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फिटनेस ट्रेनर शिवोहम ने रणबीर कपूर के बारे में कई दिलचस्प बातें कही कि रणबीर हमेशा “बीस्ट -जैसा दिखना नहीं चाहते। उनकी फिटनेस फिल्म के हिसाब से होती है, साथ ही उन्होंने रणबीर की अनुशासन और समय की पाबंदी की भी तारीफ की है।
रणबीर कपूर जब भी किसी फिल्म के लिए अपनी बॉडी का शेप बदलते हैं, तो लोग हैरान रह जाते हैं। उनके चाहने वालों में कई लोग चाहते हैं कि वो “सदा ही बीस्ट जैसा कद काठी वाला” हट्टा कट्टा तगड़ा शरीर रखें। कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि रणबीर को भी अपना यह लुक पसंद है। लेकिन अब उनके पर्सनल फिटनेस ट्रेनर शिवोहम ने खुलकर बताया है कि असलियत कुछ और ही है। रणबीर कपूर अपने शरीर को केवल फिल्म के रोल के हिसाब से बदलते हैं। लेकिन रोज-रोज या हर बार बीस्ट लुक जैसे दिखना उन्हें पसंद नहीं है।
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शिवोहम ने एक इंटरव्यू के दौरान बात करते हुए कहा था कि रणबीर कपूर आजकल मौजूदा रूप में बहुत सामान्य इंसान जैसे दिखना पसंद करते हैं और दिखते भी हैं। यानी एक प्यार करने वाले पति, एक केयरिंग पिता और एक प्यारे बेटे की तरह। उनकी ये सोच है कि जब फिल्म का काम ख़त्म हो जाए तो अपनी बॉडी को किसी खास रूप में बाँधकर नहीं रखना चाहिए। (Bollywood actors fitness for characters)
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रणबीर की ये बात जितनी दिलचस्प लगती है, उतनी ही इंस्पायरिंग भी है। बॉलीवुड में अक्सर हम देखते हैं कि एक्टर्स हर वक्त ‘टॉप-लेवल की रफ एंड टफ बॉडी’ में बने रहने की कोशिश करते हैं, लेकिन रणबीर कपूर ऐसा नहीं करते। शिवोहम कहते हैं कि रणबीर फिल्म की ज़रूरत के हिसाब से अपने शरीर को बदलते हैं। जब फिल्म का रोल ख़त्म हो जाता है, तो वो उस लुक को ज़िंदगी भर नहीं थामे रहते।
शिवोहम ने कहा कि रणबीर की इस सोच के पीछे एक बहुत खास बात है। वो है उनका अनुशासन। “उनमें अनुशासन है”. रणबीर अक्सर टाइम का बहुत ध्यान रखते हैं। एक्जेक्टली वही गुण बॉलीवुड के कुछ बड़े स्टार्स, जैसे आमिर खान और अमिताभ बच्चन में भी दिखता है। (Ranbir Kapoor fitness philosophy for films)
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शिवोहम ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने उँगलियों की कुछ गिनती से भी कम बार देखा है जब रणबीर कपूर कभी बाई चांस लेट आए हों। अगर वे कभी पाँच मिनट लेट हो भी जाते हैं तो खुद मैसेज भेजकर कहते हैं, “सॉरी, मैं पाँच मिनट लेट हूँ।” रणबीर कपूर के बारे में इस तरह की बातें सुनकर समझ में आता है कि वे कितने सरल और जमीन से जुड़े इंसान हैं। (Ranbir Kapoor workout discipline and punctuality)
रणबीर का ये रवैया सिर्फ़ बॉडी के बारे में ही नहीं है, बल्कि उनकी पर्सनैलिटी में भी दिखता है। शिवोहम कहते हैं कि रणबीर की बॉडी लैंग्वेज, बात करने का तरीका और उनका दिल, सब बहुत प्यारा और सच्चा है। इन्हें ‘खानदानी’ कहने का यही मतलब होता है, दिल से नेक और बर्ताव में सच्चे।
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शिवोहम ने बताया कि उन्होंने आमिर खान के साथ भी काम किया है। जब आमिर ने लाल सिंह चड्ढा में रोल के लिए सुबह 3 बजे ट्रेनिंग की थी। और रणबीर? अगर रणबीर को सुबह 7 बजे शूटिंग हो, तो वो भी ट्रेनिंग के लिए आधा घंटा समय निकाल लेते हैं। इस तरह की डेडीकेशन और अनुशासन अधिकतर किसी के बस की बात नहीं होती है। (Ranbir Kapoor does not prefer beast look always)
ये बात मन को बहुत छूती है कि रणबीर कपूर अपनी फ़िल्मों को केवल बॉक्स-ऑफिस के लिए नहीं, बल्कि अपने दिल और सम्मान के साथ लेते हैं। उन्होंने एनिमल जैसी फिल्म में जबरदस्त बॉडी बनाई, तो लोगों ने तारीफ़ भी की। लेकिन जैसे ही फिल्म ख़त्म हुई, रणबीर सामान्य जीवन में लौट आए, वही पहले वाला बॉइश लुक वाले रणबीर, अपने घर, अपने परिवार और अपने रोजमर्रा के कामों के बीच।
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कुछ और रोचक बातें भी सामने आई हैं जो रणबीर के वर्कआउट और फिटनेस के बारे में नई जानकारी देती हैं। शिवोहम ने हाल ही में बताया कि फिटनेस में केवल प्रोटीन खाने से ही कोई “इंकरेडिबल हल्क” जैसा शरीर नहीं बनता।असल में प्रोटीन सिर्फ शरीर की मरम्मत और रिकवरी में मदद करता है। जबकि सही बॉडी पाने के लिए कड़ा वर्कआउट और स्लीक डाइट भी ज़रूरी है।
वे उस मिसकन्फ्यूज़न भी दूर करते हैं कि शाकाहारी लोग प्रोटीन नहीं ले सकते या प्रोटीन लेने से लीवर या किडनी खराब हो जाती है। शिवोहम कहते हैं ये सब गलत धारणाएं हैं। सही तरीका, डॉक्टर और ट्रेनर की देखरेख अपनाकर हर कोई प्रोटीन ले सकता है और अपनी ज़रूरत के हिसाब से फिट रह सकता है। (Ranbir Kapoor beast look truth)
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काम के मोर्चे पर रणबीर के करीबी बताते हैं कि उनके पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। वे जल्द ही संजय लीला भंसाली की लव एंड वार में भी दिखेंगे और ब्रह्मास्त्र: पार्ट टू जैसे बड़े फिल्म में भी नजर आएँगे। इन फिल्मों के लिए भी उनकी फ़िटनेस को सही मायने में संभालना ज़्यादा ज़रूरी है।
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तो अगर आप रणबीर कपूर को सिर्फ़ बीस्ट -लुक में देखना चाहते हैं, तो जान लीजिए कि वे असल ज़िन्दगी में वैसा बल्क शरीर नहीं रखना चाहते। वे अपने रोल के लिए मेहनत करते हैं। लेकिन फिर अपने असली खुद में लौट आते हैं — एक सामान्य, सादा और प्यारे इंसान की तरह। (Ranbir Kapoor fitness transformation for films)
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असल में रणबीर की ये सोच उनके फैंस को बताती है कि ज़िंदगी में बैलेंस बहुत ज़रूरी है, काम के लिए डेडीकेशन और रोल के लिए फिटनेस, लेकिन उसके बाद अपने असली आप को भी उसी प्यार और सम्मान से रखना चाहिए।
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