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Vadh 2 Movie Review: क्या ‘वध 2’ की कहानी दर्शकों पर छोड़ पाई अपनी छाप?

रिव्यूज: Vadh 2 Movie Review: अगर आप संजय मिश्रा और नीना गुप्ता की ‘वध 2’ को देखने का प्लान बना रहे है तो हम बताएंगे कि फिल्म कैसी है. आइए जानते हैं फिल्म का रिव्यू.

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Vadh 2
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Movie Review- 'वध 2'
कलाकार- नीना गुप्ता , संजय मिश्रा , योगिता बिहानी , कुमुद मिश्रा , अक्षय डोगरा और शिल्पा शुक्ला
लेखक- जसपाल सिंह संधू
निर्देशक- जसपाल सिंह संधू
निर्माता- लव रंजन और अंकुर गर्ग
रिलीज डेट- 06 फरवरी 2026
रेटिंग- 3 स्टार

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Vadh 2 Movie Review: बॉलीवुड कलाकार संजय मिश्रा (Sanjay Mishra) और नीना गुप्ता की फिल्म ‘वध 2’ (Vadh 2) आज, 6 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई हैं.  फिल्म को दर्शकों की ओर से ठीक- ठाक रिस्पॉस भी मिल रहा हैं. ऐसे में अगर आप इस फिल्म को देखने का प्लान बना रहे हैं तो आज हम आपको बताएंगे कि यह फिल्म कैसी है. आइए जानते हैं कैसा हैं इस फिल्म 'वध 2' का रिव्यू (Vadh 2 Movie Review).

Vadh 2 Trailer: Sanjay Mishra और Neena Gupta की फिल्म 'वध 2' का ट्रेलर आउट

'वध 2' की कहानी

मध्य प्रदेश के शिवपुरी की एक जेल में सेट फिल्म वध 2 एक बार फिर शंभूनाथ मिश्रा (संजय मिश्रा) और मंजू (नीना गुप्ता) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दो प्रेमी हैं जो एक-दूसरे को चाहते हैं. शंभूनाथ एक जेल गार्ड है जो अपने बेटे की पढ़ाई को लेकर फिर से भारी कर्ज़ में डूबा हुआ है. जेल में अपने काम के अलावा, वह सब्ज़ियाँ भी चुराता है और कर्ज़ चुकाने के लिए कुछ एक्स्ट्रा इनकम के लिए उन्हें बाहर बेचता है. वहीं मंजू जो एक इज्ज़तदार कैदियों में से एक है, जिसे एक जवान जोड़े की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है. लेकिन उसकी जेल की सज़ा खत्म होने वाली है और वह बाहर निकलने वाली है. इन सबके बीच, एक जवान लड़की,  नैना कुमारी (योगिता बिहानी)  है, जिसे गलत इल्जामों में जेल में डाला गया है. जैसे ही उसे बेल मिलने वाली होती है, उसे एक और मजबूत कैदी केशव उर्फ भूरी भैया (अक्षय डोगरा) जो एक गुंडा है और एक पॉलिटिशियन का भाई है, रोक देता है. उसके नैना के प्रति गलत इरादे हैं. केशव जेल सुपरिटेंडेंट प्रकाश (कुमुद मिश्रा) से बहस करता है, और एक धुंधली रात में उसे बुरी तरह पीटा जाता है. लेकिन, अगली सुबह वह गायब हो जाता है. केशव कहां गया है? क्या वह भाग गया है? उसे ढूंढने के लिए, एक युवा इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर अतीत सिंह को मामले की जांच करने के लिए भेजा जाता है. जैसे ही वह जेल में जाता है और केशव के लापता होने के मामले का रहस्य सुलझाता है, और भी सच्चाई सामने आती है. वह रहस्य कैसे सुलझाएगा? केशव कहाँ गया है, और शंभूनाथ और मंजू का इससे क्या लेना-देना है? 

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एक्टिंग

‘वध 2’ अपनी मजबूती पूरी तरह इसके सधे हुए कलाकारों के अभिनय पर टिकी हुई है. संजय मिश्रा एक बार फिर यह साबित करते हैं कि सूक्ष्म और शांत अभिनय में उनका कोई सानी नहीं है. शंभूनाथ मिश्रा के रूप में उनका ठहराव, भीतर दबा दर्द, प्रेम और अपराधबोध दर्शकों को गहराई से छूता है. नीना गुप्ता मंजू सिंह के किरदार में किसी तरह का ओवरड्रामा नहीं करतीं, बल्कि अपनी सहजता और भावनात्मक परिपक्वता से एक सशक्त और असाधारण महिला की छवि गढ़ती हैं. संजय और नीना की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री बिना किसी बनावटी रोमांस के भी बेहद प्रभावशाली लगती है. कुमुद मिश्रा शुरुआत में दमदार प्रभाव छोड़ते हैं, हालांकि कहानी के मोड़ के साथ उनके किरदार का ग्राफ अचानक कमजोर पड़ता है, जो थोड़ा खटकता है. वहीं अक्षय डोगरा सीमित स्क्रीन टाइम में भी खौफनाक अपराधी के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं. योगिता बिहानी, शिल्पा शुक्ला और अमित के सिंह भी अपने-अपने किरदारों में सच्चाई और ईमानदारी के साथ नजर आते हैं.

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डायरेक्शन

जसपाल सिंह संधू ने ‘वध 2’ के डार्क और रहस्यमय माहौल को काफी संतुलित तरीके से संभाला है. मजबूत कहानी और दिलचस्प स्क्रिप्ट के साथ मर्डर मिस्ट्री को पर्दे पर उतारना आसान नहीं होता, लेकिन इस मोर्चे पर वह काफी हद तक सफल नजर आते हैं. हालांकि, फिल्म में इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर को जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम दिए जाने के कारण केस की मूल मिस्ट्री और उससे जुड़ी भावनात्मक परतों पर से फोकस कुछ हद तक भटकता हुआ महसूस होता है.

क्या फिल्म देखने जाना चाहिए?

‘वध 2’ देखने लायक फिल्म है, खासकर तब जब इसे पहली फिल्म से तुलना किए बिना देखा जाए. अपने दम पर यह एक सधी हुई कहानी पेश करती है और दर्शकों को एक रोचक व प्रभावशाली सिनेमैटिक अनुभव देने में कामयाब रहती है.

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