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रणदीप हुड्डा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह नदी के किनारे पड़े प्लास्टिक और कचरे को साफ करते नज़र आ रहे हैं। बिना किसी नारेबाज़ी या दिखावे के, यह वीडियो एक सादा लेकिन ज़रूरी बात कहता है, हम जिन जगहों पर रहते हैं और जिन्हें पीछे छोड़ते हैं, उनकी ज़िम्मेदारी लेना।
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यह काम रणदीप के लिए कोई एक बार की पहल नहीं है, बल्कि उनकी सोच और जीवनशैली का ही हिस्सा है। वह लंबे समय से प्रकृति से गहराई से जुड़े रहे हैं और वन्यजीव संरक्षण व पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज़ और समय देते आए हैं। उन्हें प्राकृतिक वातावरण से खास लगाव है और आउटडोर लाइफ के प्रति उनका प्यार हमेशा से उनकी निजी ज़िंदगी का हिस्सा रहा है। इसके अलावा, रणदीप का वर्सोवा बीच क्लीनअप अभियान के तहत अफ़रोज़ शाह के साथ भी पुराना जुड़ाव रहा है, जहां उन्होंने नागरिकों द्वारा चलाए गए इस आंदोलन में हिस्सा लिया और नियमित सफ़ाई अभियानों के ज़रिये समुद्र तट को स्वच्छ रखने में योगदान दिया है।
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रणदीप के लिए अपने आसपास और अपने देश को साफ रखना सिर्फ़ दिखावे या सामाजिक ज़िम्मेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस ज़मीन के प्रति सम्मान है, जिस पर हम रहते हैं, और उन तमाम जीव-जंतुओं के प्रति भी, जो हमारे साथ इन जगहों को साझा करते हैं। नदियां, झीलें, जंगलों के किनारे और प्राकृतिक इलाके कोई कूड़ेदान नहीं हैं, बल्कि जीवित इकोसिस्टम हैं।
इन इलाकों में फेंका गया प्लास्टिक और अनियंत्रित कचरा जितना हम समझते हैं, उससे कहीं ज़्यादा नुकसान पहुंचाता है। इससे जल स्रोत दूषित होते हैं, नाज़ुक पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता है और कई बार जानवर प्लास्टिक को खाना समझकर निगल लेते हैं या कचरे में फंस जाते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा होता है। जो लापरवाही हमें छोटी लगती है, उसके असर लंबे समय तक रहते हैं।
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इस वीडियो के ज़रिये रणदीप हुड्डा एक सीधा लेकिन बेहद अहम संदेश देना चाहते हैं—पर्यावरण की ज़िम्मेदारी रोज़मर्रा के छोटे कामों से शुरू होती है। खुद के पीछे सफ़ाई रखना, कचरा कहां और कैसे फेंकना है इस पर ध्यान देना, और साझा प्राकृतिक जगहों का सम्मान करना, एक स्वच्छ देश और स्वस्थ धरती की ओर बढ़ने के ज़रूरी कदम हैं।
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