अजय देवगन सर के साथ काम करना सपना सच होने जैसा है’’ आकांक्षा सिंह

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Aakanksha Singh

फिजियोथेरेपिस्ट की पढ़ाई करते करते सीरियल ‘ना बोले तुम ना बोले हम’ से अभिनय करियर की शुरूआत करने वाली आकांक्षा सिंह अब तक हिंदी में ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ के अलावा तेलगु फिल्मों ‘मल्ली राव’ और ‘देवदास’ की गत वर्ष कन्नड़, मलयालम, हिंदी, तमिल व तेलगू भाषा की फिल्म ‘पहलवान’ में सुदीप के साथ नजर आयी थीं।

शान्तिस्वरुप त्रिपाठी

जय देवगन के निर्देषन में बन रही फिल्म ‘मे डे’ में भी अभिनय कर रही हैं

इन दिनों वह कई तमिल व तेलगू की फिल्में कर रही है। वहीं वह दो लघु फिल्मों ‘मेथी के लड्डू’ तथा ‘कैद’ को लेकर भी चर्चा में है। इतना ही नहीं वह अजय देवगन के निर्देषन में बन रही फिल्म ‘मे डे’ में भी अभिनय कर रही हैं।

Aakanksha Singh

आकांक्षा सिंह के संग हुई खास बातचीत के अंश

दिसंबर 2011 से दिसंबर 2020 नौ वर्ष हो गए। अपने नौ वर्ष के करियर को आप किस तरह से देखती हैं?
मैं खुद को एक कछुआ की तरह मानती हूँ , जो कि धीरे-धीरे अपने करियर को आगे बढ़ा रही हूँ। अपनी गति से ही चल रहा है। मुझे भी कहीं भी पहुंचने की जल्दबाजी नहीं है। मेरी यात्रा स्टडी और स्लो है। मैं खुद को किसी घुड़दौड़ का हिस्सा नहीं समझती। पर जीत हासिल करने की ही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मेरी यात्रा अब तक बहुत अच्छी रही है। मुझे अब तक जिस तरह के किरदार निभाने के मौके मिले हैं, उससे खुश हूँ। मैं खुद को खुशनसीब मानती हूँ कि मेरे पास विविधतापूर्ण किरदारों के ही ऑफर आ रहे हैं। मैंने अब तक किसी भी किरदार को दोहराया नहीं है।

मैं कभी भी अपनी लाइफ को प्लान नहीं करती। टीवी सीरियल ‘ना बोले तुम ना बोले हम’ के हिट होते ही मुझे तेलुगु फिल्म ‘मिल्ली रा’ मिली। फिर नागार्जुन सर के साथ फिल्म ‘देवदास’ में काम करने का मौका मिला। फिर ‘पहलवान’ मिली, जो कि पांच भाषाओं में डब होकर रिलीज हुई।
इसके बाद मैंने तमिल व तेलुगु में ‘क्लैप’की। कुछ दूसरी फिल्में कीं। फिर हिंदी में दो लघु फिल्में ‘मेथी के लड्डू’ और ‘कैद’ की। अब अजयदेवगनके निर्देशन में उनके साथ फिल्म ‘मे डे’ कर रही हूं।
लघु फिल्मों की तरफ मुड़ने की क्या वजह/सोच रही?
मेरी राय में किसी भी कलाकार के लिए केवल एक माध्यम नहीं होता है, जिसमें वह अपनी प्रतिभा का प्रर्दशन करे। कलाकार को तो हर माध्यम में अपनी प्रतिभा का प्रदर्षन करते रहना चाहिए। कलाकार के लिए अपने टैलेंट/प्रतिभा को दिखाने का माध्यम कुछ भी हो सकता है। मैंने लघु फिल्म ‘कैद’ और ‘मेथी के लड्डू’ में अभिनय करते हुए पूरा आनंद लिया। मेरा अनुभव काफी अच्छा रहा है।
किसी भी लघु फिल्म से जुड़ते समय आप किस बात पर ध्यान देती हैं?
लघु फिल्म के चयन के लिए कोई विशेष मापदंड नहीं है। यह सिर्फ इतना है कि मुझे कहानी को महसूस करना चाहिए और इसके द्वारा आगे बढ़ना चाहिए। सभी लघु फिल्में ऐसी नहीं होती हैं, लेकिन मैंने जो दो लघु फिल्में की हैं, वह बहुत ही भरोसेमंद और ठोस हैं।
जब मैं किसी लघु फिल्म की पटकथा सुनती हूं, तो मेरे अंदर से ‘वाह क्या कहानी या किरदार है’ की आवाज आनी चाहिए। तो मैं तुरंत उसका हिस्सा बनने के लिए हामी भर देती हूं। मुझे लगता है कि यह आपकी प्रतिभा दिखाने और कुछ ही मिनटों में अपनी कहानी बताने के लिए एक बहुत अच्छा मंच है।
अपनी कहानी को व्यक्त करने और बताने के लिए यह एक जबरदस्त और कठिन काम है। मुझे लगता है कि अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए यह एक अद्भुत मंच है। मैं लघु फिल्म ‘चटनी’ की प्रषसंक हूं. इसमें टिस्का चोपड़ा ने वास्तव में बहुत अच्छा काम किया है।

“यह फिल्म ट्रांसजेंडर और कामुकता के विवादास्पद विषय पर आधारित है” आकांक्षा सिंह


 लघु फिल्म ‘कैद’ को लेकर क्या कहेंगी?
लघु फिल्म ‘कैद’ का जब मुझे ऑफर मिला, तो मुझे बताया गया कि यह वास्तव में एक अलग तरह की फिल्म है। इस भूमिका के लिए मुझसे संपर्क करने वाले व्यक्ति ने मुझे बताया कि उसे यकीन नहीं था कि मैं ऐसा कर पाऊंगी या नहीं, यह मेरी पसंद पर निर्भर करता है।
क्योंकि यह फिल्म ट्रांसजेंडर और कामुकता के विवादास्पद विषय पर आधारित है। लेकिन जब मैंने इसकी पटकथा सुनी और पढ़ी, तो मुझे लगा कि मुझे इस खास फिल्म को अवष्य करना चाहिए। इस फिल्म में हमारे साथ निकी चावला हैं। वह एक ट्रांसजेंडर हैं और इंडस्ट्री में काफी लोकप्रिय नाम है।
उन्होंने 20 साल की उम्र में लिंग बदलवाया था। उनकी कहानी सुनने के बाद मुझे ऐसा लगा कि मुझे यह फिल्म करनी है। मेरे लिए वास्तव में यह महत्वपूर्ण था कि मैं उस कहानी का हिस्सा बनूं, जिसने मुझे इस हद तक छुआ हो। मुझे लघु फिल्म ‘कैद’ पर बहुत गर्व है।
इस फिल्म में इस समस्या को मनोवैज्ञानिक स्तर पर दिखाया है अथवा?
इस फिल्म में इस समस्या को पूरी तरह से विज्ञान की कसौटी के साथ ही मनोविज्ञान की कसौटी पर कसा गया है। इसमें एक आंकड़ा दिया गया है कि पूरे विश्व में 21 मिलियन लोग खुद को ‘लिंग’ को लेकर कैद समझते हैं।
पर यह खुलकर अपने मन की बात नहीं कह पा रहे हैं, चाहे इन्हे जिस बात का भी डर रहता हो। समाज का डर रहता हो, पर सच कबूल नहीं कर पाते हैं। जबकि यह समस्या नहीं है, इसमें उनकी गलती भी नहीं है. यह तो जन्म के साथ ही उनके शरीर की फंश्निंग है।
लघु फिल्म ‘मेथी के लड्डू’ को लेकर क्या कहेंगी?
दूसरी फिल्म ‘मेथी के लड्डू’ करना भी एक अद्भुत अनुभव रहा। इस फिल्म में जरीना वहाब जी के साथ काम करने का अनुभव अविश्वसनीय था। अपने कैलिबर के अभिनेता के साथ स्क्रीन साझा करना एक ऐसी शानदार अनुभूति थी।
वह बहुत प्यारी हैं। मुझे उनके साथ काम करने में बहुत मजा आया। लघु फिल्म ‘मेथी के लड्डू’ देखने के बाद लोगों ने न सिर्फ मेरे अभिनय की तारीफ की, बल्कि कई फिल्म निर्देषकों ने मुझे अपनी फिल्म से जुड़ने के लिए बुलाया है।
लोगों ने इस लघु फिल्म को देखा है और कहा है कि वह इसमें मुझे प्यार करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं जिस तरह से देख रही हूं, मैंने जिस तरह से अभिनय किया है, वह सब कुछ वास्तव में अच्छा है। ऐसी लघु फिल्म के साथ जुड़ने का मुझे गर्व है।

“इस फिल्म में अजय देवगन की पत्नी की भूमिका में दिखाई दूंगी” आकांक्षा सिंह

आप तो अजय देवगनसंग फिल्म ‘मे डे’ कर रही हैं?
जी हाॅ! मैं इस फिल्म में अजय देवगन की पत्नी की भूमिका में दिखाई दूंगी। मैंने इसकी शूटिंग शुरू कर दी है। फिल्म ‘मे डे’ से जुड़ना एक सपना सच होने जैसा है। इस बड़ी फिल्म का निर्देशन अजयदेवगन कर रहे हैं। इसमें मैं अजय सर और अमिताभ सर के साथ स्क्रीन साझा करने के लिए बहुत उत्साहित हूं।
इस फिल्म में रकुल प्रीत सिंह और अंगिरा धर भी शामिल हैं। यह एक महत्वपूर्ण भूमिका है और मैं भाग्यशाली हूं कि फिल्म के पहले मुहूर्त शॉट ने मुझे इसमें शामिल किया। इस फिल्म का निर्माण ‘अजय देवगन फिल्म्स’ द्वारा किया जा रहा है। यह फिल्म 29 अप्रैल 2022 को रिलीज होगी।
 फिल्म ‘मे डे’ के किरदार को निभाने के लिए किस तरह का होमवर्क किया?
इस फिल्म के लिए मुझे किसी खास तरह का होमवर्क करने की जरुरत नहीं पड़ी। लेकिन जब मैं अजय देवगनसर से मिली और पटकथा पढ़ी, तब मैंने उनसे यह जाना कि वह किरदार से क्या आपेक्षा रखते हैं। वह इस किरदार को किस तरह से परदे पर देखना चाहते हैं।
मैं स्वयं आकांक्षा बनकर परदे पर नही आ सकती। मैं उनकी पत्नी के किरदार में ही परदे पर आना चाहती थी, तो जब दृश्य अच्छे हों, किरदार अच्छे ढंग से लिखा गया हो, निर्देशक अच्छा हो, तो सब कुछ आसान हो जाता है।
आप दोबारा टीवी पर काम करना चाहेंगी?
हमारे पास फिल्म, टीवी, लघु फिल्म, वेब सीरीज सहित काफी ऑक्शन आ गए हैं कि अब कलाकार किसी भी माध्यम पर अपना टैलेंट दिखा सकता है। फिलहाल अभी मैं निजी स्तर पर  टीवी पर कम ध्यान दे रही हॅूं। फिल्मों की तरफ ही मेरा सारा ध्यान है।

“सोशल मीडिया पर अपने विचार भी लिखती हूं” आकांक्षा सिंह


जब फिल्म थिएटर/सिनेमाघर में रिलीज होती है, तो कुछ ही घंटों में उसका रिस्पांस कलाकार को मिल जाता है। पर क्या ऐसा ओटीटी पर फिल्म या वेब सीरीज के रिलीज से मिलता है?
अभी तक मेरा कोई काम ओटीटी प्लेटफाॅर्म पर सीधे नहीं आयी है। अब पहली बार मेरी फिल्म आने वाली है, जब इसके बारे में पता चलेगा, तो आपको जरुर बताऊंगी।
सोशल मीडिया पर क्या लिखती हैं?
मैं अपनी फोटो डालती हूं। सोशल मीडिया पर अपने विचार भी लिखती हूं। मेरी जिंदगी से जुड़ी चीजें,जैसे जो मुझे ठीक लगता है, कैसे प्रमोशन करना है, हम सोशल मीडिया के माध्यम से अपने फैंस से कनेक्ट होते हैं और  हमें पता चलता है कि लाइफ में क्या हो रहा है।
इस फिल्म के अलावा नया क्या कर रही हैं?
मैंने राष्ट्रीय पुरस्कार  विजेता फिल्म निर्देशक सुषींद्र सर एक तमिल व तेलगू भाषा की फिल्म की शूटिंग पूरी की है, इसका नाम अभी नहीं रखा गया है। मगर यह फिल्म ओटीटी प्लेटफाॅर्म के लिए है। इसके अलावा मैंने एक स्पोर्ट्स फिल्म ‘क्लैप’ भी पूरी कर ली है। यह तेलगू व तमिल दो भाषाओं में बनी है।
इसमें मैंने एक हाॅकी प्लेयर का किरदार निभाया है। यह बहुत अलग किरदार है। इस फिल्म को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं। मैंने अभी से इस फिल्म के परदे पर आने के दिन गिनने शुरू कर दिए हैं।
इसके अलावा फिल्म ‘बाहुबली’ के निर्माता ‘आर्का मीडिया वर्क’ के साथ एक तेलगू भाषा की वेब सीरीज कर रही हूं। हिंदी में भी एक वेब सीरीज कर रही हूं, पर इसको लेकर अभी ज्यादा जानकारी नहीं दे पाऊंगी। इसके बारे में हम फरवरी माह में बात करेंगे।


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Mayapuri

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