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मायापुरी magazine के editor स्वर्गीय श्री पी. के. बजाज (प्रमोद कुमार बजाज) जी के निधन का समाचार सुनकर Bright outdoor Media Limited के संस्थापक and CMD, डॉक्टर योगेश लखानी एकदम स्तब्ध रह गए। उनकी दोस्ती बजाज परिवार के साथ पिछले चालीस पचास वर्षों से रही है। डॉक्टर योगेश लखानी को जिस तरह से मायापुरी परिवार ने फर्श से अर्श तक की सफलता पाते देखा है उसी तरह से डॉक्टर योगेश लखानी ने भी मायापुरी की आसमान छूती बुलंदी को स्टेप बाय स्टेप चढ़ते देखा है। आज जब डॉक्टर योगेश लखानी जी से हमारे मायापुरी के दिवंगत सम्पादक पूजनीय पी. के. बजाज सर के बारे में बात हो रही थी तो योगेश जी अपने को सम्भाल नहीं पाए। उनका गला रुँध गया। उनकी आंखे छलक आई, वे बोले, "मेरी दोस्ती पी. के. बजाज जी के साथ उस वक़्त से है जब मैं एक संघर्षरत युवक था और छोटे से टेबल स्पेस में सड़क किनारे छोटे छोटे पोस्टर्स लगाता था। कई बार कुछ छोटी मोटी फ़िल्मों के पोस्टर्स बनाने का काम भी मिल जाता था, ऐसे ही एक पोस्टर के सिलसिले में मेरी मुलाकात मायापुरी के सम्पादक पी. के. बजाज जी से हो गई थी । वे इतने अच्छे इंसान थे कि उन्होंने रुक कर मेरा काम देखा, मुझसे मेरे जीवन के संघर्ष को लेकर बातें की।
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मायापुरी उन दिनों धीरे धीरे अपनी बुलंदियों की ओर अग्रसर हो रहा था।
उस समय हमारे बीच जो दोस्ती हुई वो जीवन भर के लिए निभाने वाली हो गई। जब धीरे धीरे मेरी कंपनी ब्राइट आउटडोर मीडिया लिमिटेड की कामयाबी आसमान छूने लगी तो पी. के. बजाज जी मेरी सफलता के साक्षी बन गए। जब भी मैं दिल्ली जाता, उन्हें अपने दिल्ली आने की खबर देता। वे जितने काबिल सम्पादक थे उतने ही दिलदार मेजबान भी थे। चाहे वे कितना भी व्यस्त होते लेकिन वे मेरी स्वागत में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते थे। उनकी ही तरह उनके सुपुत्र श्री अमन कुमार बजाज का स्वभाव है। वे भी अपने पापा की तरह बेहद अच्छे स्वभाव और बड़े दिल के मालिक हैं। जब मैं दिल्ली जाता तो पी के बजाज जी और अमन कुमार बजाज जी मेरी खूब खातिरदारी करते रहे है। जब पी के बजाज जी और अमन जी मुंबई आते तो वे भी मुझसे मिले बिना नहीं जाते थे।
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मायापुरी में मेरे कंपनी ब्राइट आउटडोर लिमिटेड के विज्ञापन और मेरे इवेंट्स की तस्वीरें, सालों से प्रकाशित हो रही है। मेरे बर्थ डे पर, मेरी वाइफ जागृति के बर्थ डे पर, मेरे बेटे अनुग्रह के बर्थडे पर पी के बजाज जी बधाई देना कभी नहीं भूलते और हर बार इसके बारे में विस्तृत लेख मायापुरी में छापते रहे हैं। उन्होंने हमेशा आपसे भी मेरा इंटरव्यू करवाया। मेरे बेटे को तो लोटपोट पढ़े बिना चैन ही नहीं आता और वो टीवी पर तथा डिजिटली प्रस्तुत लोटपोट, मोटू पतलू सीरीज को तब से देखता आ रहा है जब से वो इन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हुआ।
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जब जब मैंने फिल्म सितारों से भरी स्टार नाइट्स इवेंट आयोजित की तो पी. के. बजाज जी और अमन कुमार बजाज जी ने कई बार खास गेस्ट बनकर मेरे इवेंट में शिरकत की। मेरे अनुरोध पर वे स्टेज पर भी पधारे, और मैंने स्टेज पर उनका सम्मान अर्पण किया।
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इतने सालों में मेरी उनसे हज़ारों बार मुलाकात हुई। पी. के. बजाज जी बहुत नम्र स्वभाव के व्यक्ती रहे हैं। उन्हें इस बात की बहुत खुशी थी कि मैं अक्सर गरीब बच्चों, बुजुर्गों और लावारिसों की सेवा करता हूं। बजाज जी ने भी बताया कि जो सचमुच जरूरत मंद हैं, वे उन्हें दान जरूर देते हैं। मायापुरी और लोटपोट की सफलता की यात्रा का मैं साक्षी रहा हूँ। जब मैं किशोर था, तब से मायापुरी और लोटपोट पढ़ता रहा। उस वक़्त मायापुरी और लोटपोट सिर्फ पत्रिका के रूप में उपलब्ध थी और उसकी रीडर शिप साढ़े तीन सौ लाख से अधिक थी। वक़्त के साथ आज जब मायापुरी और लोटपोट डिजिटल रूप में भी उपलब्ध है, और आज जब मायापुरी तथा लोटपोट के हिन्दी इंग्लिश वेबसाइट इतनी पॉपुलर हो रही है और मायापुरी कट के वीडियोज के जलवे धूम मचा रही है तो अचानक बजाज जी का इस तरह चले जाना एंटरटेनमेंट वर्ल्ड के लिए एक भारी क्षति है। और हम सबके लिए, उनके परिवार और करीबियों के लिए तो उनका चले जाना एक ऐसा दर्द है जो कभी कम नहीं हो सकता। लेकिन विधि का विधान कोई बदल नहीं सकता। पी. के. बजाज जी जैसे पवित्र आत्मा बहुत कम जन्म लेते हैं और इसी तरह सबको रास्ता दिखा कर, और सबको रोता बिलखता छोड़, अनंत यात्रा में चले जातें हैं। शायद ईश्वर को भी उनकी जरूरत थी।
मेरी इश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और हम सबको ये दुख सहने की हिम्मत दें।
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FAQ
1. पी.के. बजाज कौन थे?
पी.के. बजाज, जिनका पूरा नाम प्रमोद कुमार बजाज था, प्रसिद्ध फिल्म पत्रिका मायापुरी और लोटपोट के संपादक और एस.एल. पब्लिकेशन्स ग्रुप के प्रमुख थे।
2. डॉ. योगेश लखानी कौन हैं?
डॉ. योगेश लखानी Bright Outdoor Media Limited के संस्थापक और CMD हैं, जो आउटडोर विज्ञापन उद्योग में एक प्रसिद्ध नाम हैं।
3. डॉ. योगेश लखानी और पी.के. बजाज की दोस्ती कब से थी?
डॉ. योगेश लखानी की दोस्ती बजाज परिवार के साथ लगभग 40–50 वर्षों से थी।
4. डॉ. योगेश लखानी ने पी.के. बजाज के बारे में क्या कहा?
उन्होंने बताया कि जब वे संघर्ष के दौर में थे और सड़क किनारे पोस्टर लगाने का काम करते थे, तब पी.के. बजाज ने उनसे मुलाकात कर उनका काम देखा और उनके संघर्ष के बारे में दिलचस्पी से बातचीत की।
5. पी.के. बजाज के निधन पर डॉ. योगेश लखानी की क्या प्रतिक्रिया थी?
उनके निधन की खबर सुनकर डॉ. योगेश लखानी भावुक हो गए, उनका गला भर आया और उनकी आंखें नम हो गईं।
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महान स्वर्गीय Shri P K Bajaj Sir jee हमारे दिलों में सदा ज़िंदा रहेंगे !
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