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हर फिल्म में कुछ नया करने की कोशिश करते हैं Thamma एक्टर Ayushmann Khurrana

‘विक्की डोनर’ जैसी हटकर फिल्म से डेब्यू करने वाले आयुष्मान खुराना ने कंटेंट-ड्रिवन और सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों के जरिए बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई।

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Ayushmann Khurrana
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‘विक्की डोनर’ (Vicky Donor) जैसी हटकर फिल्म से करियर की शुरुआत करने वाले आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) ने अपने अलग और साहसिक सिनेमा से बॉलीवुड में खास पहचान बनाई है.  उन्होंने हमेशा कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों और सामाजिक मुद्दों से जुड़े किरदारों को चुना. हाल ही में दिए एक  इंटरव्यू में आयुष्मान ने अपने करियर, बदलते सिनेमा और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की. आइये जानते हैं उन्होंने क्या कहा..... 

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Vicky Donor (2012) - News - IMDb

Vicky Donor (2012)

आपने कमर्शियल से लेकर कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों तक सब किया है, लेकिन दिल के सबसे करीब किस तरह का सिनेमा है?
मेरे लिए कमर्शियल और एक्सपेरिमेंटल सिनेमा के बीच की रेखा कभी दीवार नहीं रही.  मैं यह मानता हूं कि दोनों तरह की फिल्में साथ चल सकती हैं.  बस कहानी ईमानदार होनी चाहिए और उसमें नयापन होना चाहिए.  अपने करियर के इस पड़ाव पर मुझे फ्लॉप फिल्मों से ज्यादा डर सुरक्षित और उबाऊ सिनेमा से लगता है.  मैंने हमेशा कोशिश की है कि हर काम में कुछ नया और लगातार एक्सपेरिमेंट करता रहूं.  आगे मैं बड़े बजट की फिल्में जरूर करूंगा लेकिन मेरी मूल पहचान वही है, जिससे मैंने शुरुआत की थी. कुछ अलग, कुछ हटकर फिल्में करना ही मेरा मकसद है.  

Ayushmann Khurrana - IMDb

फ्रैंचाइजी फिल्मों में आपकी लगातार मौजूदगी देखने को मिली है, ऐसे में आप किसी फ्रैंचाइजी को हां कहने से पहले किन बातों को महत्व देते हैं?
मैंने कोई प्लान या रणनिति  बनाकर फ्रैंचाइजी फिल्मों पर काम नहीं किया.  चाहे 

बधाई हो’ (Badhaai Ho), ‘ड्रीम गर्ल’ (Dream Girl) और ‘शुभ मंगल ज़्यादा सावधान’ (Shubh Mangal Zyada Saavdhan)....’, ये किसी मास्टर प्लान का हिस्सा नहीं थीं.  मेरे लिए हमेशा स्क्रिप्ट ही सबसे अहम रही है. स्क्रिप्ट पसंद आने के बाद ही मैं इन फिल्मों से जुड़ा हूं. 

Badhaai Ho (2018) - IMDb

Dream Girl 2 - Wikipedia

Shubh Mangal Zyada Saavdhan (2020) - IMDb

अब तक के सफर और आगे की योजनाओं को देखते हुए, क्या आपको लगता है कि आपका करियर सही दिशा में जा रहा है?
साल 2026 में मैं कई तरह के किरदारों में नजर आऊंगा. मेरी हर फिल्म की तैयारी अलग रही है.  कहीं ज्यादा शारीरिक तैयारी करनी पड़ी, तो कहीं भावनात्मक गहराई में जाना पड़ा.  लेकिन अच्छी टीम के साथ काम करने से सब कुछ आसान लगा. अपनी पिछली फिल्मों की सफलता के बाद मैं इस दौर को संतोषजनक मानता हूं. 

आपके मुताबिक आज का भारतीय सिनेमा किस तरह का दौर देख रहा है?

आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो लगता है कि हम एक बहुत दिलचस्प दौर में हैं.  पिछले कुछ वर्षों में हमने कई बेहतरीन फिल्में देखी हैं.  चाहे ‘लापता लेडीज’ हो, ‘होमबाउंड’ हो या दूसरी फिल्में.  इन फिल्मों ने नए कलाकारों को आगे आने का मौका दिया है.  आज इंडस्ट्री में कई नए चेहरे जुड़ रहे हैं.  मुझे उत्सुकता है कि आने वाले समय में वे क्या-क्या काम करेंगे? यह देखकर भी अच्छा लगता है कि भारतीय सिनेमा अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहा है.  हमारा कंटेंट इंटरनेशनल प्लेटफार्म  तक पहुंच रहा है. यह भारतीय सिनेमा का सुनहरा दौर है. ’

Lost Ladies (2023) - IMDb

Homebound (2025) - IMDb

आपके हिसाब से किसी फिल्म की कामयाबी किस चीज़ से तय होती है?
  कोविड के बाद थिएटर का पूरा सिस्टम बदल चुका है.  ऐसे समय में इन फिल्मों का चलना मेरे लिए बहुत मायने रखता है. आज ऑडियंस को सबसे ज्यादा खींचने वाली चीज जिज्ञासा है.  हमने यह भी देखा है कि बिना बड़े सुपरस्टार वाली फिल्में भी चली हैं.  अच्छी कहानी अपने आप ही ऑडियंस खींचती है.  

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ऑडियंस को सरप्राइज़ करने के लिए आप किस तरह की नई चीज़ें दिखाना चाहते हैं?

मैं कोविड के बाद लगातार 100 करोड़ क्लब में पहुंची फिल्मों को सिर्फ आंकड़ों के तौर पर नहीं देखता. बॉक्स ऑफिस की कामयाबी इसलिए अहम है क्योंकि यह दर्शकों के भरोसे और उनके प्यार को दर्शाती है. मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है कि हर फिल्म के ज़रिए ऑडियंस को कुछ नया, अलग और पहले से बेहतर देखने को मिले. 

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