तानाजी रिव्यु : फिल्म उतनी ही दमदार है जितना सोचा था

तानाजी जैसी फिल्मे बॉलीवुड में कभी कभी बनती हैं

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जैसा की फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद उम्मीद की जा रही थी, फिल्म उतनी ही दमदार है। ये कहना गलत नहीं होगा की तानाजी अजय देवगन के करियर की अब तक की सबसे हिट फिल्म साबित हो सकती है। बता दें की तानाजी अजय देवगन की 100वीं फिल्म है। आइये देखते है Tanhaji – The Unsung Warrior का रिव्यु

कहानी

फिल्म शुरू होती है 1647 के समय में , जहाँ तानाजी (अजय देवगन) के पिता जो उन्हें “तांणिया” कहकर बुलाते हैं, तानाजी को तलवारबाज़ी सिखा रहें है। तानाजी की वीरता और काबिलियत यहीं से देखने को मिल जाती है। मुग़ल तानाजी के पिता की हत्या कर देते हैं, और मरने से पहले तानाजी के पिता उनसे कहते हैं “तांणिया, इस मिट्टी का क़र्ज़ अब तुझे चुकाना है”
अब कहानी 17 साल आगे 1664 में बढ़ती है, जहाँ शिवाजी महाराज(शरद केलकर) के शौर्य के बारे में बताया जाता है , सूबेदार तानाजी मालसुरे यानी तानाजी शिवाजी महाराज के दाहिने हाथ और उनके परम मित्र भी हैं। तानाजी अपने साथ कुछ सैनिको के साथ मुगलों की एक टुकड़ी को मार गिराते हैं। एक ओर जहाँ औरंगज़ेब (ल्यूक केनी) पूरे हिंदुस्तान पर मुगलिया परचम लहराने की रणनीति बना रहा है वहीँ शिवाजी महाराज भी स्वराज को लेकर ली गई कसम के प्रति कटिबद्ध हैं।
एक सुलह के तहत शिवाजी महाराज मुगलों को 23 किले दे देते हैं , जिनमे कोंडाणा किला भी शामिल था। जब मुग़ल कोंडाणा किले पर कब्ज़ा लेने आते है तो राजमाता जीजाबाई अपनी पूजा कर रहीं होती हैं , मुगलों के जोर देने पर वो कोंडाणा किला उनके हवाले कर देती हैं ,और ये शपथ लेती हैं की जब तक इस किले पर दोबारा भगवा नहीं लहराएगा वो पादुकाएं नहीं पहनेंगी।
अब कहानी 4 साल आगे बढ़ती है , तानाजी और उनकी पत्नी सावित्रीबाई (काजोल) अपने बेटे की शादी कि तैयारियों में व्यस्त हैं, तानाजी निमंत्रण लेकर शिवाजी के पास आते हैं जहाँ उन्हें पता चलता है की औरंगज़ेब ने अपने एक ख़ास अंगरक्षक उदयभान राठौड़(सैफ़ अली खान) को 2000 सैनिकों और नागिन नाम की एक तोप देकर मराठों का खात्मा करने के लिए भेजा है ,अब तानाजी जोर देकर इस मुहीम का जिम्मा अपने ऊपर ले लेते हैं।
उदयभान भी तानाजी के जैसे ही बहादुर है ,लेकिन उसके अंदर बर्बरता भरी हुई है, इसी व्यवहार के चलते वह राजकुमारी कमला देवी के पति की हत्या करने के बाद उससे विवाह रचाने के लिए उसे उठा लाता है। एक गद्दार उदयभान को खबर देता है की तानाजी अपने लोगों के साथ पहाड़ी के रास्ते पर उसका इंतज़ार कर रहा है जिसके चलते उदयभान अपना रास्ता बदल देता है।
तानाजी उदयभान के लिए काम कर रहे कुछ मराठों के साथ मिलकर एक योजना बनाता है ,और खुद को गिरफ्तार कराने के बहाने उदयभान के ठिकाने का जायजा लेकर वहां से भाग निकलता है।
अब तानाजी फिरसे अपनी फ़ौज को लेकर उदयभान पर योजनाबद्ध तरीके से हमला करता है और अपना एक हाथ गंवाने के बाद भी बहदुरी से लड़ते हुए उदयभान को मार देता है।

अवलोकन

फिल्म पहली सेकंड से ही अपने साथ जोड़ लेती है और पल भर के लिए भी नजरें हटने नहीं देती है। पहाड़ी और युद्ध के दृश्यों ने फिल्म में और अधिक जान डाल दी है।फिल्म देखते हुए ऐसा लगता है की आप एक अलग ही दुनिया में हैं। Graphics और VFX का शानदार इस्तेमाल फिल्म में देखने को मिलता है।
फिल्म का कोई भी सीन Animated या ख़यालाती नहीं लगता है। सब कुछ अपनी जगह अव्वल दर्जे का है।

डायरेक्शन

फिल्म को ओम रौत ने डायरेक्ट किया है और उनके काम का एक शानदार प्रदर्शन फिल्म में देखने को मिलता है।

संगीत

फिल्म का संगीत बहुत ही शानदार है , दृश्यों के साथ मिलकर संगीत और अधिक आनंदमय हो जाता है।

अभिनय

फिल्म के अभिनय की बात करें तो फिल्म के सभी किरदारों ने बखूबी अपने किरदार को निभाया है ।अजय देवगन ने तानाजी के किरदार में चार चाँद लगा दिए हैं , काजोल भी सावित्रीबाई के किरदार को बखूबी निभा रहीं हैं। उदयभान के क्रूर और सनकी किरदार में सैफ़ अली खान जच रहे हैं, वो फिल्म में डराते भी हैं और हँसाते भी हैं।  किसी ने भी अपने अभिनय में कोई कमी नहीं छोड़ी है।

क्यों देखें

तानाजी अजय देवगन के करियर की अब तक की सबसे हिट फिल्म साबित हो सकती है , बॉलीवुड के इतिहास में ये फिल्म अपनी एक अलग जगह बना सकती है। साल 2020 की धमाकेदार शुरुआत तानाजी के साथ हुई है।

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