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बॉलीवुड सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की भावनाओं, विचारों और राष्ट्रीय चेतना का सशक्त आईना भी है. समय- समय पर हिंदी सिनेमा ने देशभक्ति को अपनी कहानियों, गीतों और किरदारों के जरिए इतनी गहराई से दर्शाया है कि वह सीधे दर्शकों के दिल तक पहुंची है. यही वजह है कि जब भी देश, तिरंगा और जवानों की बात आती है, तो बॉलीवुड का देशभक्ति प्रेम साफ झलकता है. आइये इस गणतंत्र दिवस पर कुछ बेहतरीन देशभक्ति फिल्मों के बारे में जानते हैं....
हकीकत (Haqeeqat, 1964)
भारत–चीन युद्ध (1962) पर आधारित इस फिल्म में 120 भारतीय सैनिकों की वीरता दिखाई गई है. धर्मेंद्र के दमदार अभिनय ने इसे यादगार बनाया.
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शहीद (Shaheed, 1965)
मनोज कुमार ने इस फिल्म में शहीद भगत सिंह का किरदार निभाया. यह भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली देशभक्ति बायोपिक्स में गिनी जाती है.
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उपकार (Upkar, 1967)
मनोज कुमार की इस फिल्म ने ‘जय जवान, जय किसान’ के नारे को अमर कर दिया. निर्देशन और अभिनय दोनों के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला.
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सात हिंदुस्तानी (Saat Hindustani, 1969)
अमिताभ बच्चन की डेब्यू फिल्म, जिसमें गोवा की आज़ादी की कहानी दिखाई गई. युवाओं के जोश और देशप्रेम को दर्शाती फिल्म.
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पूरब और पश्चिम (Purab Aur Paschim, 1970)
भारतीय संस्कृति और पश्चिमी सभ्यता के अंतर को दिखाती यह फिल्म आज भी प्रासंगिक है. गीत ‘है प्रीत जहां की रीत सदा’ अमर हो गया.
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हिंदुस्तान की कसम (Hindustan Ki Kasam, 1973)
1971 भारत–पाक युद्ध पर आधारित यह वॉर फिल्म राज कुमार के सशक्त अभिनय के लिए जानी जाती है.
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क्रांति (Kranti, 1981)
स्वतंत्रता संग्राम पर बनी इस फिल्म में दिलीप कुमार और मनोज कुमार समेत कई दिग्गज कलाकार नजर आए. यह दशक की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में रही.
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पुकार (Pukaar, 1983)
अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित स्टारर यह फिल्म गोवा मुक्ति संग्राम और क्रांतिकारियों की कहानी कहती है.
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प्रहार (Prahaar, 1991)
नाना पाटेकर द्वारा निर्देशित और अभिनीत यह फिल्म सेना और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष को दर्शाती है.
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तिरंगा (Tiranga, 1993)
राज कुमार और नाना पाटेकर की यह फिल्म देशभक्ति और दमदार डायलॉग्स के लिए मशहूर है.
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बॉर्डर (Border, 1997)
जेपी दत्ता की इस क्लासिक वॉर फिल्म ने 1971 के युद्ध की वीरता को अमर कर दिया. सनी देओल का किरदार आज भी याद किया जाता है.
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लगान: वन्स अपॉन अ टाइम इन इंडिया (Lagaan, 2001)
आमिर खान स्टारर इस फिल्म में अंग्रेजों के खिलाफ क्रिकेट को हथियार बनाया गया. यह फिल्म देशभक्ति को नए अंदाज़ में पेश करती है.
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द लेजेंड ऑफ भगत सिंह (2002)
अजय देवगन ने भगत सिंह का शक्तिशाली किरदार निभाया. फिल्म को आलोचकों और दर्शकों दोनों की सराहना मिली.
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लक्ष्य (Lakshya, 2004)
ऋतिक रोशन की यह फिल्म आत्म-खोज और सेना के अनुशासन की कहानी है. उनका ट्रांसफॉर्मेशन फिल्म की जान है.
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स्वदेस (Swades, 2004)
शाहरुख खान की यह फिल्म जड़ों से जुड़ने और देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देती है.
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रंग दे बसंती (Rang De Basanti, 2006)
आमिर खान स्टारर युवाओं में देशभक्ति की नई चिंगारी जगाने वाली यह फिल्म आज भी उतनी ही प्रभावशाली है.
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चक दे इंडिया (Chak De India, 2007)
शाहरुख खान की यह स्पोर्ट्स ड्रामा महिला हॉकी टीम की जीत और आत्मसम्मान की कहानी है.
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राज़ी (Raazi, 2018)
आलिया भट्ट की यह फिल्म एक महिला रॉ एजेंट की देशभक्ति और बलिदान को दर्शाती है.
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उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक (Uri, 2019)
विक्की कौशल स्टारर यह फिल्म भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित है. डायलॉग ‘हाउज़ द जोश’ मशहूर हुआ.
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द गाजी अटैक (The Ghazi Attack)
भारत की पहली अंडरवॉटर वॉर फिल्म, जो 1971 के युद्ध में भारतीय नौसेना की बहादुरी दिखाती है.
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सरदार उधम (Sardar Udham)
विक्की कौशल ने शहीद उधम सिंह का गहन और भावुक किरदार निभाया. फिल्म इतिहास की एक सच्ची त्रासदी को दर्शाती है.
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केसरी (Kesari)
अक्षय कुमार स्टारर यह फिल्म सारागढ़ी की ऐतिहासिक लड़ाई पर आधारित है, जहां 21 सिख सैनिकों ने अद्भुत साहस दिखाया.
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शेरशाह (Shershaah, 2021)
सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कैप्टन विक्रम बत्रा की भूमिका निभाई. यह कारगिल युद्ध की सबसे भावनात्मक कहानियों में से एक है.
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मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी (Manikarnika)
कंगना रनौत ने रानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथा को मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी में दमदार अंदाज़ में पेश किया है.
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मिशन मंगल (Mission Mangal)
भारत के मंगलयान मिशन पर आधारित यह फिल्म वैज्ञानिकों की देशभक्ति और समर्पण को सलाम करती है.
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120 बहादुर (120 Bahadur)
1962 के रेजांग ला युद्ध पर आधारित इस फिल्म में फरहान अख्तर ने मेजर शैतान सिंह भाटी का किरदार निभाया, जो अदम्य साहस की मिसाल है.
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केसरी चैप्टर 2 (Kesari Chapter 2)
यह एक कोर्टरूम ड्रामा फिल्म है जो 2025 में आई थी, जिसमें अक्षय कुमार ने वकील सी. शंकरन नायर की भूमिका निभाई है, जो जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद ब्रिटिश सरकार के खिलाफ कोर्ट में लड़ाई लड़ते हैं. यह फिल्म जलियांवाला बाग नरसंहार की सच्चाई उजागर करने और जनरल डायर को जिम्मेदार ठहराने की कहानी है.
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इक्कीस और धुरंधर के बारे में
इक्कीस: इक्कीस’ (Ikkis) श्रीराम राघवन (Sriram Raghavan) के निर्देशन में बनी एक देशभक्ति फिल्म है, जिसमें अगस्त्य नंदा (Agastya Nanda) लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र (Dharmendra) उनके पिता के किरदार में नजर आएंगे. यह फिल्म 1971 के भारत–पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है.
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वहीं हाल ही में रिलीज हुई ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) आदित्य धर (Aditya Dhar) के निर्देशन में बनी 2025 की गुप्तचर एक्शन थ्रिलर है, जो भारत की R&AW के सीक्रेट ऑपरेशन्स और जियोपॉलिटिकल टेंशन से प्रेरित है. फिल्म में रणवीर सिंह (Ranveer Singh), अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna), आर. माधवन (R. Madhavan), अर्जुन रामपाल (Arjun Rampal) और संजय दत्त (Sanjay Dutt) अहम भूमिकाओं में हैं. जल्द ही इसका दूसरा पार्ट भी आने वाला है.
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महिला किरदारों में देशभक्ति
देशभक्ति सिर्फ पुरुष किरदारों तक सीमित नहीं रही. राजी (Raazi) में आलिया भट्ट (Alia Bhatt) ने एक महिला जासूस के रूप में देश के लिए बलिदान की भावना को दिखाया. नीरजा (Neerja) में सोनम कपूर (Sonam Kapoor) ने नीरजा भनोट की बहादुरी को पर्दे पर जीवंत किया. मैरी कॉम (Mary Kom) में प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) ने खेल और देशप्रेम का शानदार संगम दिखाया.
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अन्य देशभक्ति फ़िल्में
इन फिल्मों के अलावा ‘1971’ (1971) में भारतीय सैनिकों के साहस को दिखाया गया, जिसमें युद्ध की सच्ची झलक देखने को मिलती है. ‘खेलें हम जी जान से’ (Khelein Hum Jee Jaan Sey) में अभिषेक बच्चन (Abhishek Bachchan) और दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) ने आज़ादी के लिए लड़ने वाले युवाओं की कहानी को जीवंत किया. ‘जब तक है जान’ (Jab Tak Hai Jaan) में शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) एक आर्मी ऑफिसर के रूप में नजर आए. इसमें उन्हीं की फिल्म जवान और पठान का नाम भी शामिल है. ‘हॉलीडे’ (Holiday) में अक्षय कुमार (Akshay Kumar) ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ते सैनिक का दमदार किरदार निभाया. ‘आर्टिकल 15’ (Article 15) में आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) सामाजिक अन्याय के खिलाफ खड़े एक ईमानदार अफसर बने. ये फिल्में अलग:अलग विषयों पर बनी हैं, लेकिन इन सभी को जोड़ता है एक भाव—देश के प्रति गर्व, जिम्मेदारी और समर्पण.
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‘बॉर्डर 2’ के बारे में
जनवरी 2026 में देशभक्ति का माहौल और ऊंचा हो गया है, क्योंकि 23 जनवरी को ‘बॉर्डर 2’ (Border 2) रिलीज हो गई. यह साल 1997 की सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर’ (Border) का सीक्वल है, जिसका निर्देशन अनुराग सिंह (Anurag Singh) ने किया है. यह फिल्म एक बार फिर बड़े पर्दे पर भारतीय सैनिकों के साहस, बलिदान और राष्ट्रप्रेम की गूंज सुनाने का वादा करती है.
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गीतों में बसता राष्ट्रप्रेम
अगर बॉलीवुड की देशभक्ति की बात हो और गीतों का ज़िक्र न किया जाए, तो कहानी अधूरी रह जाती है. हिंदी सिनेमा में देशप्रेम गीतों के माध्यम से सीधे दिलों तक पहुंचता है और हर पीढ़ी को भावनात्मक रूप से जोड़ता है. ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ (Ae Mere Watan Ke Logon) और ‘संदेसे आते हैं’ (Sandese Aate Hain) जैसे गीत शहीदों के बलिदान और सैनिकों के जज़्बातों को जीवंत कर देते हैं, जबकि ‘मां तुझे सलाम’ (Maa Tujhe Salaam) और ‘वंदे मातरम’ (Vande Mataram) देश के प्रति गर्व और सम्मान की भावना को और गहरा करते हैं. ये गीत सिर्फ सुनने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए हैं, जो हर भारतीय के भीतर राष्ट्रप्रेम की लौ जला देते हैं.
वहीं नई पीढ़ी की फिल्मों में भी गीतों के जरिए देशभक्ति को नए अंदाज़ में पेश किया गया है. ‘चक दे इंडिया’ (Chak De India) और ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ (Uri: The Surgical Strike) जैसे फिल्मों के गाने और बैकग्राउंड म्यूजिक जोश, आत्मविश्वास और एकजुटता की भावना जगाते हैं. इसके साथ ही ‘ऐ वतन’ (Ae Watan), ‘ये जो देश है तेरा’ (Yeh Jo Des Hai Tera) और ‘कर चले हम फ़िदा’ (Kar Chale Hum Fida) जैसे गीत याद दिलाते हैं कि देशभक्ति सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं, बल्कि हर दिन अपने देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने में भी झलकती है.
नई पीढ़ी और नया नजरिया
आज की पीढ़ी के फिल्मकार और कलाकार देशभक्ति को अलग अंदाज़ में पेश कर रहे हैं. अब देशप्रेम सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेल (चक दे इंडिया), सामाजिक जिम्मेदारी (रंग दे बसंती) और आत्मसम्मान (स्वदेश) जैसे विषयों के जरिए भी सामने आया है. यह बदलाव दर्शाता है कि देशभक्ति केवल हथियार उठाने में नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को निभाने में भी है.
सिनेमा से समाज तक असर
बॉलीवुड की देशभक्ति फिल्मों का असर सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रहता. ये फिल्में युवाओं को प्रेरित करती हैं, समाज को सोचने पर मजबूर करती हैं और कई बार राष्ट्रीय संवाद का हिस्सा भी बन जाती हैं. यही सिनेमा की ताकत है—जो भावनाओं को शब्द, दृश्य और संगीत के जरिए आंदोलन बना देता है.
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बॉलीवुड का देशभक्ति प्रेम किसी ट्रेंड या मौसम का मोहताज नहीं है. यह प्रेम समय के साथ बदला है, पर इसकी भावना वही रही है—देश के लिए गर्व, सम्मान और समर्पण. जब तक सिनेमा है, तब तक तिरंगे की यह कहानी पर्दे पर यूं ही लहराती रहेगी और हर पीढ़ी को याद दिलाती रहेगी कि देश सबसे पहले है.
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