Death Anniversary K.N.Singh: खलनायक भी नायक की एज-ग्रुप का होना चाहिए!
खलनायक के रूप में के. एन. सिंह का किसी जमाने में डंका बजा करता था. इसलिए खलनायक विशेषांक के लिए जब फोन पर इन्टरव्यू की इच्छा व्यक्त की तो जवाब मिला...
खलनायक के रूप में के. एन. सिंह का किसी जमाने में डंका बजा करता था. इसलिए खलनायक विशेषांक के लिए जब फोन पर इन्टरव्यू की इच्छा व्यक्त की तो जवाब मिला...
जीवन उनके लिए एक लंबा शो था, एक ऐसा शो जो 2 फरवरी को रात 8.30 बजे पर्दा गिरने तक सड़सठ साल तक चला रमेश देव के लिए एक शो के अलावा और क्या जीवन था, जिन्होंने 1955 में अपना अभिनय करियर शुरू किया
क्या आपा बता सकते हैं कि निम्न खूबसूरत नगमें किस सुरीली गायिका ने गाये हैं, किसके कंठ का माधुर्य छलकता है ऐसे हजारों गीतों में जैसे कि बियावान में बांसुरी बज रही हो कि बसंत ऋतु में कोयल कुहुक रही हो.
फिल्म-संगीत के करोड़ों श्रोताओं के सामने नये सिरे से ओ.पी. नैय्यर का परिचय देने की कोई आवश्यकता नहीं, नैय्यर की मस्त धुनों में जो रवानगी है, उसमें डूबने से कौन बचा होगा...
जिसने करीब दस साल के लम्बे संघर्ष के बाद इंडस्ट्री को एक ऐसी फिल्म दी जिसका आज भी कोई जवाब नहीं है। ये फिल्म थी बैजु बाँवरा और वो खूबसूरत, डैशिंग और लड़कियों के दिलों में जगह बनाने में माहिर कलाकार था “भारत भूषण”
एक नौजवान हीरो बनने के लिए बम्बई आया. पास में पैसे कम थे इसलिए क्राफर्ड मार्केट के पास किसी धर्मशाला में पांच रूपये दैनिक पर इतनी जगह मिल गई जहां कि ट्रंक रखा जा सकता था. यह और बात है कि उस टैंक पर सोने वाले से सोने के पैसे नहीं लिए जाते थे.
Birth Anniversary J Om Prakash: उन्होंने चालीस वर्षों से अधिक समय तक कुछ बेहतरीन फिल्में बनाईं, लेकिन वह एक ऐसे व्यक्ति थे जो भौतिकवादी से आध्यात्मिक रूप से जाने जाते थे. वह फिल्मों की दुनिया में एक मिसफिट की तरह लग रहा था...
70 से अधिक वर्षों में दिलीप कुमार ने अभिनेताओं, निर्देशकों, लेखकों और अन्य रचनात्मक दिमागों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। उनके नाम और प्रतिभा की सीख लेने वाले प्रमुख अनुयायियों में मनोज कुमार, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, लेखक सलीम और जावेद और सुभाष घई थे।