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ताजा खबर: अल्लाह रक्खा रहमान, जिन्हें आमतौर पर ए. आर. रहमान (ARR) कहा जाता है, भारत के प्रसिद्ध संगीतकार, रिकॉर्ड प्रोड्यूसर, गायक, गीतकार, मल्टी-इंस्ट्रूमेंटलिस्ट और समाजसेवी हैं. वे मुख्य रूप से तमिल और हिंदी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते हैं, साथ ही अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है.
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अवार्ड
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रहमान को अब तक छह राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार, दो ऑस्कर अवॉर्ड, दो ग्रैमी अवॉर्ड, एक बाफ्टा अवॉर्ड, एक गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड, छह तमिलनाडु स्टेट फ़िल्म अवॉर्ड, पंद्रह फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड और अठारह फ़िल्मफ़ेयर साउथ अवॉर्ड मिल चुके हैं. वर्ष 2010 में भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाज़ा.
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फिल्म रोज़ा से किया डेब्यू
अपने इन-हाउस स्टूडियो पंचथान रिकॉर्ड इन के साथ रहमान ने 1990 के दशक की शुरुआत में तमिल फ़िल्म ‘रोज़ा’ से फ़िल्म संगीत में करियर की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने ‘बॉम्बे’, ‘कादलन’, ‘थिरुदा थिरुदा’ और शंकर की डेब्यू फ़िल्म ‘जेंटलमैन’ जैसी कई चर्चित तमिल फ़िल्मों के लिए संगीत दिया. हॉलीवुड में उनकी पहली फ़िल्म ‘कपल्स रिट्रीट’ (2009) के लिए उन्हें बीएमआई अवॉर्ड मिला. फ़िल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ (2008) के संगीत ने उन्हें ऑस्कर में बेस्ट ओरिजिनल स्कोर और बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग (‘जय हो’) का सम्मान दिलाया. इसके अलावा 2010 के ग्रैमी अवॉर्ड्स में उन्हें बेस्ट कम्पाइलेशन साउंडट्रैक एल्बम और बेस्ट सॉन्ग रिटन फॉर विज़ुअल मीडिया का पुरस्कार मिला. रहमान को प्यार से “इसाई पुयाल” (संगीत का तूफ़ान) और “मोज़ार्ट ऑफ मद्रास” भी कहा जाता है.
टाइम मैगज़ीन में भी रह चुका है नाम
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संगीत के साथ-साथ रहमान एक बड़े समाजसेवी भी हैं. उन्होंने कई सामाजिक कारणों और चैरिटीज़ के लिए धन जुटाया और दान दिया है. 2006 में उन्हें वैश्विक संगीत में योगदान के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा सम्मानित किया गया. 2008 में उन्हें रोटरी क्लब ऑफ मद्रास से लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला. 2009 में टाइम मैगज़ीन ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया. 2014 में उन्हें बर्कली कॉलेज ऑफ म्यूज़िक से मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिली, वहीं अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से भी उन्हें मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया. 2017 में उन्होंने फ़िल्म ‘ले मस्क’ से बतौर निर्देशक और लेखक भी डेब्यू किया. 2024 में उन्हें ट्रिनिटी लाबान का मानद अध्यक्ष नियुक्त किया गया.
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प्रारंभिक जीवन
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अल्लाह रक्खा रहमान का जन्म 6 जनवरी 1967 को तमिलनाडु के मद्रास (अब चेन्नई) में दिलीप कुमार राजगोपाल के रूप में हुआ था. उनके पिता आर. के. शेखर मलयालम फिल्मों के लिए संगीतकार और कंडक्टर थे. रहमान ने चार साल की उम्र में पियानो सीखना शुरू कर दिया था और पिता के स्टूडियो में कीबोर्ड बजाकर उनकी मदद करने लगे.
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जब रहमान नौ साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया. इसके बाद परिवार की आमदनी उनके पिता के संगीत उपकरण किराए पर देने से होने लगी. उनकी मां करीमा (जिनका जन्म नाम कस्तूरी था) ने बच्चों को संभाला. रहमान पढ़ाई के साथ-साथ परिवार का सहारा बनने लगे, जिससे उन्हें कई बार स्कूल से गैरहाज़िर रहना पड़ा और परीक्षाओं में असफल भी होना पड़ा. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि एक समय ऐसा भी आया जब उनकी मां से कहा गया कि उन्हें स्कूल भेजने की बजाय भीख मांगने भेज दें.
![[Ch. 02] The A.R. Rahman Story – From Family Struggles to Musical Revolution](https://img-cdn.publive.online/filters:format(webp)/mayapuri/media/post_attachments/rahmaniac.com/wp-content/uploads/2022/12/Print_Interview_2006-1-656537.jpg?resize=800%2C500&ssl=1)
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बाद में उन्होंने एमसीएन स्कूल में एक साल पढ़ाई की और फिर मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज हायर सेकेंडरी स्कूल में दाख़िला लिया, जहां उनकी संगीत प्रतिभा देखकर उन्हें अवसर मिला और उन्होंने अपने दोस्तों के साथ एक बैंड भी बनाया. आगे चलकर उन्होंने पढ़ाई छोड़कर पूरी तरह संगीत को ही अपना करियर बनाने का फ़ैसला किया. वे Roots जैसे बैंड के साथ जुड़े और बाद में Nemesis Avenue नाम से एक रॉक ग्रुप भी बनाया. उन्होंने कीबोर्ड, पियानो, सिंथेसाइज़र, हारमोनियम और गिटार में महारत हासिल की, लेकिन उन्हें सबसे ज़्यादा लगाव सिंथेसाइज़र से था, क्योंकि उनके लिए यह “संगीत और तकनीक का आदर्श मेल” था.
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रहमान ने अपने शुरुआती संगीत प्रशिक्षण मास्टर धनराज से लिया और 11 साल की उम्र में मलयालम संगीतकार एम. के. अर्जुनन के ऑर्केस्ट्रा में बजाने लगे. इसके बाद उन्होंने एम. एस. विश्वनाथन, इलैयाराजा, विजय आनंद, हंसलेखा और राज–कोटी जैसे कई दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया. उन्होंने ज़ाकिर हुसैन, कुन्नाकुडी वैद्यनाथन और एल. शंकर जैसे कलाकारों के साथ विश्व भ्रमण भी किया और ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ म्यूज़िक, लंदन से स्कॉलरशिप हासिल की. अपने शुरुआती करियर में उन्होंने कई फिल्मों के लिए कीबोर्ड और सिंथेसाइज़र प्रोग्रामिंग की, जिनमें 1989 की मलयालम फ़िल्म ‘रामजी राव स्पीकिंग’ का गीत ‘कालिकलम’ भी शामिल है.
इस्लाम धर्म ग्रहण और नाम परिवर्तन
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मद्रास में पढ़ाई के दौरान रहमान ने वेस्टर्न क्लासिकल म्यूज़िक में डिप्लोमा किया. 1984 में उनकी छोटी बहन की गंभीर बीमारी के समय उनका संपर्क क़ादिरी तरीक़ा से हुआ. उस दौर में उनकी मां एक आस्थावान हिंदू थीं. 1989 में, 23 साल की उम्र में, रहमान ने अपने परिवार के साथ इस्लाम धर्म स्वीकार किया.
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इसी समय उन्होंने अपना नाम भी बदल लिया. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उन्हें अपना जन्म का नाम कभी पसंद नहीं था. उनकी जीवनी AR Rahman: The Spirit of Music के अनुसार, एक हिंदू ज्योतिषी ने उन्हें “अब्दुल रहमान” और “अब्दुल रहीम” नाम सुझाए थे, जिनमें से उन्हें “अब्दुल रहमान” तुरंत पसंद आ गया. बाद में उनकी मां ने एक सपने के बाद उनके नाम में “अल्लाह रक्खा” जोड़ दिया, और इस तरह वे दुनिया के सामने अल्लाह रक्खा रहमान (ए. आर. रहमान) के नाम से पहचाने जाने लगे.
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पर्सनल लाईफ
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