Sharad Kelkar ने नहीं ली थी 'श्रीकांत' के लिए कोई फीस

राजकुमार राव, ज्योतिका, अलाया एफ और शरद केलकर की फिल्म श्रीकांत10 मई को थिएटर में रिलीज़ हुई थी जिसे दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया था. बता दें ये श्रीकांत बोल्ला की बायोपिक...

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Sharad Kelkar did not take any fees for the film Srikanth
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राजकुमार राव, ज्योतिका, अलाया एफ और शरद केलकर की फिल्म श्रीकांत10 मई को थिएटर में रिलीज़ हुई थी जिसे दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया था. बता दें ये श्रीकांत बोल्ला की बायोपिक फिल्म हैं जिसमें राजकुमार ने श्रीकांत का किरदार निभाया है. बता दें फिल्म के निर्देशन तुषार हीरानंदानी ने किया था और उनकी पत्नी निधि हीरानंदानी फिल्म की प्रोड्यूसर हैं. आइये बताते हैं इस फिल्म के बारे में और आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में क्या कहते हैं तुषार और निधि.

आपकी फिल्म श्रीकांत को बहुत सारा प्यार मिला, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रही. आप दोनों के लिए ये सक्सेस किस तरह से रहा?

तुषार- मै तो बहुत ज्यादा खुश हूँ. फिल्म के बाद मुझे मेरे फेवरेट डायरेक्टर राजू सर और सूरज सर के मैसेजेज आयें, और मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है. मुझे ऑडियंस, मेरी फैमिली और फ्रेंड्स के जिस तरह के मैसेजेज आयें हैं मुझे ये लगा कि मैंने अच्छी पिक्चर बनाई है. मुझे ख़ुशी है कि मैंने एक अच्छी पिक्चर बनाई है. मुझे लगता है अब मै उस तरह की पिक्चर बना सकता हूँ जिस तरह की पिक्चर मै बनाना चाहता हूँ.

निधि- बहुत अच्छा लगता है जब आपकी फिल्म को इतना प्यार मिलता है और फिल्म ने अच्छा पैसा भी कमाया है लेकिन अब जिम्मेदारियां भी बहुत बढ़ी हैं कि अब हमें आगे भी इसी लेवल की फ़िल्में बनानी हैं. सक्सेस एंजॉय करने से लेकर मेरा फोकस अब ज्यादा मेहनत करने पर शिफ्ट हो गया है.

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आपके इस हिसाब से इस फिल्म की ऐसी क्या खास बात थी जो ऑडियंस के दिल को हिट कर गयी होगी?

निधि- मुझे लगता है ऑडियंस को जो चीज पसंद आई है वो है जिस ईमानदारी से इस स्टोरी को बनाया गया है और दूसरा ये कि हमने श्रीकांत को वाइट वाश नहीं किया है. हमने उसके ग्रे और वाइट दोनों चेहरे दिखाए हैं. हमने उसको एक इन्सान के तौर पर हीं फिल्म में दिखाया है हमने उसको कोई भगवान के जैसा नहीं दिखाया है.

तुषार- हमने एक इन्सान की डिसएबिलिटी को बेचारा नहीं दिखाया है. मुझे लगता है लोगों को यही बात अच्छी लगी कि हमने उसको बेचारा नहीं दिखाया है वो खुद के बल-बूते पर लड़ता और जीतता है. हमने कभी ये सोच कर पिक्चर नहीं बनाई कि मुझे कोई सैड पिक्चर बनाना है. मुझे कभी भी कोई सैड पिक्चर नहीं बनानी थी. मैंने राज को कहा भी था कि आज के बाद जब भी कोई इन्सान किसी डिसएबिलिटी पर पर पिक्चर बनाएगा तो श्रीकांत को रेफेरेंस के तौर पर देखेगा. हमने ये चीज सोचा था कि हमें कुछ नया करना है. मुझे लगता है हमने दृष्टिहीन लोगों के लिए श्रीकांत को सुपर हीरो बना कर पेश किया है और इसलिए ये फिल्म उनके लिए एक सुपर हीरो फिल्म के जैसी है. मै एक ऐसी माँ से मिला जिनके दोनों बच्चे दृष्टिहीन हैं. उन्होंने बताया कि उनके रिश्तेदार उनको दोनों बच्चों के साथ बहुत रोक-टोक करते थे. जब श्रीकांत फिल्म आई तब वो सभी को ये फिल्म दिखाने लेकर गयीं और अब कोई भी उनके बच्चों को जो उनके मन में आये उसे करने से नहीं रोकता है. मुझे ये सुनकर बहुत अच्छा लगा कि हमने कुछ अच्छा काम किया है.

निधि- हम जितने भी दृष्टिहीन लोगों से मिल रहे हैं उन सभी का यही कहना था कि फिल्म में हमने वही दिखाया है जैसे वो हैं. हम भी भगवान के बहुत शुक्रगुज़ार हैं कि हमने ऐसी फिल्म बनाई जिसने लोगों के दिलों को छुआ.

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जब आपने इस टॉपिक पर फिल्म बनाने का सोचा था तब आपने सोचा था कि आप इसमें उनका एक ग्रे शेड भी दिखायेंगे?

तुषार- इसका क्रेडिट हमारे दुसरे राइटर राज और सुमित को जाता है. पहले इस पिक्चर को मैंने और जगदीप ने लिखी थी. ये राज का हीं आईडिया था कि इसको थोड़ा ग्रे दिखाते हैं और फिर हम सभी ने मिलकर इस पिक्चर को लिखा है. इस बात का क्रेडिट श्रीकांत को भी जाता है जो इस ग्रे शेड के आईडिया से अग्री कर गएँ क्योंकि ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो इस तरह के आईडिया से अग्री करते हैं. ये श्रीकांत की सबसे अच्छी क्वालिटी है कि उनको अपने किरदार को बड़े पर्दे पर थोड़ा ग्रे दिखाने में भी कोई दिक्कत नहीं है. सच कहूँ तो हमें भी इस बात का डर था कि ऑडियंस इस चीज को अपनाएगी या नहीं. हम दोनों को कुछ नया करना था और इसलिए हमने ये किया और हम इससे बहुत खुश हैं.

आप पति-पत्नी हैं तो जब आप साथ में प्रोफेशनली काम करते हैं तो ये आपके लिए कम्फ़र्टेबल या चैलेंजिंग होता है?

निधि- हमें थोड़ा समय लगा हमारी रिद्म बिठाने में लेकिन श्रीकांत में काम करके हम दोनों हीं बहुत खुश हैं. जब हमने पहली पिक्चर की थी तब हमारी बाउंड्री सेट नहीं थी कि ये कितना प्रोडक्शन में इंटरफेयर कर सकते हैं या मै कितना डायरेक्शन में इंटरफेयर कर सकती हूँ. चूंकि हमारी बाउंड्री सेट नहीं थी हम बहुत झगड़ा किया करते थे. हमारी पहली फिल्म ‘सांड की आँख’ में अनुराग कश्यप हमारे को-प्रोड्यूसर थे, उन्होंने हमें ये मंत्र दिया था कि जब शूटिंग हो रही है तब आप दोनों एक कमरे में मत रहा कीजिये क्योंकि आप उसी प्रॉब्लम को लेकर घर जाते हैं और फिर अगले दिन आप उसी प्रॉब्लम को दिमाग में लेकर सेट पर आते हैं. इसलिए मै अनुराग को शुक्रिया अदा भी करना चाहती हूँ कि उन्होंने हमारी शादी बचा ली (मजाकिया अंदाज़). उसके बाद हमने इस रूल को फॉलो किया जिससे चीजें और भी बेहतर हो गयीं. इतने समय से एक साथ काम करके ये भी समझ आ गया है कि हमें कहाँ एक दुसरे के काम में दखल नहीं देना है.

तुषार- फिल्म श्रीकांत में निधि की टीम ने बहुत अच्छा काम किया है. उन्होंने सभी को बहुत अच्छे से हैंडल किया था. आप किसी से भी कोई भी शिकायत नहीं सुनेंगे फिर चाहे वो स्पॉट बॉय हो या एक्टर. हमारे सेट पर स्पॉट बॉय भी वही खाना खा रहा था जो डायरेक्टर खा रहा था. निधि की टीम ने सभी को इक्वली ट्रीट किया था. इनकी प्रोडक्शन सभी चीजों को इतने अच्छे से हैंडल किया कि जो पिक्चर 69 दिन में बनने वाली थी उसे हमने मात्र 42 दिनों में बना दिया.

निधि- फिल्म को इतने कम दिनों में खत्म करने का क्रेडिट सभी को जाता है. सभी ने बहुत बेहतरीन काम किया.

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फिल्म की कास्ट के बारे में क्या कहना चाहेंगे?

निधि- हम लक्की रहे हैं इस मामले में, हमें हर फिल्म में बहुत हीं बढ़िया कलाकार मिले हैं. ज्योतिका और राज दोनों हीं किसी अलग ढांचे के बने हुए कलाकार हैं. वो कलाकार तो बढ़िया हैं हीं और साथ हीं साथ इन्सान बहुत बढ़िया है, उन्होंने बिल्कुल एक परिवार की तरह हमारे साथ काम किया. शरद, अलाया, राज और ज्योतिका ने मिलजुल कर बहुत हीं कमाल का काम किया है. हम बहुत खुशकिस्मत हैं कि वो हमारी टीम का हिस्सा थे.

तुषार- फिल्म में बहुत हीं अच्छे लोग हैं, जैसे शरद, भरत यादव, और विवेक मिश्रा ने इस फिल्म के लिए पैसे नहीं लिए. जमील ने बिना पैसों के हीं गेस्ट अपिअरेंस दिया. इस फिल्म के लिए बहुत सारे लोगों ने मदद की क्योंकि उन्हें इसकी कहानी बहुत अच्छी लगी थी. ये सभी सीनियर लोग हैं और उन्हें पता था कि इस फिल्म का कॉन्सेप्ट कुछ नया है और वो बस इस फिल्म का हिस्सा बनाना चाहते थे. बहुत हीं अच्छा लगता है जब सभी खुश होते हैं.

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अपने आनेवाले प्रोजेक्ट्स के बारे में कुछ बताना चाहेंगे?

तुषार- अभी तो बहुत कुछ है लेकिन अभी के लिए हम कुछ समय रिलैक्स करने के लिए एक महीने के लिए हम फैमिली हॉलिडे पर जा रहे हैं. भूषण जी और निधि डिसाइड करेंगे की अब आगे मुझे क्या करना है. बहुत कुछ है पाइपलाइन में लेकिन अभी नेक्स्ट क्या होगा ये इनका फैसला होगा.

निधि- अभी दो और बायोपिक हैं लेकिन अभी हमने ये डिसाइड नहीं किया है कि  तुषार क्या डायरेक्ट करेंगे पहले. अभी कुछ स्क्रिप्ट डेवलप्ड हैं तो जब ये छुट्टी से वापस आयेंगे तो इनका क्रिएटिवली क्या करने का मन कर रहा है उसके हिसाब से ये डिसाइड करेंगे. हम हमारी प्रोडक्शन कंपनी चॉक एंड चीज से दो डायरेक्टर्स लॉन्च कर रहे हैं. एक मराठी फिल्म है जो एक बायोपिक है. ये हमारी पहली मराठी फिल्म है.

तुषार- दो मराठी पिक्चर हमलोग कर रहे हैं और एक हिंदी पिक्चर है और वो भी बेस्ड ऑन ट्रू इंसिडेंट हीं है. ये दोनों अच्छी पिक्चर हैं और हमें इसी तरह की पिक्चर करनी है इसलिए हम कर रहे हैं. बायोपिक करने में मुझे बहुत मज़ा आता है.

निधि- हमने आज तक जो भी बायोपिक की हैं उसमें ससे कोई भी फेमस पर्सनालिटी नहीं हैं. हम उन हीरोज की बायोपिक करते हैं जिनके बारे में लोगों ने नहीं सुना है.

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क्या बॉलीवुड में ऐसा कोई है जिसके साथ आप काम करना चाहेंगे?

निधि- ऐसा तो कुछ नहीं है लेकिन तापसी, भूमि, और राज़ हैं इनके साथ हम हमेशा काम करते रहना चाहेंगे.

तुषार- अगर मुझे चूज करना है तो विजय सेतुपति, और सूर्या सर के साथ काम करना चाहूँगा क्योंकि ये दोनों मेरे फेवरेट एक्टर्स हैं.

मायापुरी के 50 साल हो चुके हैं, मायापुरी से जुड़ी कुछ यादों के बारे में शेयर करना चाहेंगे?

तुषार- मै भी 50 साल का होने वाला हूँ मायापुरी के साथ. मै जब भी सैलून जाता था तो वहां एक हीं मैगज़ीन हुआ करता था और वो था मायापुरी. मै बचपन से मायापुरी को देख रहा हूँ और एक्टर्स के जो बब्बल में डायलॉग आते थे और आज भी आते हैं और वो मुझे बहुत पसंद हैं. मेरी बहुत सारी यादें इस मैगज़ीन से जुड़ी हुईं हैं. मुझे लगता है मायापुरी पैन इंडिया है और मुझे पैन इंडिया के बारे में जानना बहुत अच्छा लगता है और इसलिए मुझे मायापुरी बहुत पसंद है.

अपने फैंस के लिए क्या कहना चाहेंगे?

निधि- दिल से बहुत बहुत धन्यवाद कि आपको हमारी फिल्म्स पसंद आती हैं. कोशिश कीजिये कि इन छोटी पिक्चर्स को बढ़ावा देने के लिए आप इसे थिएटर में जाकर देखें और ओटीटी का इंतज़ार नहीं करें और इससे हमें आगे भी फ़िल्में फाइनेंस करने के लिए मिलेगा. 

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