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Shahrukh Khan के अनुसार, "प्यार का पहला रंग जब चढ़ता है, तो वो कभी नहीं उतरता।"

शाहरुख खान ने अपने बचपन की दिल्ली की होली को याद करते हुए बताया कि उस समय त्योहार पूरी तरह मस्ती, हुड़दंग और बेफिक्र खुशियों से भरा होता था। उन्होंने कहा कि वे दोस्तों के साथ रंग भरे मच्छर छतों से फेंकते थे

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शाहरुख खान की होली की बातें जब निकलती हैं, तो उसमें दिल्ली की वो पुरानी गलियां और बचपन की बेफिक्री साफ झलकती है। उन्होंने कहा था, "दिल्ली में होली त्योहार मनाने के लिए हम लोग बस दीवाने हो जाते थे।"

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शाहरुख खान असल जिंदगी में बहुत हाजिरजवाब और जिंदादिल इंसान हैं, उनकी होली भी वैसी ही 'क्रेजी' और रंगीन रही है। शाहरुख कहते हैं कि "दिल्ली की होली का मजा ही कुछ और था, वहां हम लोग गुब्बारों में रंग भरकर छतों से फेंका करते थे और फिर भाग जाते थे।" (Shah Rukh Khan Holi memories Delhi)

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शाहरूख ने बताया "दिल्ली में होली के दिन हम लोग एक-दूसरे के घर में जाकर बिना इजाजत गुजिया और पकौड़े खा जाते थे। कोई ये नहीं पूछता था कि आप किसके घर से आए हो, बस मुंह पर रंग लगाओ और प्लेट उठा लो।" वे कहते हैं, "होली पर जब तक हुड़दंग न हो और कपड़े न फटें, तब तक लगता ही नहीं कि त्यौहार मनाया है। सच, दिल्ली की उन गलियों में जो चिल्लाने की आजादी थी, वो आज कहाँ? "
शाहरुख अक्सर याद करते हैं कि उनके पिता ताज मोहम्मद खान उन्हें त्योहारों की अहमियत सिखाते थे। 

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एक और दिलचस्प बात जो वे अक्सर बताते हैं, वो है होली के बाद का 'नहाने का डर'। शाहरुख कहते हैं कि दिल्ली की होली में रंग इतने पक्के होते थे कि वो हफ्तों तक नहीं छूटते थे। 

जब वे अपने दोस्तों के साथ होली मनाने साइकिल पर निकल पड़ते थे। वे बताते हैं "हम लोग पूरी दोपहर रंगों में सराबोर रहते थे और शाम को जब रंग छुड़ाने की बारी आती थी, तो नानी की दी हुई मलाई और बेसन का उबटन ही काम आता था। वे हम बच्चों को इसी बेसन मलाई से रगड़ कर रंग उतारती थी। शाहरुख कहते हैं कि उस वक्त तो बहुत चिड़ होती थी, लेकिन आज मन्नत के आलीशान बाथरूम में भी वो मलाई वाली खुशबू नहीं है। तब नानी का प्यार बहुत याद आता है।"

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जब शाहरुख मुंबई आए और 'मन्नत' के मालिक बने तो मन्नत (शाहरुख का बंगला) रिनोवेट करने के बाद  वहां आयोजित होली पार्टियां चर्चा का विषय बन गईं। शाहरुख बताते हैं कि "मन्नत के लॉन में हम एक बहुत बड़ा हौद (पानी का कुंड) बनवाते थे। उसमें ढेर सारा रंग और पानी भरा होता था। मेरा काम सिर्फ ये होता था कि जो भी दोस्त आए, उसे चुपके से पीछे से पकड़ना और सीधा रंग के उस कुंड में डाल देना।" वहां मौजूद हर शख्स को शाहरुख खुद अपने हाथों से रंग लगाते रहें हैं । वे कहते हैं कि "होली पर जब तक हुड़दंग न हो, तब तक लगता ही नहीं कि त्यौहार मनाया है।" (SRK Delhi Holi celebration nostalgia)

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अमिताभ बच्चन जी के साथ अपनी बॉन्डिंग पर शाहरुख कहते हैं कि "अमित जी के घर की होली से मैंने बहुत कुछ सीखा है। वहां जो गरिमा और प्यार दिखता है, वो बेमिसाल है। मुझे याद है जब हम 'मोहब्बतें' की शूटिंग कर रहे थे, तब होली का माहौल एकदम अलग ही था।" (Shah Rukh Khan interview Holi celebration)

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एक और यादगार होली उनकी ऐसी थी। ये तब की बात है जब दोनों के प्यार की शुरुआत हुई थी। शाहरुख बताते हैं कि "एक बार होली के दिन मैं गौरी के घर के बाहर घंटों खड़ा था, सिर्फ इस उम्मीद में कि वो बाहर आए और मैं उसे रंग लगा सकूँ। और मैंने रंग लगाया।" उस दिन की वो पहली रोमांटिक होली शाहरुख के दिल के बहुत करीब है। वे कहते हैं कि "प्यार का पहला रंग जब चढ़ता है, तो वो कभी नहीं उतरता।"

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फिल्मों की बात करें तो फिल्म 'डर' का वो सीन सबको याद है जब शाहरुख का किरदार, अपना चेहरा रंगकर जूही चावला के पास पहुंचता है। शाहरुख हंसते हुए कहते हैं कि "'डर' की वो होली डरावनी थी, लेकिन असल जिंदगी में मेरी होली सिर्फ प्यार और हंसी-मजाक वाली होती है।"

Darr (1993) - IMDb
शाहरुख का मानना है कि होली का त्यौहार एक बड़ा संदेश देता है। वे कहते हैं कि "जब चेहरे पर रंग लग जाता है, तो कोई नहीं पहचान सकता कि कौन क्या है। रंग सबको एक जैसा बना देता है।" शाहरुख के लिए यही होली की सबसे बड़ी खूबसूरती है।

आजकल शाहरुख अपनी होली बहुत सादगी से मनाते हैं। वे बताते हैं कि "अब अबराम के साथ होली खेलना सबसे ज्यादा खुशी देता है। उसके छोटे-छोटे हाथों से जब गुलाल मेरे गालों पर लगता है, तो लगता है कि मेरा त्यौहार पूरा हो गया।"  शाहरूख अब पानी बर्बाद करने के सख्त खिलाफ हैं। शाहरुख की सलाह है कि "होली खेलो, लेकिन शालीनता से। किसी की मर्जी के बिना उस पर रंग डालना ठीक नहीं है।"

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शाहरुख के हिसाब से होली मनाने का सबसे सही तरीका क्या है? इस पर वे बड़े ही दार्शनिक अंदाज में कहते हैं कि "होली पर अपने दिल के अंदर की कड़वाहट को रंगों के साथ धो डालिए। अगर आप किसी से नाराज हैं, तो जाइए और उसे गुलाल लगा दीजिए, देखिएगा सारी आपसी दूरियां खत्म हो जाएंगी।"
उनका मानना है कि असली रंग वो है जो रूह को रंग दें । वे अक्सर कहते हैं कि "जिंदगी भी एक सफेद कैनवास की तरह है, इसमें खुशियों के जितने रंग भरोगे, ये उतनी ही खूबसूरत दिखेगी।"

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शाहरुख का मानना है कि होली का त्यौहार हमें माफ करना सिखाता है। वे बड़े ही दार्शनिक अंदाज में कहते हैं कि " होली वो मौका है जब आप नाराजगी को खुशियों के रंगों से धो सकते हैं। 

FAQ

Q1. शाहरुख खान ने अपनी होली की यादों में क्या बताया?

Shah Rukh Khan ने बताया कि बचपन में Delhi में उनकी होली मस्ती, रंगों और दोस्तों के साथ शरारतों से भरी होती थी।

Q2. दिल्ली में शाहरुख खान होली कैसे मनाते थे?

वे रंग भरे गुब्बारे छतों से फेंकते थे, दोस्तों के साथ हुड़दंग करते थे और बिना झिझक लोगों के घरों में जाकर मिठाइयां खाते थे।

Q3. शाहरुख खान के अनुसार होली का असली मजा क्या है?

उनके अनुसार होली का असली मजा तभी है जब खुलकर मस्ती हो, शोर-शराबा हो और पूरी आजादी के साथ त्योहार मनाया जाए।

Q4. उनके पिता का उनकी होली की यादों में क्या योगदान रहा?

उनके पिता Taj Mohammed Khan ने उन्हें त्योहारों की अहमियत और उनके महत्व को समझाया।

Q5. क्या आज भी शाहरुख खान उन दिनों को याद करते हैं?

हाँ, वह अक्सर दिल्ली की पुरानी गलियों और बचपन की होली की बेफिक्र यादों को याद करते हैं।

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