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ताजा खबर: बॉलीवुड अभिनेता Sushant Singh Rajput के फैंस आज भी उनकी रहस्यमयी मौत से उबर नहीं पाए हैं. 14 जून 2020 को सुशांत अपने मुंबई स्थित घर में मृत पाए गए थे. आज तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उनकी मौत आत्महत्या थी, हत्या थी या किसी अन्य कारण से हुई. इस घटना ने न सिर्फ उनके चाहने वालों को झकझोर दिया, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली, खासकर नेपोटिज़्म और अंदरूनी राजनीति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
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नेपोटिज़्म की बहस को मिली नई हवा
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सुशांत की मौत के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या इंडस्ट्री में “आउटसाइडर्स” के साथ भेदभाव होता है. कई लोगों का मानना रहा कि सुशांत जैसे कलाकारों को इंडस्ट्री में बराबरी का मौका नहीं मिलता और उन्हें साइडलाइन किया जाता है. यही कारण है कि नेपोटिज़्म पर बहस और मुखर हो गई—जहां एक ओर स्टार किड्स को मौके मिलते दिखे, वहीं दूसरी ओर बाहरी कलाकारों के संघर्ष को लेकर आवाज़ उठी.
कार्तिक आर्यन को लेकर उठा नया सवाल
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यही बहस हाल ही में तब फिर उभरी जब Kartik Aaryan की फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई. सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक रील में यह दावा किया गया कि कार्तिक के खिलाफ एक तरह का एजेंडा चलाया जा रहा है—उन्हें “फेक पीआर प्रोडक्ट” बताकर साइडलाइन करने की कोशिश की जा रही है. इस रील ने आलोचना और लक्षित नकारात्मकता के बीच की रेखा पर बहस छेड़ दी.
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आलोचना या टार्गेटेड नेगेटिविटी?
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वायरल रील में यह तर्क दिया गया कि किसी फिल्म को पसंद न आना स्वाभाविक है और उस पर आलोचना होनी भी चाहिए—कहानी, स्क्रीनप्ले, म्यूज़िक या तकनीकी पक्षों पर सवाल उठाना जायज़ है. लेकिन जब किसी एक्टर को लगातार व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाया जाए, करियर खत्म करने की धमकियां दी जाएं या भुगतान के बदले नकारात्मक कंटेंट फैलाया जाए, तो यह आलोचना नहीं बल्कि क्रूरता बन जाती है. रील में यह भी दावा किया गया कि कुछ बड़े क्रिएटर्स और यूट्यूबर्स को ऐसे नकारात्मक वीडियो बनाने के लिए संपर्क किया जा रहा है—हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
सुनील शेट्टी की प्रतिक्रिया
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इस रील को Suniel Shetty द्वारा लाइक किया जाना चर्चा का केंद्र बन गया. इससे यह संकेत मिला कि वह रील में उठाए गए मुद्दों से सहमत हो सकते हैं. रील के कैप्शन में साफ कहा गया कि यह “फिल्म पसंद या नापसंद” का मामला नहीं, बल्कि यह समझने का सवाल है कि आलोचना कहां खत्म होती है और क्रूरता कहां शुरू होती है. साथ ही यह भी कहा गया कि सिनेमा ईमानदारी का हकदार है—पैसे लेकर फैलाया गया शोर या किसी के चरित्र को बदनाम करना नहीं.
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इंडस्ट्री के लिए आत्ममंथन का समय
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सुशांत सिंह राजपूत का मामला और कार्तिक आर्यन से जुड़ी मौजूदा बहस—दोनों ने यह सवाल फिर सामने रखा है कि क्या इंडस्ट्री में आउटसाइडर्स के लिए रास्ते वाकई बराबर हैं. आलोचना ज़रूरी है, लेकिन वह रचनात्मक होनी चाहिए. लक्षित नकारात्मकता और कथित एजेंडाबाज़ी न सिर्फ कलाकारों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि सिनेमा की विश्वसनीयता पर भी असर डालती है. अंततः, दर्शकों की समझ और समय की कसौटी ही तय करती है कि क्या सही है—ईमानदार समीक्षा या संगठित शोर.
FAQ
सुशांत सिंह राजपूत का मामला आज भी चर्चा में क्यों है?
उत्तर:Sushant Singh Rajput की मौत की परिस्थितियां आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई हैं, जिस वजह से फैंस और इंडस्ट्री में सवाल बने हुए हैं.
सुशांत की मौत ने किस तरह की बहस को जन्म दिया?
उत्तर: इस घटना के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज़्म और आउटसाइडर्स के साथ भेदभाव को लेकर बहस तेज हो गई.
नेपोटिज़्म को लेकर लोगों की मुख्य शिकायत क्या है?
उत्तर: कई लोगों का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में स्टार किड्स को ज्यादा मौके मिलते हैं, जबकि बाहरी कलाकारों को साइडलाइन किया जाता है.
कार्तिक आर्यन को लेकर नई बहस क्यों शुरू हुई?
उत्तर:Kartik Aaryan की हालिया फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर कमजोर प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कथित एजेंडा चलाए जाने के दावे सामने आए.
वायरल रील में क्या आरोप लगाए गए हैं?
उत्तर: रील में कहा गया कि कुछ क्रिएटर्स और यूट्यूबर्स को पैसे देकर किसी एक्टर के खिलाफ नकारात्मक वीडियो बनवाए जा रहे हैं.
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kartik aaryan movie | Sunil Shetty
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