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बीते दिनों, फिल्म अभिनेता मिहिर आहूजा (Mihir Ahuja) ने अपनी हालिया रिलीज वेब सीरीज़ ‘शबद’ (Shabad) को लेकर खुलकर बात की. इस बातचीत में उन्होंने अपने किरदार ‘गुप्पी’ की मानसिक स्थिति, अपने अभिनय की तैयारी, सह-कलाकारों के साथ काम करने के अनुभव और जीवन से मिली सीखों को साझा किया. मिहिर के शब्दों में यह किरदार सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के भीतर चल रहे उस संघर्ष का प्रतिबिंब है, जहां सपने, परंपरा और परिवार के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. आइये जानते हैं उन्होंने इस बातचीत में कुआ कुछ कहा...
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फुटबॉल के मैदान में खुद को तलाशता ‘गुप्पी’ और घर की रीत-रिवाजों में बंधा वही लड़का—इस दोहरी पहचान वाले किरदार के लिए आपने कैसी तैयारी की?
गुप्पी का सपना फुटबॉलर बनने का है. फुटबॉल फील्ड में वह खुद को सबसे ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस करता है वह अपनी टीम का कैप्टन है, वहीं उसे लगता है कि वह खुद है. लेकिन घर में उसके पिता चाहते हैं कि वह रागी बने, क्योंकि दादा जी भी रागी थे और पिता भी. यह रीत है परंपरा है. गुप्पी अपने पिता के खिलाफ नहीं है वह उनका दिल भी नहीं दुखाना चाहता, लेकिन वह वो बन नहीं पा रहा जो उससे उम्मीद की जा रही है. यही इस कहानी का संघर्ष है अंदर का और बाहर का. पिता का मान भी रखना है उनकी रीत भी निभानी है और खुद की पहचान भी नहीं खोनी है. यही शबद की आत्मा है.
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इस सीरीज़ का हिस्सा बनने का सफर आपके लिए कैसे शुरू हुआ? आपको इस प्रोजेक्ट के लिए किस तरह चुना गया?
मैंने जब पहली बार डायरेक्टर अमित गुप्ता और शो रनर जयंती पांड्या से मुलाकात की तो उन्होंने पूरी कहानी सुनाई. कोई बड़ा ऑडिशन नहीं था बल्कि एक लुक टेस्ट था पगड़ी पहनकर, उस फील में. उन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मैंने भी वादा किया कि मैं खुद को पूरी तरह बदल लूंगा वजन कम करना 17 साल का दिखना, सब किया. मुझे लगा इतनी अच्छी कहानी का हिस्सा बनना ही है.
सेट पर माही राज जैन के साथ काम करते हुए आपको उनके बारे में क्या खास महसूस हुआ?
माही बेहद टैलेंटेड एक्ट्रेस है. इतनी कम उम्र में उसकी आंखों में जो vulnerability और सच्चाई दिखती है, वो कमाल की है. हर कलाकार से कुछ न कुछ सीखने को मिला सुविंदर सर से डिसिप्लिन और स्विच ऑन-ऑफ करना और माही से सादगी और भावनाएं.
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इस प्रोजेक्ट के जरिए आपको अपने बारे में या जिंदगी के बारे में क्या नई सीख मिली?
जी हां, मैं हमेशा से ही स्पिरिचुअल रहा हूं और मेरा मानना है कि जीवन में हमें हर अनुभव से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. इस शो और खासकर इस किरदार से मुझे यह सिखने को मिला कि हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए. जीवन में चाहे जितनी भी रुकावटें आएं, हर समस्या का हल निकाला जा सकता है. अगर आप कुछ ठान लें, तो उसे हासिल करने की राह जरूर निकलती है. लेकिन एक महत्वपूर्ण बात जो मैंने सीखी, वह यह है कि जहां से आप शुरू करते हैं वह बहुत मायने रखता है. अपने जड़ों को कभी न भूलें. आपके माता-पिता ने आपको जो कुछ भी सिखाया है, वह आपके जीवन का असली आधार है.
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आपके लिए प्रेरणा रहे किन कलाकारों और निर्देशकों के साथ आप आगे चलकर स्क्रीन साझा करना चाहते हैं?
मेरा सपना हमेशा से रहा है कि मैं संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) के साथ काम करूं. उनकी फिल्में मुझे बहुत पसंद हैं. एक मुझे मीरा नायर (Meera Nair) के साथ काम करने का सपना है क्योंकि उनकी स्टोरी टेलिंग मुझे बहुत पसंद है. अगर मैं एक्टर्स की बात करूं तो शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) सर से मिलने का सौभाग्य जरूर मिला है, पर अभी तक उनके साथ काम करने का मौका नहीं मिला. मैं चाहता हूं कि एक बार जरूर उनके साथ काम करने का अवसर मिले. इनके अलावा सुविंदर सर (Suvinder Sir) के साथ काम करना चाहता था और अब मैंने उनके साथ काम किया है.
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आप युवा दर्शकों और कलाकारों से क्या संदेश साझा करना चाहेंगे?
जो भी करना है, पूरी शिद्दत से करो. मेहनत इतनी करो कि पूरी कायनात तुम्हारे सपने को पूरा करने में लग जाए. लेकिन अपने माता-पिता की इज्जत करना मत भूलो. जब उनका फोन आए, तुरंत उठाओ क्योंकि उन्हें सिर्फ आपकी आवाज़ सुननी होती है. वो आपसे प्यार करते हैं.
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