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बॉलीवुड की चकाचौंध के बीच अगर हम किसी ऐसे सितारे की बात करें जिसकी जिंदगी की कहानी ही रंगों के त्योहार से शुरू होती है तो वो नाम आमिर खान का है। उनके परिवार में आज भी बड़े चाव से वह किस्सा सुनाया जाता है कि जब आमिर का जन्म हुआ तो अस्पताल के बाहर और सड़कों पर होली का हुड़दंग मचा हुआ था। 14 मार्च 1965 की उस सुबह जैसे ही आमिर ने इस धरती पर अपनी पहली सांस ली उसके कुछ ही देर बाद एक नर्स दौड़ती हुई आई और उसने शगुन के तौर पर नन्हे आमिर के गाल और माथे पर गुलाल का एक छोटा सा टीका लगा दिया। घर वाले मजाक में कहते हैं कि शायद इसीलिए आमिर अपनी हर फिल्म और काम में परफेक्शन का रंग ढूंढते हैं क्योंकि उनकी शुरुआत ही रंगों के साथ हुई थी। (Aamir Khan Holi story)
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लेकिन जो सबसे दिलचस्प बात है वो यह कि जिस कलाकार का जन्म ही होली के माहौल में हुआ वह बचपन में इस त्योहार से काफी घबराता था। आमिर खुद बताते हैं कि बचपन में उन्हें अचानक किसी का उनपर रंग डाल देना या पानी उढेल कर उन्हे भिगो देना बिल्कुल पसंद नहीं था। शैशवअवस्था में जब बांद्रा की गलियों में उनके नन्हे दोस्त शोर मचाते थे तो आमिर चुपचाप अपनी खिड़की से बाहर का नजारा देखते रहते थे। उनके मन में रंगों को लेकर एक हिचकिचाहट थी जो काफी सालों तक बनी रही। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ी और दोस्ती का दायरा फैला आमिर का यह डर कम होता गया। किशोरावस्था तक आते-आते वह भी होली की हुडदंगी टोली का हिस्सा बनने लगे लेकिन उनका तरीका हमेशा से थोड़ा अलग और सलीकेदार रहा।
आमिर खान के बचपन की होली से जुड़ा एक बहुत ही प्यारा किस्सा है जो आज भी उनके बांद्रा वाले घर 'मरीना' के पास के लोग याद करते हैं। असल में आमिर बचपन में जितने शांत दिखते थे उतने थे नहीं। उनके घर के पास एक बड़ा सा अहाता था जहाँ वो अपने चचेरे भाइयों के साथ मिलकर अपनी 'होली सेना' तैयार करते थे।
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आमिर की एक खास आदत थी कि वो होली वाले दिन सुबह बहुत जल्दी उठ जाते थे। उनका काम होता था बाल्टियों में रंग घोलना और गुब्बारों को भरकर एक ऊंचे ढेर की तरह सजाना। उनके बचपन के दोस्त बताते हैं कि आमिर का निशाना इतना सटीक था कि वो दूर से चलते हुए किसी शख्स के पैर के पास गुब्बारा मारते थे जिससे सिर्फ छींटे उड़ें और सामने वाला परेशान न हो। वो बचपन में भी इस बात का ध्यान रखते थे कि किसी की आंख या चेहरे पर चोट न लगे। ये उनकी 'परफेक्शनिस्ट' वाली आदत तब भी उनके खेल में दिखती थी। (Bollywood perfectionist Holi memories)
आज भी जब वो उन दिनों को याद करते हैं तो उनकी आँखों में वही पुरानी चमक आ जाती है।
लेकिन जैसे ही वो फिल्मी दुनिया का हिस्सा बने उनकी होली का अंदाज पूरी तरह बदल गया। अब वो हुड़दंग वाली होली की जगह सादगी से मनाई जाने वाली होली मनाते हैं। अब वे शांति को ज्यादा अहमियत देने लगे।
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खबरों के मुताबिक मिस्टर परफेक्शनिस्ट के घर की होली की सबसे बड़ी खासियत वहां होने वाला फुटबॉल मैच है। सालों से यह परंपरा चली आ रही है कि होली के दिन आमिर अपने करीबियों और परिवार के साथ एक फ्रेंडली मैच खेलते हैं। इसमें कोई तामझाम नहीं होता बस सब सफेद कुर्ते पजामे में रंगों से लथपथ होकर मैदान में उतर जाते हैं। इंटरनेट पर अक्सर उनकी ऐसी तस्वीरें दिखती हैं जहाँ वो हारने-जीतने की फिक्र किए बिना मिट्टी और गुलाल में सने हुए फुटबॉल के पीछे भाग रहे होते हैं। फैंस को उनका यह देसी लगान वाला अंदाज बहुत पसंद आता है क्योंकि यहाँ वो कोई सुपरस्टार नहीं बल्कि एक आम इंसान नजर आते हैं। (Holi celebration Bollywood actors)
उनके बांद्रा वाले घर में होली का मतलब सिर्फ हुड़दंग नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा पारिवारिक मिलन होता था। आमिर के पिता ताहिर हुसैन और चाचा नासिर हुसैन के परिवारों के बीच होली के दिन एक दूसरे के घर आना जाना होता था, घर की स्त्रियाँ सुबह से ही रसोई में जुट जाती थीं और पूरे घर में घी, बेसन, रबड़ी की महक तैरने लगती थी। आमिर को बचपन में बेसन के लड्डू और नमकपारे बहुत पसंद थे। वो अक्सर अपनी जेबों में नमकपारे भरकर छत पर चले जाते थे और खाते-खाते नीचे गलियों में होने वाली मस्ती का मजा लेते थे।
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खाने-पीने के मामले में आमिर वैसे तो बहुत सख्त डाइट फॉलो करते हैं लेकिन होली के दिन उनकी यह बंदिशें टूट जाती हैं। उनकी मां के हाथ की बनी 'पूरन पोली' और 'गुझिया' 'फिरनी' उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है। आमिर मजाक मस्ती में कहते हैं कि साल भर मैं भले ही उबली हुई सब्जियां खा लूं लेकिन होली पर गुझिया की प्लेट देख कर मेरा कंट्रोल जवाब दे जाता है। उनके घर आने वाले मेहमानों के लिए भी खास तौर पर पारंपरिक पकवानों का इंतजाम होता है। ठंडाई और मिठाइयों के बीच जो गपशप होती है वही उनके लिए असली त्योहार है। (Aamir Khan childhood stories Bollywood)
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एक और दिलचस्प बात ये है कि आमिर को गीले रंगों से ज्यादा सूखे गुलाल से लगाव था और वो अक्सर हल्के गुलाबी या पीले रंग का चुनाव करते हैं।उनके परिवार में एक रिवाज था कि सबसे पहले घर के बुजुर्ग बच्चों के माथे पर तिलक लगाते थे और फिर ही बाकी की होली शुरू होती थी। आमिर आज भी इस परंपरा को मानते हैं। भले ही वो अब बहुत बड़े स्टार हैं लेकिन आज भी उनके घर पर होली के दिन पुराने गानों का टेप चलता है और सादगी भरा माहौल रहता है।
सिनेमा के पर्दे पर भी आमिर का सफर 'होली' नाम की फिल्म से ही शुरू हुआ था जिसे केतन मेहता ने बनाया था। हालांकि यह एक संजीदा फिल्म थी लेकिन इसके जरिए आमिर ने अभिनय की दुनिया में अपना पहला कदम रखा। इसके बाद 'मंगल पांडे' जैसी फिल्मों में उन्होंने होली के गानों के जरिए इस त्योहार की एनर्जी को पर्दे पर उतारा। रानी मुखर्जी के साथ फिल्माया गया वो गाना 'होली रे' आज भी होली की प्लेलिस्ट का हिस्सा होता है। (Aamir Khan personal life stories)
होली के दिनों में अगर शूटिंग पड़ जाए तो शूटिंग के दौरान भी आमिर अक्सर सेट पर माहौल को हल्का फुल्का रखने के लिए होली खेल लिया करते हैं।
आमिर खान के बारे में एक बात मशहूर है कि वो सेट पर बहुत गंभीर रहते हैं लेकिन होली के मामले में उनका एक अलग ही रूप देखने को मिलता है। उनकी फिल्म 'लगान' की शूटिंग के दौरान का किस्सा तो आज भी पूरी यूनिट याद करती है। गुजरात के भुज में जब फिल्म की शूटिंग चल रही थी तो वहां तपती धूप और धूल के बीच पूरी टीम महीनों से काम कर रही थी। उसी दौरान होली का त्योहार आया। आमिर ने फैसला किया कि वो अपनी पूरी टीम और वहां मौजूद विदेशी कलाकारों के साथ जमकर होली खेलेंगे।
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उस दिन आमिर ने परफेक्शनिस्ट का चोला उतारकर एक आम लड़के की तरह सबको रंगों से सराबोर कर दिया था। विदेशी एक्टर्स जो क्रिकेट मैच के सीन के लिए वहां थे उनके लिए यह एकदम अनोखा अनुभव था। आमिर खुद बाल्टी भर-भर कर रंग ला रहे थे और सबको भिगो रहे थे। कहते हैं कि उस दिन भुज के उस गांव में इतनी मस्ती हुई थी कि शाम तक पहचानना मुश्किल था कि कौन गोरा है और कौन काला। आमिर का मानना था कि ऐसी मस्ती से टीम की थकान मिट जाती है और आपस में जुड़ाव बढ़ता है। (Bollywood actors childhood festival memories)
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एक और सच्चा और यादगार वाकया फिल्म 'मंगल पांडे' के सेट का है। इस फिल्म में 'देखो आई होली' गाने की शूटिंग के दौरान असली होली जैसा माहौल बन गया था। आमिर और रानी मुखर्जी को कई दिनों तक रंगों के बीच रहना पड़ा था। आमिर बताते हैं कि गाने की शूटिंग खत्म होने के बाद भी वो और रानी एक-दूसरे पर गुलाल फेंक रहे थे। उस वक्त सेट पर मौजूद क्रू मेंबर्स कहते हैं कि आमिर इतने उत्साह में थे कि उन्होंने कैमरा और लाइट्स को बचाने के लिए खुद उन पर प्लास्टिक ढका ताकि मस्ती में किसी मशीन को नुकसान न पहुंचे।
इतना ही नहीं आमिर के पुराने ऑफिस के लोग बताते हैं कि वो अपने स्टाफ के साथ भी होली खेलना नहीं भूलते। एक बार तो उन्होंने अपने ऑफिस के लड़कों के साथ मिलकर एक ऐसी टीम बनाई थी जो बाहर से आने वाले हर मेहमान को गुलाल का टीका लगाए बिना अंदर नहीं जाने देती थी।
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आजकल आमिर खान पर्यावरण और सुरक्षा को लेकर काफी जागरूक रहते हैं। वे हमेशा अपने चाहने वालों से अपील करते हैं कि होली खेलते वक्त पानी की बर्बादी न करें और सिर्फ ऑर्गेनिक रंगों का ही इस्तेमाल करें। उनका मानना है कि त्योहार का असली मतलब किसी को झल्लाने पर मजबूर करना नहीं बल्कि सबको साथ लेकर चलना है। अगर कोई रंग लगवाने से मना करता है तो आमिर उसकी पसंद का पूरा सम्मान करते हैं। उनके लिए रंगों से ज्यादा जरूरी लोगों का सम्मान और आपसी प्यार है। (Aamir Khan early life anecdotes)
यही वजह है कि आमिर की होली की चर्चा बॉलीवुड की बड़ी पार्टियों से अलग हटकर उनके किस्सों और सादगी की वजह से होती है। जन्म के समय लगे उस पहले गुलाल के टीके से लेकर आज तक आमिर ने इस त्योहार को अपने तरीके से जिया है। उनकी होली रंग भरे एहसासों वाली होती है जहाँ संगीत होता है, परिवार का साथ होता है और ढेर सारी पुरानी यादें होती हैं।
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