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Bhabiji Ghar Par Hain Fun On The Run Movie Review: कॉमेडी से भरपूर है ‘भाबीजी घर पर हैं! फन ऑन द रन’

रिव्यूज: Bhabiji Ghar Par Hain Fun On The Run Movie Review: टीवी के मशहूर शो ‘भाबीजी घर पर हैं’ पर बनी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई है, जानिए कैसी हैं फिल्म की कहानी.

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Bhabiji Ghar Par Hain Fun On The Run
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फिल्म रिव्यू: भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन
कलाकार: रवि किशन, मुकेश तिवारी, दिनेश लाल यादव (निरहुआ), आसिफ शेख, रोहिताश्व गौर, शुभांगी अत्रे, विदिशा श्रीवास्तव, बृजेंद्र काला
डायरेक्टर: शशांक बाली
भाषा: हिंदी
रेटिंग: 3 स्टार

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Bhabiji Ghar Par Hain Fun On The Run Movie Review: 'भाबीजी घर पर हैं फन ऑन द रन' (Bhabiji Ghar Par Hain! Fun On The Run) भारतीय हिंदी कॉमेडी ड्रामा फिल्म है, जिसे शशांक बाली ने डायरेक्ट किया है. एडिट II प्रोडक्शंस और ज़ी सिनेमा के बैनर तले बनी इस फिल्म में आसिफ शेख, रोहिताश्व गौर, शुभांगी अत्रे, विदिशा श्रीवास्तव, रवि किशन, मुकेश तिवारी और दिनेश लाल यादव हैं. यह टीवी सीरीज भाभीजी घर पर हैं पर आधारित है. फिल्म 6 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी हैं. फिल्म को दर्शकों की ओर से शानदार रिस्पॉस (Bhabiji Ghar Par Hain! Fun On The Run review) भी मिल रहा हैं. ऐसे में अगर आप इस फिल्म को देखने का प्लान बना रहे हैं तो आज हम आपको बताएंगे कि यह फिल्म कैसी है. आइए जानते हैं इस फिल्म (Bhabiji Ghar Par Hain! Fun On The Run full movie review)  का रिव्यू.

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फिल्म की कहानी किया है? (Bhabiji Ghar Par Hain! Fun On The Run Plot) 

कहानी दुश्मन पड़ोसियों विभूति (आसिफ शेख का रोल), मनमोहन तिवारी (रोहिताश गौड़ का रोल) और अंगूरी (शुभांगी अत्रे का रोल) की है, जो अपनी पत्नियों अंगूरी (शुभांगी अत्रे का रोल) और अनीता (विदिशा श्रीवास्तव का रोल) के साथ एक अचानक रोड ट्रिप पर निकलते हैं. जो एक आसान सफर से शुरू होता है, वह जल्द ही मुश्किलों में बदल जाता है जब उनका सामना दो अजीब भाइयों शांति शर्मा (रवि किशन का रोल) और क्रांति शर्मा (मुकेश तिवारी का रोल) से होता है, जिनकी अजीब हरकतें सब कुछ मुश्किल बना देती हैं. गलतफहमी, भेष और मज़ेदार गड़बड़ियों की वजह से ग्रुप लगातार भागता रहता है, जिससे कई मज़ेदार और अनदेखे हालात बन जाते हैं, जैसे शांति को अंगूरी भाभी से प्यार हो जाता है और क्रांति को अनीता भाभी से प्यार हो जाता है. जैसे-जैसे गुस्सा बढ़ता है और दोस्ती की परीक्षा होती है, किरदारों को मुसीबत से बचने और घर वापस जाने का रास्ता खोजने के लिए टीमवर्क और तेज़ सोच पर भरोसा करना पड़ता है. इस खतरे से निपटते हुए, वे अनजाने में लोकल गुंडों के भी दुश्मन बन जाते हैं. वे इस अफरा-तफरी से कैसे निपटेंगे?

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 स्टारकास्ट ने कैसी एक्टिंग की हैं? (Bhabiji Ghar Par Hain! Fun On The Run Performance) 

विभूति नारायण मिश्रा के रोल में आसिफ शेख आसानी से चार्मिंग बने रहते हैं. उनकी कॉमिक टाइमिंग, एक्सप्रेशन और डायलॉग डिलीवरी इस फ्रेंचाइजी की जान बनी हुई है, जिससे विभूति लगातार एंटरटेनिंग बने रहते हैं. वह सच में फिल्म में पूरी कॉमिक टाइमिंग की रीढ़ हैं. रोहिताश्व गौड़ मनमोहन तिवारी के रोल में भरोसेमंद और दमदार सिचुएशनल ह्यूमर लाते हैं. उनके रिएक्शन और जुबानी बहस क्लासिक विभूति-तिवारी डायनामिक को बनाए रखती है जिसे फैंस पसंद करते हैं. शुभांगी अत्रे अंगूरी की मासूमियत को बनाए रखती हैं, मिठास और ह्यूमर दोनों को बराबर मात्रा में देती हैं. उनकी सादगी फिल्म के इमोशनल एंकर में से एक बनी हुई है. विदिशा श्रीवास्तव अनीता विभूति नारायण मिश्रा के रोल में एलिगेंस और कंपोजर लाती हैं, अपने आस-पास की तेज कॉमिक एनर्जी को बैलेंस करते हुए खास ह्यूमर वाले पलों में असरदार तरीके से योगदान देती हैं. रवि किशन शांति शर्मा के रोल में अपनी स्क्रीन प्रेजेंस और ड्रामैटिक अंदाज से एक्स्ट्रा फ्लेवर डालते हैं, जिससे उनके हिस्से जानदार और यादगार बन जाते हैं. शांति शर्मा के छोटे भाई क्रांति शर्मा के रोल में मुकेश तिवारी अपनी खास स्क्रीन एनर्जी और एक्सप्रेसिव डायलॉग डिलीवरी से फिल्म में एक मज़बूत कॉमिक प्रेजेंस जोड़ते हैं. दिनेश लाल यादव, सोमा राठौड़, प्रत्यूष कौशल, राजेश शर्मा, मुकेश तिवारी, योगेश त्रिपाठी, नवीन बावा, अनूप उपाध्याय, सानंद वर्मा और मुश्ताक खान जैसे सपोर्टिंग एक्टर्स ने इस उथल-पुथल में अपना योगदान दिया है.

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डायरेक्शन

शशांक बाली फिल्म को बड़े पर्दे का अनुभव देने में सफल नहीं हो पाते, क्योंकि पूरी कहानी एक लंबे टीवी एपिसोड जैसा अहसास कराती है. फिल्म की रफ्तार कहीं एक जैसी नहीं रहती, कई सीन बिना वजह खिंचते हैं और हास्य अक्सर उस असर तक नहीं पहुंच पाता, जिसकी उम्मीद की जाती है. कहानी में न तो कोई साफ़ स्ट्रक्चर नजर आता है और न ही सही तरह का बिल्ड-अप, वहीं ओरिजिनल शो को लोकप्रिय बनाने वाली शार्प टाइमिंग भी यहां नदारद है. जो फिल्म एक मजेदार थिएट्रिकल एक्सटेंशन बन सकती थी, वह इसके बजाय बिखरी हुई और कमजोर नियंत्रण वाली लगती है.

क्या फिल्म देखने जाना चाहिए?

‘भाबीजी घर पर हैं!  फन ऑन द रन’ बड़े पर्दे पर पॉपुलर टीवी शो को उतारने की एक कमजोर कोशिश साबित होती है. फिल्म अपने ओरिजिनल चार्म और टाइमिंग को दोहरा नहीं पाती और नतीजतन यह एक ऐसी कॉमेडी बनकर रह जाती है, जो मनोरंजन के बजाय जल्दी भुला दी जाती है.

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