सच्चे महानायक की महागाथा की कुछ झलकियाँ- अली पीटर जॉन

| 21-07-2021 05:30 AM 1 view

वह आठ साल के थे जब उसे अपने जन्मस्थान पेसावर में सेना की गोलीबारी का सामना करना पड़ा। वह बिल्कुल अकेला था और उसका परिवार उसके लिए बहुत चिंतित हो गया था। वह जैसे-तैसे जान बचाकर एक जगह छिप रहा और मौका पाते ही वहाँ से भाग कर घर पहुँच गया। उसे कोई चोट नहीं आई लेकिन यह घटना उनके दिमाग में कौंधती रही... उनका एक भरापूरा परिवार था और वह अपनी माँ से बहुत प्रेम करते थे, उनकी यादें वह अपने साथ तब तक संजोए हुए थे जब तक कि उनकी याददाश्त थी (दस साल पहले उन्होनें अपनी याददाश्त पर नियंत्रण खो दिया था और उनकी याददाश्त वापस आने की कोई संभावना नहीं थी। अंत में, वह अपनी पत्नी सायरा को भी नहीं पहचान सके। उनके दो भाइयों, असलम और एहसान की मृत्यु कोविड 19 की पहली लहर के दौरान हुई, लेकिन उन्हें उनकी मृत्यु के बारे में पता नहीं था। सोचने की बात है कि जो व्यक्ति एक समय जागरूक हुआ करता था। अंतिम समय में स्थिति यह थी कि देश या दुनिया को तो भूल जाएं, उनके घर में भी क्या हुआ उन्हें यह पता नहीं था।उन्हें हमेशा बॉम्बे टॉकीज के शुरुआती दिनों की याद आती थी कि कैसे वह, राज कपूर, देव आनंद और लता मंगेशकर मलाड स्टेशन तक ट्रेन से यात्रा करते थे और स्टूडियो के लिए बस या घोड़े की गाड़ी से जाते थे। वह अक्सर अपने, राज कपूर और देव आनंद के बीच दोस्ती के विषय में कहा करते थे कि ‘हम प्रतिस्पर्धी थे, प्रतिद्वंद्वी नही। उन्होंने देव आनंद को ‘अब तक का सबसे हैंडसम आदमी’ कहा और राज कपूर को ‘विवेक के साथ एक हास्य प्रतिभा’ कहा। एक महान अभिनेता होने के अलावा, वह एक लेखक भी थे, जो कभी-कभी स्क्रिप्ट लिख सकते थे और कभी-कभी गीतों को बेहतर बनाने और संवाद को प्रभावित करने के लिए सुझाव देते थे। उनके निर्देशकों के काम में उनके दखल के बारे में भी कई बातें प्रचलित हैं, जिसपर उन्होंने कहा था कि मैं एक अभिनेता के रूप में केवल सलाह दे सकता हूँ या फिल्म की भलाई के लिए सुझाव दे सकता हूँ। अगर निर्देशक को लगा कि मैं हस्तक्षेप कर रहा हूँ, तो वह अपना हाथ नीचे कर सकते हैं और मुझे रोक सकते हैं लेकिन उनमें से किसी ने भी ऐसा नहीं किया। वे अपनी कमजोरियों के लिए मुझे दोष क्यों देना चाहते हैं?उनके किसी निर्माता से अधिक शुल्क लेने के बारे में कोई सबूत नहीं है। उन्हें एक फिल्म के लिए आखिरी बड़ी रकम 12 लाख रुपये मिली थी। वह अक्सर कहते थे, “मैं इंडस्ट्री का सबसे गरीब अभिनेता हूँ।” वह एक अच्छे गायक भी थे, लेकिन उनका मानना था कि जिस क्षेत्र में वह आए हैं, उस पर ही ध्यान देना चाहिए। मैं एक अभिनेता हूँ और मुझे पता है कि मैं केवल अभिनय कर सकता हूँ। फिर मैं एक मान्यता प्राप्त गायक, निर्देशक या लेखक होने के बारे में क्यों सोचूं। जब उन्होंने कलिंग को निर्देशित करने के अपने फैसले की घोषणा की, तो मीडिया ने तीखी टिप्पणी की और उनमें से अधिकांश ने कहा कि वह आधिकारिक तौर पर अपनी पहली फिल्म का निर्देशन कर रहे थे। बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके पास बाइबिल, कुरान और भगवदगीता थी और वे तीनों पर समान अधिकार भी रखते थे। वे किसी भी तरह के दर्शकों में इन महान धार्मिक ग्रन्थों पर लंबा बोल सकते थे।लोगों को यह विश्वास करना मुश्किल है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में केवल 82 फिल्में की हैं, लेकिन तथ्य यह है कि उन्होंने 70 वर्षों में केवल 63 फिल्में की है और उनके पास मुंबई के पास देवलाली में और बैंगलोर में कुछ संपत्ति को छोड़कर बहुत कम संपत्ति थी। उनके झूठ बोलने, धोखा देने और लोगों को गाली देने के भी कोई सबूत नहीं है। वह आम लोगों, राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों सबसे उसी तरह एक ही लहजे में करते थे। वह एक सात सितारा होटल, यहाँ तक कि एक महल और स्टूडियो के एक कमरे में भी बिना शिकायत रह सकते थे। जिस व्यक्ति का उन्होंने उद्योग में सबसे अधिक सम्मान किया, वह अशोक कुमार थे, जिनके लिए वे कहते थे कि उन्होंने बॉम्बे टॉकीज में उनकी पहली फिल्म के दौरान और बाद में कई फिल्मों में उन्हें खूब प्रोत्साहित किया। आखिरी फिल्म ‘दुनिया’ उन्होंने साथ की थी।जिस व्यक्ति की हर तरफ प्रशंसा हुई, वह खुद मोतीलाल, लीला मिश्रा और कन्हैयालाल जैसे अभिनेताओं के प्रशंसक थे और बाद की पीढ़ी में, उन्होंने संजीव कुमार, नाना पाटेकर और स्मिता पाटिल के काम की प्रशंसा की। अपने करियर के अंत में उन्होंने दक्षिण में बनी धर्माधिकारी और कानून अपना अपना जैसी एक या दो बुरी फिल्में की। मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने ये फिल्में क्यों कीं जबकि उन्हें पता था कि वे उनके कैलिवर के लायक नहीं हैं, उन्होंने कहा कभी कभी दाल-रोटी का भी सोचना पड़ता है।” रेखा हमेशा से ही उनके साथ काम करना चाहतीं थीं लेकिन जब उन्हें एक नहीं बल्कि दो मौके मिले, तो उन्होंने जो फिल्में (आग का दरिया और किला) कीं, वे बहुत निराशाजनक साबित हुईं। आग का दरिया 25 साल तक रिलीज नहीं हुई। वह अंत में सेवानिवृत्त होने से पहले कुछ और फिल्मों में काम करना चाहते थे, लेकिन समय या नियति उनकी महत्वाकांक्षा के खिलाफ थी और 2000 में अत्यधिक खराब स्वास्थ्य के कारण वह रुक गए या रुकने के लिए मजबूर हो गए। अभी तो किस्से और बहुत बाकी हैं। एक सच्चे महानायक की महागाथा इतनी जल्दी खत्म थोड़ी हो सकती है।