फोटो छपी हो और साथ में उसके बारे में कुछ लाइनें लिखी हो तो यह बात बहुत महत्व रखती है उस कलाकार के  जीवन में.
अमिताभ बच्चन ने हर वो प्रयास किया जिसकी वजह से वो मीडिया की अटेंशन पा सकें . उन्होंने उस वक्त के प्रमुख PRO गोपाल पांडे की भी मदद ली जो उस वक्त बड़े स्टार्स जैसे जया भादुरी के लिए काम कर रहे थे जिनके साथ अमिताभ ने  कुछ फ्लॉप फिल्में भी की थी और उस वक्त ऐसा माना जा रहा था कि दोनों के बीच अफेयर चल रहा है.
गोपाल पांडे ने स्क्रीन के एडिटर मिस्टर एस.एस.पिल्लई से  संपर्क किया. उनको हिंदी फिल्मों या किसी और फिल्मों के बारे में कुछ ज्यादा ज्ञान नहीं था, जो स्क्रीन के एडिटर के पोस्ट के लिए मुख्य क्वालिफिकेशन थी, ऐसा उस वक्त के इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप ऑफ पब्लिकेशन के संस्थापक गोयनका का मानना था. स्क्रीन इसी पब्लिकेशन का छोटा सा भाग था.
मिस्टर पिल्लई ने PRO से वादा किया कि वो इस नये हीरो की फोटोग्राफ को आने वाले किसी ईशु में छाप देंगे पर ये उनका एक तरह से ना था. उनकी रुचि दिलीप कुमार, राज कपूर और  देवानंद की फोटोग्राफ्स छापने में ज्यादा थी.
अमिताभ हर शुक्रवार को इस उम्मीद में रहते थे कि इस बार की ‘स्क्रीन’ में उनकी फोटो छपेगी पर  कितने शुक्रवार गुजर गये पर उनकी फोटो नहीं छपी.
अमिताभ ने इस बात को ‘करो या मरो’ वाला प्रयास बना दिया था और वो दिन में तीन चार बार मिस्टर पिल्लई को फोन किया करते थे. एक गुरुवार अमिताभ ने लगातार  मिस्टर पिल्लई को कॉल किया ताकि वो उन्हें यह समझा सके कि उनके लिए स्क्रीन के फ्रंट पेज पर आना कितना महत्वपूर्ण है और अमिताभ तब जाके संतुष्ट हुए जब उनको कहा गया कि अगली सुबह उनकी फोटोस्क्रीन के फ्रंट पेज पर होगी . अमिताभ इस बात को लेकर इतने उत्साहित थे कि वो पूरी रात सो नहीं पाए.  अौर वो सुबह के तीन बजे चर्चगेट स्टेशन के लिए निकल गए जब उनको पता चला कि इंडियन एक्सप्रेस के पेपर्स मुंबई की अलग-अलग जगहों पर डिलीवर होने के लिए निकल चुके हैं
इंडियन एक्सप्रेस की ट्रक स्टेशन पर पहुंची और अमिताभ उसके  पीछे ऐसे भागें जैसे कोई रिफ्यूज़ी खाने से भरे ट्रक के पीछे भागता है. उन्होंने स्क्रीन की कुछ कॉपीस उठाई और अपनी फोटो को लगातार निहारते रहे जैसे कि वो कोई सपना देख रहे हो.
ये अमिताभ बच्चन और ‘स्क्रीन’ के बीच की एक लंबे एसोसिएशन की शुरुआत थी. एक बार अमिताभ बच्चन ने पूरी मीडिया को बैन कर दिया था पर स्क्रीन को नहीं किया था. विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी अमिताभ बच्चन  और स्क्रीन के बीच का संबंध हमेशा मजबूत रहा. जब अमिताभ का नाम बोफोर्स स्केंडल में आया था तब सभी अखबारों ने उन्हें बैन कर दिया था. पर मैं तभी भी उनके बारे में लिखता था मैं उनकी फिल्म के बारे में, उनके करियर के बारे में लिखता था और इसी वजह से मुझे मीडिया के लोगों ने बर्खास्त करने की कोशिश की पर उनका यह प्रयास असफल रहा.
वो 26 जनवरी का दिन था. उस दिन को इंडियन एक्सप्रेस के कर्मचारी बहुत खास तरीके से मनाते हैं. मैं अमिताभ से इस दिन से एक दिन पहले मिला था और मैंने उनसे कहा था कि वो वर्कर्स को बधाई देने हेतु एक पत्र लिखें और अमिताभ ने कहा था कि, “अली मैं खुद आकर उन लोगों को बधाई दूंगा” .इस बात को सुनकर मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया था और अमिताभ बच्चन एक्सप्रेस टावर्स में आने वाले है यह बात आग की तरह फैल गई. पर जब ये बात एक्प्रेस ग्रुप के चेयरमैन मिस्टर विवेक गोइनका को पता चली तो उन्होंने शर्त रख दी कि या तो वो या अमिताभ.
इस तरह से अमिताभ बच्चन की यह योजना रद्द हो गई.
अगली सुबह मैंने टेलीफोन बुथ पर जाके अमिताभ को फोन किया और उन्हें इस घटना के बारे में बताया. वो बिल्कुल शांत थे और  मुझसे भी शांत रहने को कहा. उन्होंने कहा कि, “मुझे पता था कि ऐसा कुछ होगा, तो इस बात को भूल जाओ, क्योंकि तुम भी जानते हो और मैं भी जानता हूं कि जब हमने यह योजना बनाई थी तब कर्मचारियों के प्रति हमारा इरादा नेक था.
अमिताभ और एक्सप्रेस के बीच का ये युद्ध लंबे समय तक चला. जब भी एक्सप्रेस किसी अवॉर्ड शो या किसी भी समारोह में अमिताभ को बुलाना चाहते थे तो वो  मुझसे कहते थे अमिताभ को आमंत्रण देने को. और अमिताभ ने मेरे आमंत्रण को हर बार स्वीकार किया है.  देर से ही सही पर वो  हर समारोह में उपस्थित रहे हैं, चाहे वो शो सुबह के 2:30 बजे ही क्यों ना हो.
अमिताभ को जब  डॉक्टरों ने ब्रीच कैंडी अस्पताल में खतरे से बाहर बताया था तब उन्होंने मुझे अपने रुम में बुलाया और अपने द्वारा लिखी एक चिट्ठी मुझे दी. इस पत्र में मेरे और स्क्रीन द्वारा  उनके जीवन और मृत्यु की लड़ाई में उनका साथ देने के लिए अमिताभ ने हमें धन्यवाद दिया था.एक्सप्रेस ग्रुप ने इस पत्र को अपने एडिटप से स्क्रीन के फ्रंट पेज़ पर छापने को कहा. अमिताभ पहले कलाकार थे जो ‘स्क्रीन’ जिसको वो एक संस्था मानते थे, उसके अचानक से बंद होने पर दुखी हुए थे.

 

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