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पटकथा लेखक Nasir Adeeb ने He-Man Dharmendra को किया याद, साझा किए किस्से

पाकिस्तानी सिनेमा के दिग्गज पटकथा लेखक नासिर अदीब (Nasir Adeeb), जिनके नाम अब तक सबसे ज़्यादा फ़िल्मों की पटकथाएँ लिखने का अघोषित विश्व रिकॉर्ड दर्ज है, जो पाकितानी फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ़ मौला जट्ट’ (The Legend of Maula Jatt) के लेखक भी है...

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Screenwriter Nasir Adeeb remembers HeMan Dharmendra shares stories
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पाकिस्तानी सिनेमा के दिग्गज पटकथा लेखक नासिर अदीब (Nasir Adeeb), जिनके नाम अब तक सबसे ज़्यादा फ़िल्मों की पटकथाएँ लिखने का अघोषित विश्व रिकॉर्ड दर्ज है, जो पाकितानी फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ़ मौला जट्ट’ (The Legend of Maula Jatt) के लेखक भी है, ने बॉलीवुड स्टार धर्मेंद्र (Dharmendra) के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. हाल ही में उन्होंने एक पॉडकास्ट किया है, जिसमें उन्होंने धर्मेंद्र की शख्सियत, संघर्ष, रिश्तों और मानवीयता पर खुलकर बातचीत की है. आइये जाने उन्होंने क्या कुछ कहा....

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धर्मेंद्र—एक युग का अंत

Dharmendra

नासिर अदीब धर्मेंद्र को भारतीय सिनेमा का असली ‘ही-मैन’ (He-Man of Indian Cinema) बताते है. वे कहते हैं “धर्मेंद्र का जाना इंडस्ट्री के एक पूरे युग का अंत है. उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र न केवल पर्दे पर शक्तिशाली दिखते थे, बल्कि असल ज़िंदगी में भी बेहद भावुक, ईमानदार और इंसानियत से भरे हुए व्यक्ति थे.

यादगार किस्से—एक दिलदार इंसान की झलक

nasir adeeb 2

नासिर अदीब ने धर्मेंद्र से जुड़ी कई अनमोल और भावुक यादें साझा कीं, जिनसे पता चलता है कि पर्दे पर ही-मैन दिखाई देने वाले धर्मेंद्र असल ज़िंदगी में कितने बड़े दिल वाले, सरल और इंसानियत से भरपूर व्यक्ति थे. उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र उन लोगों में से थे जो अपने चाहने वालों, दोस्तों और सहकर्मियों के लिए किसी भी हद तक जा सकते थे. उनका साथ हमेशा हंसी, प्यार, अपनापन और सच्ची गर्मजोशी से भरा होता था—यही बातें उन्हें सबसे अलग बनाती हैं.

धर्मेंद्र के बारे में बात करते हुए नासिर एक दिलचस्प किस्सा शेयर करते हैं. वे कहते हैं कि एक बार धर्मेंद्र ने उनसे एक कहानी लिखने का अनुरोध किया. उन्होंने पूरी लगन से स्क्रिप्ट तैयार की और धर्मेंद्र को सुनाई. कहानी सुनने के बाद धर्मेंद्र इतने खुश और प्रभावित हुए कि उन्होंने बिना कोई औपचारिकता किए उन्हें एक लाख रुपये नकद गिफ्ट में दे दिए. यह केवल फीस नहीं थी, बल्कि धर्मेंद्र की दरियादिली और बड़े दिल की ऐसी मिसाल थी जो आज भी नासिर अदीब के लिए अविस्मरणीय है.

dharmendra father

नासिर अदीब आगे बताते हैं कि जयपुर और मुंबई में धर्मेंद्र के साथ बिताए गए पल हमेशा उनके लिए खास रहेंगे. होटलों में हुई मुलाकातों, शूटिंग सेट पर बिताए वक्त और देर रात की बातों में धर्मेंद्र का बेहद सरल, मजाकिया और दोस्ताना स्वभाव साफ झलकता था. वह हर किसी को इतनी सहजता और प्यार से मिलते थे कि लोग पहली ही मुलाकात में उनसे घुल-मिल जाते थे. उनका अंदाज़ ऐसा था कि कोई भी व्यक्ति महसूस कर सकता था कि वह सिर्फ़ एक स्टार नहीं, बल्कि बड़े दिल वाला इंसान है.

इस पॉडकास्ट में उन्होंने एक रोचक घटना सुनाई—एक दमदार संवाद लिखने की. उन्होंने बताया कि उन्होंने फिल्म के लिए एक संवाद लिखा था: “तुम कितने भोले और बेवकूफ हो ठाकुर बलदेव सिंह! पाँच फुट पत्थर के टुकड़े से ज़िंदगी की भीख मांग रहे हो. अगर पत्थर के टुकड़े किसी को ज़िंदगी दे पाते, तो कोई मरता नहीं.”

dharmendra rajkumar santoshi

यह संवाद सुनकर धर्मेंद्र बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने खुले दिल से नासिर अदीब की तारीफ की. उस पल पर निर्देशक राज कुमार संतोषी (Rajkumar Santoshi) और जे.पी. दत्ता (J.P. Dutta) और फिल्म जगत से जुड़े कई अन्य सितारे भी मौजूद थे. यह घटना नासिर के करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक बन गई. 

डिम्पल कपाड़िया से वो मुलाक़ात

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इसी तरह डिम्पल कपाड़िया (Dimple Kapadia) से जुड़ा किस्सा भी बेहद दिलचस्प है. नासिर अदीब बताते हैं कि उन्होंने धर्मेंद्र से कहा कि वह बॉबी (Bobby) फिल्म से ही डिम्पल कपाड़िया के फैन रहे हैं. यह सुनकर धर्मेंद्र मुस्कुराए और हंसते हुए बोले— “जो हम सबके साथ ताश खेलती थी, वो डिम्पल ही थी!” इसके बाद धर्मेंद्र खुद नासिर को डिम्पल से मिलवाने ले गए. यह घटना बताती है कि धर्मेंद्र न केवल बड़े दिल के व्यक्ति थे, बल्कि अपने दोस्तों की खुशी का कितनी इज्जत करते थे और उन्हें हमेशा खास महसूस कराते थे.

इसके अलावा नासिर अदीब ने एक और बेहद भावुक और इंसानियत भरा किस्सा भी साझा किया. उन्होंने बताया कि एक बार जब वह पाकिस्तान वापस जा रहे थे, तो धर्मेंद्र (Dharmendra) ने अपनी फिल्म की पूरी शूटिंग कैंसिल करवा दी, सिर्फ़ इसलिए ताकि वे खुद उन्हें एयरपोर्ट छोड़ने जा सकें. यह उनके लिए न सिर्फ़ चौंकाने वाला, बल्कि बेहद सम्मानजनक और दिल छू लेने वाला पल था. नासिर बताते हैं कि एयरपोर्ट पर धर्मेंद्र ने न केवल उन्हें बड़े प्यार से विदा किया, बल्कि उनकी पत्नी के लिए उपहारस्वरूप 5 लाख रुपये का लिफाफा भी दिया. उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र की यह दरियादिली और सच्चा अपनापन आज भी उनकी यादों में ताज़ा है.

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पॉडकास्ट के आखिर में नासिर अदीब ने भावुक होकर कहा कि धर्मेंद्र सिर्फ अपने समय के सुपरस्टार नहीं थे, बल्कि वे भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के ‘आखिरी पिलर’ (Last Pillar of Indian Cinema) थे—एक ऐसी मजबूत नींव, जिस पर एक पूरी पीढ़ी ने अभिनय का सौंदर्य, मेहनत और ईमानदारी देखी. उनकी एक्टिंग, उनकी बॉडी, उनका स्वभाव, उनकी विनम्रता और सबसे बढ़कर इंसानों के प्रति उनका मानवीय रिश्ता—ये सब बातें उन्हें एक अलग ही ऊंचाई पर ले जाती हैं. धर्मेंद्र का प्रभाव आज भी नई पीढ़ी में देखा जा सकता है. उनकी परंपरा, उनकी शैली, उनकी गर्मजोशी और काम के प्रति उनका जुनून आज भी कई कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है. धर्मेंद्र का व्यक्तित्व इतना बहुआयामी था कि वह अपने चाहने वालों की यादों में हमेशा ज़िंदा रहेंगे—एक अभिनेता, एक दोस्त, एक इंसान और एक ऐसी विरासत के रूप में जिसे मिटाया नहीं जा सकता. 

dharmendra family

धर्मेंद्र की ये यादें सिर्फ किस्से नहीं, बल्कि एक ऐसे महान कलाकार की जीवित धरोहर हैं, जिसने सिनेमा के साथ-साथ लाखों दिलों पर गहरी छाप छोड़ी. 

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