मूवी रिव्यू: बेदम हुई ‘दबंग 3’

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रेटिंग**

वो कहते हैं न कि जिसका काम उसकी को साजे, दूसरा करे तो……? ये कहावत प्रभूदेवा निर्देशित फिल्म ‘ दबंग 3’ पर पूरी तरह से आयत होती है ।दरअसल फिल्म की कहानी इस बार सलमान ने लिखी है,जंहा सलमान ने सब कुछ दिखाने के चक्कर में पूरी कहानी घिचपिच करके रख दी । लिहाजा दर्शक शुरू से अंत तक फिल्म में कुछ ऐसा देखने के लिये बैठा रहता हैं जिसे देखने के लिये वो मंहगा टिकट( लगभग दुगने दाम) लेकर आया था, लेकिन बाद में उसके हाथ सिर्फ मायूसी ही लगती है।

कहानी

चुलबुल पांडे (सलमान खान) अब एस पी बनकर एक नई जगह आता है और आते ही अपने चिरपरिचित अंदाज में एक शादी से लूटे हुये गहने बदमाशों से वापस लेता है। इस चक्कर में उसका सामना एक ऐसे माफिया सरगना बाली (सुदीप किच्चा) से होता है, जिसे देखते ही चुलबुल का अतीत उसके सामने आ जाता है लिहाजा उसके बाली द्धारा दिये गये घाव एक बार फिर हरे हो जाते हैं। दरअसल अपनी शुरूआती जवानी के दौर में चुलबुल धाकड़ के नाम से जाना जाता था, उन्हीं दिनों उसे एक लड़की खुशी (सई मांजरेकर) से प्यार हो जाता है। बाद में सलमान खुषी को डॉक्टर बनाने का बीड़ा उठाता है। खुशी ही धाकड़ को चुलबुल नाम देती है। उसी दौरान खुषी पर बाली जैसे र्दुदांत अपराधी की नजर पड़ जाती है और वो उसे देखते ही अपनी बनाने को फैसला कर लेता है। लेकिन जब उसे पता चलता है कि खुशी चुलबुल से प्यार करती है तो वो चुलबुल के सामने खुशी और उसके पेरेन्ट्स को मार देता है और इल्जाम चुलबुल पर लगा देता है। कोर्ट से बरी हो सलमान पुलिस में भर्ती हो जाता हैं और ट्रेनिंग कंपलीट करने के बाद सबसे पहले बाली का सफाया करता है। अब एक अरसे बाद एक बार फिर उसका बाली जैसे खूंखार अपराधी से सामना होता है तो उसके सामने फर्ज और परिवार की सलामती दोनों की जिम्मेदारी आ जाती है। जिसे वो हमेशा की तरह पूरी शिद्दत और ईमानदारी से निभाता है।

अवलोकन

दरअसल सलमान की डिमांड पर प्रभूदेवा ने दो घंटे में ही सब कुछ दिखाने के चक्कर में चुलबुल पांडे को घुलमिल पांडे बना दिया। सलमान की लार्जर दैन लाइफ इमेज को और गहरा बनाने के चक्कर में उसके अतीत और वर्तमान को कुछ इस तरह मिलाने की कोशिश की, जिसमें साफ साफ दिखाई देता है कि वो सब लगभग जबरदस्ती किया जा रहा है ।फिल्म में जब भी कुछ नया दिखाने की कोशिश की गई कहानी पटरी से उतर जाती है। ऐसा लगता है कि सब कुछ बहुत जल्दी दिखाने की जल्दी है। पहले भाग में चुलबुल का अतीत, जहां एक नई तारिका का आगमन होता है। दूसरे भाग में चुलबुल अपने चिरपरिचित परिवार के साथ दिखाई देता है और वो अपने दुश्मन बाली से अपने परिवार और अपने फर्ज की रक्षा करते हुये गाते नाचते दो दो हाथ करता दिखाई देता है। कहानी जो सलमान ने लिखी हैं फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष साबित हुई है इस प्रकार साधारण पटकथा और सुने सुनाये संवाद फिल्म को बोझिल बनाये रखते हैं। संगीत की बात की जाये तो बेशक मुन्ना बदनाम हुआ दसवें पायदान पर है, लेकिन सभी गीत,  पहली दबंग एक के संगीत की छाया के नीचे दबे हुये हैं।

अभिनय

अभिनय की बात की जाये तो सलमान इस बार कुछ भी नया नहीं दिखा पाये सिवाये अपने चिरपरिचित अंदाज के। हां उनका एक्शन दर्शनीय कहा जा सकता है। सई मांजरेकर बेहद मासूम है लेकिन उसके डेब्यू को दमदार नहीं कहा जा सकता। सोनाक्षी सिन्हा अपने पहले वाले अंदाज में पहले की तरह बहुत खुबसूरत लगी है। अरबाज खान कुछ नया करते हुये भी साधारण ही लगते हैं। साउथ के स्टार सुदीप किच्चा खलनायकी में पूरे नबंरो से इसलिये पास करार दिये जाते हैं क्योंकि भूमिका में कुछ न होते हुये भी उन्होंने अपने अभिनय से उसे खास बना दिया। मरहूम विनोद खन्ना की कमी को उनके भाई लगभग पूरी करते नजर आते हैं। बाकी छोटे रोल्स में डिंपल कापड़िया, नवाब षाह तथा आइटम सांग में वरीना हुसॅन ठीक ठाक काम कर गये।

क्यों देखें

हालांकि इस फिल्म को दबंग की जगह बेदम कहना ज्यादा उचित होगा, बावजूद इसके सलमान के प्रशंसक टिकटों के लगभग दुगने दाम देकर भी फिल्म देख सकते हैं।

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