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रियलिटी शो ‘द 50’ (The 50) इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. शो से बाहर होने के बाद कंटेस्टेंट सुमैरा शेख (Sumaira Shaikh) ने पहली बार अपने एविक्शन, शो के फॉर्मेट, ग्रुपिज़्म, इंटरनेट बनाम टीवी सेलेब्रिटीज़ की बहस और कंटेस्टेंट्स के असली चेहरे पर खुलकर बात की. इस इंटरव्यू में सुमैरा ने न सिर्फ अपने अनुभव शेयर किए, बल्कि दिग्विजय राठी (Digvijay Rathee) और रजत दलाल (Rajat Dalal) की लड़ाई, एल्विश यादव (Elvish Yadav) के नाम पर हुए कंटेंट और शो की अनफेयरनेस पर भी बेबाक राय रखी. आइये जानते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा...
‘द 50’ आपका पहला रियलिटी शो था. अनुभव कैसा रहा?
यह मेरे लिए बहुत मुश्किल था. मैंने पहली बार रियलिटी शो किया और मुझे सच में नहीं पता था कि ये सब कैसे चलता है. अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलना, अजनबियों के साथ रहना और लोगों से कट जाना—ये सब मानसिक रूप से बहुत थका देने वाला था. बाहर बैठकर हम सोचते हैं कि लोग इतनी देर तक बिना किसी मुद्दे के कैसे लड़ सकते हैं, लेकिन अंदर जाकर समझ आया कि ये भी एक आर्ट है. 15–20 मिनट तक लड़ना और दर्शकों को एंटरटेन करना आसान नहीं होता.
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50 लोगों का कॉन्सेप्ट आपको क्या लगा?
शुरुआत में मुझे लगा कि 50 लोग हैं तो मुझे टाइम मिलेगा, मैं धीरे-धीरे कंफर्टेबल हो जाऊँगी.
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. शो बहुत फास्ट था. लोग बहुत जल्दी बाहर हो रहे थे. हम सब सोचते हैं कि कोई न कोई हमसे ज़्यादा कमजोर होगा, लेकिन जैसे ही मैं गई, मैं ही बाहर हो गई.
बड़े नाम और नए कंटेस्टेंट्स में क्या फर्क महसूस हुआ?
बड़े नाम अपने कम्फर्ट ज़ोन में होते हैं क्योंकि उनके साथ उनका पूरा ग्रुप और सपोर्ट सिस्टम होता है. हम जैसे सिंगल प्लेयर्स हर वक्त एंग्ज़ायटी में रहते हैं कि अब कब बाहर हो जाएँगे. लेकिन मुझे लगता है कि अंत में उन्हीं बड़े ग्रुप्स के लिए मुश्किल होगी, क्योंकि आखिर में उन्हें आपस में ही लड़ना पड़ेगा. तब असली रंग सामने आएँगे.
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कम समय में भी आपको काफी सपोर्ट मिला. इस पर क्या कहेंगी?
मेरी स्टैंड-अप ऑडियंस मुझे इंटरनेट पर देखती है, लेकिन टीवी की ऑडियंस बहुत बड़ी होती है. टीवी इसलिए किया जाता है ताकि उस बड़े ऑडियंस बेस तक पहुँचा जा सके. लेकिन टीवी पर फैनबेस बनाना आसान नहीं है. अगर किसी के टीवी फैंस हैं, तो इसका मतलब है कि उसने बहुत मेहनत की है.
एल्विश यादव (Elvish Yadav) के नाम पर जो कंटेंट चला, उस पर आपकी राय?
एल्विश यादव कोई छोटा नाम नहीं हैं. उन्होंने इंटरनेट पर बहुत मेहनत की है, उनके फैंस हैं और उनके दोस्त शो में हैं. जब दोस्त अंदर होते हैं और दुश्मनी बनती है, तो नाम आएगा ही. लवकेश कटारिया (Lovekesh Kataria) जैसे उनके दोस्तों के फैंस ये सब देखना चाहते हैं. यह उनके ऑडियंस के लिए एंटरटेनिंग है.
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कपल्स बनाम सोलो प्लेयर्स—क्या यह अनफेयर है?
शुरुआत में यह बहुत अनफेयर लगता है. लेकिन अंत में वही कपल्स एक-दूसरे को नॉमिनेट करेंगे, क्योंकि जीत तो एक ही सकता है. तब उन्हें समझ आएगा कि यह कितना मुश्किल होता है. मैं बस उस दिन का इंतज़ार कर रही हूँ जब ये ग्रुप्स आपस में लड़ेंगे.
इंटरनेट क्रिएटर्स को लेकर दिए गए बयान पर आपका रिएक्शन?
मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया. किसी ने टीवी चुना, किसी ने इंटरनेट. इंटरनेट क्रिएटर्स के पास न कोई गॉडफादर होता है, न किसी का सपोर्ट. उन्होंने खुद को ज़ीरो से बनाया है. आप किसी के काम को छोटा नहीं कह सकते. सम्मान सबसे ज़रूरी है.
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दिग्विजय राठी (Digvijay Rathee) और रजत दलाल (Rajat Dalal) की लड़ाई पर आपकी राय?
मुझे यह सब काफी रियल लगा. उनका रिश्ता Joker–Batman जैसा है—लव-हेट. वो एक-दूसरे के बिना रह भी नहीं सकते और लड़ते भी हैं. यह ऑडियंस के लिए एंटरटेनिंग है और मुझे नहीं लगा कि वे एक्टिंग कर रहे थे.
रजत दलाल (Rajat Dalal) के लीडरशिप पर क्या कहेंगी?
वो एक लीडर हैं, लेकिन जबरदस्ती नहीं करते. हर गैंग की लीडरशिप अलग होती है. मुझे उनकी लीडरशिप इसलिए पसंद आई क्योंकि उसमें फ्लेक्सिबिलिटी थी.
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सबसे ज़्यादा एंटरटेनिंग कौन लगा?
निक्की तंबोली (Nikki Tamboli) और अर्चना गौतम (Archana Gautam). अर्चना लड़ते हुए भी फनी होती हैं. वो सीरियस लड़ाई में भी हंसी ले आती हैं.
बाहर आने के बाद आपने किससे बात की?
मैंने वंशज (Vanshaj) से बात की और कहा कि यह बहुत अनफेयर था. मैंने मुनव्वर फारूकी (Munawar Faruqui) और प्रणित मोरे (Pranit More) को मैसेज किया—हैट्स ऑफ. रियलिटी शो करना बहुत मुश्किल है, खासकर इंट्रोवर्ट्स के लिए.
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आपकी टॉप-3 चॉइस क्या हैं?
सपना चौधरी (Sapna Choudhary), मनीषा रानी (Manisha Rani) और दिग्विजय राठी (Digvijay Rathee). मुझे सोलो प्लेयर्स पसंद हैं. वहीं असली मज़ा है.
क्या आप खतरों के खिलाड़ी (Khatron Ke Khiladi) करेंगी?
अगर ऑफर आया भी, तो मैं मना कर दूँगी. वो बहुत मुश्किल शो है और मेरे लिए नहीं है.
The 50 reality show | Contestant eviction not present in content
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