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निर्माता: उमेश बंसल, रंजन सिंह, अक्षय ठक्कर व कबीर आहुजा लेखक: अनुराग कश्यप निर्देशक: अनुराग कश्यप कलाकार: राहुल भट्ट, सनी लियोनी, आमिर दलवी, मोहित टकलकर, अभिलाष थपलियाल, श्रीकांत यादव, संदीप रावल, शिवम कोठारी व अन्य अवधि: दो घंटे 29 मिनट ओटीटी प्लेटफॉर्म: जी5 पर 20 फरवरी से (Kennedy 2026 Hindi film OTT release)
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2023 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में धूम मचा चुकी अनुराग कश्यप की सिस्टम के खोखलेपन को चित्रित करती फिल्म ‘‘कैनेडी’’ को तीन साल बाद भी सिनेमाघर नहीं मिले। अंततः यह फिल्म 20 फरवरी से ‘जी5’ पर स्ट्रीम हो रही है। यह फिल्म उनकी पिछली फिल्मों की स्टाइल वाली फिल्म है, जिसमें सभी किरदार अंदर से पूरी तरह टूटे हुए हैं। पिछली फिल्मों की ही तरह यह फिल्म भी काफी डार्क है, मगर रोमांच गायब है। लेकिन इस बार लेखन काफी खराब होने के साथ ही फिल्म की लंबाई बेवजह ज्यादा है। इसे एडिटिंग टेबल पर कसा जाना चाहिए था।
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स्टोरी: कोरोना काल यानी कि लॉकडाउन की पृष्ठभूमि में वाली इस फिल्म की कहानी के केंद्र में पूर्व पुलिस अधिकारी उदय शेट्टी (राहुल भट्ट) है, जो दुनिया के लिए मर चुका है। जबकि वह प्रीमियम टैक्सी ड्राइवर कैनेडी बनकर पुलिस कमिश्नर रशीद खान (मोहित टकलकर) के लिए हिटमैन का काम करता है। रशीद खान दो सौ करोड़ रुपये की घूस देकर पुलिस कमिश्नर बने हैं। अब वह इन दो साल के अंदर अपने नीचे के अफसरों, खासकर उदय शेट्टी व काले के माध्यम से उससे ज्यादा धन की उगाही करना चाहते हैं। इसके लिए वह हत्याएं भी करवा रहे हैं। उदय शेट्टी, रशीद खान के इशारे पर अंधेरी रातों में एक के बाद एक लोगों को मौत के घाट उतारता रहता है। यहां तक कि एक कार से एक होटल के पास बम विस्फोट भी करता है। उदय शेट्टी को गैंगस्टर सलीम की तलाश है और सलीम को उदय शेट्टी की तलाश है। रशीद खान एक तरफ उदय शेट्टी को अंधेरे में रखकर अपना काम करवा रहा है, तो दूसरी तरफ वह सलीम को भी अंधेरे में रखकर लगातार उसके संपर्क में रहता है। (Anurag Kashyap dark drama film)
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वास्तव में उदय शेट्टी उर्फ कैनेडी का अपना एक दर्दनाक अतीत भी है, जिसके कारण उसकी जिंदगी का एक ही मकसद है - गैंगस्टर सलीम (आमिर दलवी) से बदला। लेकिन इसी बीच उसकी जिंदगी में चार्ली (सनी लियोनी) की एंट्री होती है। सवाल यह कि आखिर कौन अपने मकसद में कामयाब होता है?
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रिव्यू: लगभग ढाई घंटे की फिल्म ‘‘कैनेडी’’ देखकर समझ में आया कि इस फिल्म को सिनेमाघर में रिलीज क्यों नहीं मिल पाई। यह फिल्म पुलिस के गिरते स्तर और कोरोना काल में मुंबई पुलिस किस कदर गिरी हुई हरकतें कर रही थी, उसका चित्रण जरूर किया गया है। इस फिल्म में कहानी या दृश्यों के फिल्मांकन के स्तर पर कुछ भी नयापन नहीं है। किसी भी किरदार को ठीक से लिखा ही नहीं गया। अगर हम उदय शेट्टी उर्फ कैनेडी को नजरअंदाज कर दें तो किसी भी किरदार के हिस्से करने को कुछ आया ही नहीं। और इसकी एकमात्र वजह यह है कि किसी भी किरदार के लेखन पर मेहनत नहीं की गई। कोरोना काल कहें या लॉकडाउन कहें, उस दौरान थाली बजाने या मास्क लगाने से लेकर जो भी कार्यक्रम सरकार या प्रधानमंत्री के इशारे पर कराए गए, उस पर अनुराग कश्यप ने तंज जरूर कसा है। यूं तो फिल्म की शुरुआत थोड़ी सी दिलचस्प तरीके से होती है, जब उदय अपना परिचय देते हुए कहता है कि उसने रशीद खान के कहने पर हत्या की, कितनी यह उसे याद नहीं। फिर रूसी संगीतकार चाइकोव्स्की की धुन पर बिजली सी फुर्ती और सपाट चेहरे के साथ अपना पहला शिकार करता है। उसके बाद आमिर अजीज और बॉयब्लैंक का बेहतरीन गीत फिल्म के मूड और माहौल को सेट करता है, लेकिन उसके आगे पटकथा कैसे लिखी जाए, यह लेखक भूल गए। फिल्म इतनी धीमी गति से आगे बढ़ती है कि दर्शक एक ही बात सोचने लगता है कि ‘कहां फंसाया नाथ!’। (Kennedy film streaming on ZEE5)
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एक्टिंग: यह फिल्म पूरी तरह से राहुल भट्ट ही अपने कंधे पर लेकर चलते हैं। उदय शेट्टी उर्फ कैनेडी के किरदार में जो लेयर हैं, उन्हें राहुल भट्ट ने अपने अभिनय से जीवंतता प्रदान की है। एक टूटे हुए जख्मी इंसान के दर्द और एक निर्मम हत्यारे के खौफ दोनों ही भावों को वे अपनी आंखों से प्रभावी ढंग से बयां करते हैं। रशीद खान के किरदार में मोहित टकलकर के हिस्से सिर्फ अपने गुर्गों को ‘पैसे जुटाओ, धमकाओ, नहीं तो टपकाओ’ का आदेश देने का काम आया है। चार्ली के किरदार में सनी लियोनी की प्रतिभा को पूरी तरह से जाया किया गया है। सलीम के छोटे व गैर-जरूरी किरदार को आमिर दलवी ने क्यों निभाया, यह तो वही जाने। (Kennedy film length and editing critique)
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Rahul Bhatt | Sunny Leone | ZEE5 OTT release | Mohit Takalkar | Sandeep Rawal not present in content
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