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Film Review: ‘‘अस्सीः हार्ड हिटिंग, मार्मिक, प्रासंगिक और कई ज्वलंत सवाल..’’

अस्सी, लेखक और निर्देशक अनुभव सिन्हा की बेहद मार्मिक फिल्म, 20 फरवरी को रिलीज हो रही है; तापसी पन्नू, नसीरुद्दीन शाह और अन्य कलाकारों के अभिनय में यह फिल्म रेप पीड़ितों की लड़ाई और नारी सुरक्षा की गंभीर सच्चाई पेश करती है।

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फिल्म रिव्यूः ‘‘अस्सी.jpg

निर्माताः टी-सीरीज़ और अनुभव सिन्हा  
लेखनः अनुभव सिन्हा व गौरव सोलंकी  
निर्देशनः अनुभव सिन्हा  
कलाकारः तापसी पन्नू, कानी कुसुरुति, रेवती, मनोज पाहवा, कुमुद मिश्रा, मोहम्मद जीशान अय्यूब, नसीरुद्दीन शाह, सुप्रिया पाठक, सीमा पाहवा, मास्टर अद्विक जायसवाल, विपुल गुप्ता, साहिल सेठी, अभिषेक कौशल, तेजेंदर सिंह, अभिशांत राणा व अन्य  
अवधिः दो घंटे तेरह मिनट  
रिलीज़ः 20 फरवरी को सिनेमाघरों में  

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Assi (2026) - IMDb

यह कितनी अजीब बात है कि हम उस देश के वासी हैं, जहां हर बीस मिनट पर एक यानी कि एक दिन में अस्सी लड़कियों/महिलाओं का बलात्कार होता है। यह कुकर्म हर उम्र, हर जाति, धर्म व क्लास की बच्चियों व महिलाओं के साथ हो रहा है। कुछ रेप केस पुलिस स्टेशनों की फाइल में दब कर रह जाते हैं। तो कुछ केस ऐसे होते हैं, जहां पीड़िता को सामाजिक दबाव के चलते समझौते के तहत उसी इंसान से विवाह तक रचाना पड़ता है, जिसने उसके साथ रेप किया था। तो वहीं कुछ महिलाएं अदालती लड़ाई में उलझी रह जाती हैं। अदालत के अंदर वकीलों के वाहियात सवालों के जवाब देते-देते वह खुद शर्मसार होने लगती हैं।  

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ऐसे ही अत्यंत जरूरी व मार्मिक विषय पर लेखक व निर्देशक अनुभव सिन्हा फिल्म ‘‘अस्सी’’ लेकर आए हैं, जो 20 फरवरी को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म की टैगलाइन है—‘हर दिन अस्सी।’ फिल्म के अंदर एक दृश्य में रेप पीड़िता की अदालत में केस लड़ रही वकील रावी, जज से कहती है—  
‘‘मैम, इस अपराध वाले दिन देश भर में अस्सी रेप कंप्लेंट हुई थीं, जिनमें से 76 का ट्रायल तक शुरू नहीं हुआ।’’  
यह संवाद अपराध व नारी असुरक्षा की भयावहता के साथ ही सिस्टम पर बहुत बड़ी चोट करता है। फिल्मकार ने पुरुष प्रधान मानसिकता व सोच, बेटे को बचाने की कवायद, बलात्कार पीड़िता के दर्द, आघात और पीड़ा को दर्शाने में कहीं कोई कसर बाकी नहीं रखी है।  

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कहानीः

फिल्म की शुरुआत रेलवे ट्रैक के बीच पड़ी व पानी मांग रही अर्धनग्न, क्षत-विक्षत महिला की मौजूदगी से होती है, जिस पर एक इंसान की नजर पड़ती है और वह उसे अस्पताल पहुंचाता है। फिर पता चलता है कि वह मूलतः मलयाली है तथा पेशे से शिक्षिका परिमा (कानी कुसुरुति) है। परिमा के खुशहाल परिवार में एक प्यारा दस वर्षीय बेटा ध्रुव (अद्विक जायसवाल) और एक प्यार करने वाला पति विनय (मोहम्मद जीशान अय्यूब) शामिल हैं। सुबह बेटा ध्रुव, परिमा व विनय एक साथ ही घर से निकलते हैं, उस वक्त उन्हें इस बात की सपने में भी भनक नहीं थी कि उस मनहूस रात को अकेले घर लौटने का परिमा का फैसला उसके और उसके परिवार के लिए घर के अंदर और बाहर इतना बड़ा सदमा लेकर आएगा।  

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स्कूल से निकलने के बाद एक रात दोस्त की सेंड-ऑफ पार्टी से लौटते वक्त रात में मेट्रो स्टेशन के बाहर पांच लड़के उसे जबरन गाड़ी में डाल लेते हैं और चलती कार में बारी-बारी से उसका बलात्कार कर अधमरी हालत में पटरियों पर फेंक देते हैं। यह परिमा होती है, जिसे एक अजनबी अस्पताल पहुंचाता है। पुलिस शुरुआती जांच में चार आरोपियों को पकड़ती है और विनय के दोस्त कार्तिक (कुमुद मिश्रा) के जरिए मामला वकील रावी (तापसी पन्नू) तक पहुंचता है। (Naseeruddin Shah courtroom drama) 

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उधर आरोपी युवक का पिता दीपराज (मनोज पाहवा) अपने बेटे को बचाने के लिए सबूतों को मैनेज करवा देता है। वहीं कार्तिक खुद अपनी पत्नी की हादसे में हुई मौत के ट्रॉमा से गुजर रहा होता है। जब वह देखता है कि परिमा को इंसाफ मिलने के बजाय उसका मखौल बनाया जा रहा है, तो वह छतरी मैन बनकर कानून अपने हाथ में ले लेता है और अपराधियों का खात्मा करने निकल पड़ता है। सोशल मीडिया पर छत्री गैंग ट्रेंड करने लगता है। रावी को लगता है कि इस तरह सही न्याय नहीं हो सकता है। साथ ही उसे लगता है कि कुछ लोग ‘बलात्कार’ जैसे अति गंभीर अपराध की तरफ से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। तो अब एक तरफ अदालती लड़ाई है तो दूसरी तरफ छत्री गैंग की अपनी हरकतें... आखिर परिमा को किस राह से न्याय मिलेगा... यह जानने के लिए तो फिल्म देखनी ही पड़ेगी।  

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रिव्यूः

‘मुल्क’, ‘आर्टिकल 15’, ‘थप्पड़’, ‘अनेक’, ‘भीड़’ जैसी फिल्मों के माध्यम से हार्ड-हिटिंग सामाजिक विषयों पर पिछले आठ साल से लगातार काम करते आ रहे फिल्मकार अनुभव सिन्हा की यह नवीनतम फिल्म ‘अस्सी’ महज बलात्कार पीड़िता को न्याय दिलाने तक सीमित कोर्टरूम ड्रामा फिल्म की बनिस्बत सोशल मीडिया, शिक्षा व्यवस्था, पुरुष मानसिकता, पितृसत्तात्मक सोच के साथ ही सामाजिक चेतना की कलई खोलती है। यह फिल्म उन तत्वों पर भी बात करती है जो जाने-अनजाने बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों से ध्यान भटकाने का काम करते हैं। फिल्म समाज में पनप रही असंवेदनशीलता व संवेदनहीनता की भी बात करती है।  

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समाज में पनप रही संवेदनहीनता और नैतिक पतन का अहसास इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्कूल में जिस छात्र को छह साल से शिक्षिका पढ़ा रही थी, वही छात्र उस शिक्षिका के साथ सामूहिक बलात्कार होने पर व्हाट्सऐप ग्रुप में लिखता है—‘मुझे इनवाइट क्यों नहीं किया गया?’ यहां सवाल यह उठता है कि हम आज बच्चों को किस तरह की शिक्षा व परवरिश दे रहे हैं? फिल्मकार अनुभव सिन्हा बहुत गंभीरता के साथ इस बात को चित्रित करने में सफल रहे हैं। फिल्म देखते हुए दर्शक अंदर ही अंदर बेचैन होता रहता है। अनुभव सिन्हा ने फिल्म में कई ज्वलंत सवाल उठाए हैं, जिन पर हम सोचते ही नहीं हैं।  

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फिल्म के दौरान भी हर बीस मिनट पर परदे पर एक स्लेट उभरती है, जो यह याद दिलाती है कि जब हम दो घंटे की फिल्म देख रहे होते हैं, तब तक देश में दस नए मामले दर्ज हो चुके होते हैं। यह उपकरण झटका देता है और आंकड़ों को संवेदना में बदल देता है। परिमा का मासूम बेटा ध्रुव अपने पिता विनय से सवाल करता है कि ‘उन्होंने मां के साथ ऐसा क्यों किया?’ तब विनय ही नहीं दर्शक के पास भी कोई जवाब नहीं होता है। विनय अपने बेटे ध्रुव को हर दिन अदालत में लेकर आते हैं। इस पर वह कहते हैं—‘ये तो घर तक आने वाला है।’ (Taapsee Pannu powerful role)

Assi Movie 2026 Release Date And Cast Line-Up: Taapsee Pannu Headlines A  Powerful Courtroom Drama

फिल्म में कुछ कमियां भी हैं। कुमुद मिश्रा के किरदार कार्तिक को ठीक से लिखा ही नहीं गया। इस किरदार को लेकर लेखक व निर्देशक दोनों ही कन्फ्यूज्ड नजर आते हैं। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह का किरदार वासु की जरूरत समझ से परे है। यह किरदार कहानी में कहीं भी फिट नहीं बैठता। कुमुद मिश्रा और नसीरुद्दीन शाह ने यह फिल्म क्या महज पैसे के लिए की? सच तो यही जाने...  

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एक्टिंगः

तापसी पन्नू एक बेहतरीन अदाकारा हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है। इस फिल्म में वकील रावी के किरदार में उन्होंने अपने अभिनय से जान डाल दी है। मुद्दे वाली फिल्मों की झंडाबरदार कहलाने वाली तापसी अपने दमदार अभिनय से फिल्म की धड़कन बनकर उभरती हैं। पीड़ा, आक्रोश और बेचारगी जैसे तमाम इमोशंस को वह जीते हुए नजर आती हैं।  

Assi Movie Review: Kani Kusruti carries the film, Taapsee Pannu falters in  Anubhav Sinha's social drama

रेप पीड़िता परिमा के दर्द व सदमे को जिस सहजता से परदे पर अभिनेत्री कानी कुसुरुति ने उभारा है, वह किसी को भी झकझोर देता है। पीड़िता के पति व सामाजिक दबाव झेल रहे विनय के किरदार में मोहम्मद जीशान अय्यूब का अभिनय काफी सधा हुआ है। दस साल के बेटे ध्रुव के किरदार में बाल कलाकार अद्विक जायसवाल की मासूमियत दिल तक पहुंचती है।   (Assi 2026 Hindi film release)

Assi Movie Review: A Searing Analyses of The Rape Culture | Filmfare.com

पितृसत्तात्मक सोच व बेटे के प्रति मोह को मनोज पाहवा ने बाखूबी परदे पर साकार किया है। सीमा पाहवा एक ही सीन में हैं, मगर यह सीन सोचने पर मजबूर करने वाला है। कुमुद मिश्रा, नसीरुद्दीन शाह, सुप्रिया पाठक की प्रतिभा को जाया किया गया है। जज की भूमिका में रेवती का अभिनय शानदार है।  

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