कोरोनावायरस पर डॉक्यूमेंट्री / अब क्षेत्रीय युवाओं ने उठाया लोगों को जागरुक करने का ज़िम्मा, शॉर्ट फिल्म बनाकर दे रहे महत्वपूर्ण संदेश

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Documentry on Coronavirus

गढ़वाली बोली में बनी कोरोनावायरस पर डॉक्यूमेंट्री दूरस्थ गांव के लोगों को कर रही है जागरुक

कहते हैं अपनी बोली, अपनी भाषा की बात ही कुछ और होती है। जब अपनी जुबान में कुछ समझाया जाए तो उसका असर तेज़ी से पड़ता है और लंबे वक्त तक रहता है। इसीलिए अब कोरोना से लोगों को जागरुक करने के लिए उसी जादुई भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। जागरुकता का ये बीड़ा उठाया है उत्तराखंड के दूरस्थ जिले में बसे कुछ युवाओं ने जो बेहद कम संसाधनों लेकिन हर नियम का पालन करते हुए कोरोनावायरस पर डॉक्यूमेंट्री बना रहे हैं।

गढ़वाली भाषा में बनाई गई है डॉक्यूमेंट्री

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Source – You Tube

रुद्रप्रयाग जिले के युवाओं ने मिलकर कोरोनावायरस पर डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया है। जिसका एकमात्र उद्देश्य है मनोरंजक तरीके से एक ठोस संदेश लोगों तक पहुंचाना। इस शॉर्ट फिल्म को लोक स्टूडियो यूट्यूब चैनल पर रिलीज़ किया गया है। इस विषय पर चार डॉक्यूंमेंट्री बनाई जाएंगी जिसके दो पार्ट रिलीज़ किए जा चुके हैं। पहले पार्ट “कोविड 19 (घौर रा सुरक्षित रा)” और दूसरे पार्ट “मंगतू परदेसी अर प्रधान दिदा” को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। तीसरा पार्ट 2 दिन बाद 5 जून को रिलीज़ किया जाएगा। इस फिल्म की लोकप्रियता और महत्ता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस फिल्म को मुख्यमंत्री की फेसबुक वॉल से भी शेयर किया जा चुका है।

कम समय, कम संसाधन…लेकिन प्रभावी संदेश

खास बात ये है कि इन डॉक्यूमेंट्री से वो लोग जुड़े हैं जिन्हें फिल्म प्रोडक्शन, एक्टिंग के बारे में ना के बराबर अनुभव हैं। हालांकि सभी अपने-अपने क्षेत्र में पारंगत हैं, विद्वान हैं लेकिन एक्टिंग से दूर दूर तक कोई सरोकार नहीं। लेकिन फिर भी कम समय और कम संसाधनों में एक प्रभावी संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्होने ये बीड़ा उठाया है। फिल्म में प्रसिद्ध गढ़वाली कवियत्री उपासना सेमवाल हैं, जिन्हें उत्तराखंड का तीलू रौतेली जैसा उत्कृष्ट पुरस्कार दिया जा चुका है। वहीं बिपिन सेमवाल हैं जो समाज सेवा के कार्यों से कई सालों से जुटे हुए हैं। इसके अलावा नवीन सेमवाल, पूनम और योगिता जैसे युवा कलाकार हैं जिन्हें लेखन कार्य का अनुभव भले ही हो लेकिन एक्टिंग का बिल्कुल नहीं है।

शूटिंग के दौरान लॉकडाऊन के नियमों का किया गया पालन

ये भी ध्यान देने वाली बात है कि इस शॉर्ट फिल्म का निर्माण लॉकडाऊन के सभी नियमों का पालन करते हुए किया गया है। कम कास्ट और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान शूटिंग के दौरान रखा गया है। किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है। 4 से 5 किरदारों के जरिए ही महत्वपूर्ण संदेश देने की कोशिश की गई है।

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