/mayapuri/media/media_files/2026/01/31/gratitude-and-patience-are-the-two-rules-of-my-life-2026-01-31-13-51-47.jpeg)
‘सिया के राम’ फेम दानिश अख्तर, जो जय मां वैष्णोदेवी, संतोषी मां, काकभुशुंडि रामायण और शनिदेव जैसे कई शोज़ का हिस्सा रह चुके हैं, मानते हैं कि ज़िंदगी बहुत अनिश्चित है। लेकिन वे न अतीत में जीते हैं और न ही भविष्य की चिंता करते हैं। उनका ध्यान हमेशा वर्तमान पर रहता है। उनका मानना है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, इंसान को अपने लक्ष्य पर काम करते रहना चाहिए।
/mayapuri/media/post_attachments/aajtak/images/story/201604/hanuman_sm_650_041816124129-711089.jpg)
दानिश कहते हैं, “ज़िंदगी बहुत अनप्रिडिक्टेबल है। हम कहते तो हैं कि वर्तमान में जीना चाहिए, लेकिन अक्सर हम अपने लक्ष्य और मन की शांति को बाद में टालते रहते हैं। कई बार मजबूरी में ऐसा करना पड़ता है, लेकिन आलस की वजह से चीज़ों को टालना गलत है।”
वे आगे कहते हैं, “कदम चाहे चार बढ़ें या एक, चलते रहना ज़रूरी है। अपने लक्ष्य पर ध्यान रखिए, बाकी दुनिया क्या कहती है, उसे नजरअंदाज कीजिए। कभी-कभी जीवन में रुकना भी पड़ता है, यह बिल्कुल ठीक है। आराम करना ज़रूरी है, लेकिन हार मानना विकल्प नहीं है।” (Danish Akhtar life philosophy)
उनके लिए मी-टाइम का मतलब है—अपनी सेहत को प्राथमिकता देना।
“हम सभी अपनी सेहत को इग्नोर करते हैं। जबकि हर किसी के पास समय होता है, बस लोग उसे सही जगह नहीं देते। योग हो या वर्कआउट, हफ्ते में तीन से पाँच दिन, कम से कम आधा घंटा ज़रूर देना चाहिए,” वे बताते हैं।
/filters:format(webp)/mayapuri/media/media_files/2026/01/31/g-2026-01-31-13-28-41.jpg)
वह कहते हैं कि लोग समय की कमी का बहाना बनाते हैं, “लोग कहते हैं—समय नहीं मिला कॉल करने का, समय नहीं मिला जिम जाने का। जबकि सच यह है कि हर किसी के पास बराबर समय होता है। इसलिए सेहत, माता-पिता और परिवार के लिए समय ज़रूर निकालना चाहिए।” (Siya Ke Ram actor interviews)
Also Read:क्या सिनेमा के पर्दे पर भी अगड़ी और पिछड़ी जाति की अवधारणा है ?
समय प्रबंधन पर दानिश कहते हैं कि वे अपनी नींद कम करके बाकी कामों के लिए समय बनाते हैं।
“परफेक्ट टाइम मैनेजमेंट आसान नहीं है, लेकिन मैं कोशिश करता हूँ। मैं अपनी नींद 8 घंटे से घटाकर 5-6 घंटे कर देता हूँ, ताकि बाकी कामों—सेहत, परिवार और शूट—के लिए समय मिल सके।”
वे बताते हैं कि नाइगांव जैसे दूर लोकेशन्स पर शूटिंग होने से 2–3 घंटे सिर्फ आने-जाने में लग जाते हैं, “जिम, नींद, परिवार और शूट—सभी को संभालना मुश्किल होता है, लेकिन मैं पूरी कोशिश करता हूं कि हर चीज़ को संतुलित रख सकूँ।”
दानिश अपनी ज़िंदगी के लिए हमेशा कृतज्ञ महसूस करते हैं। “देश में लोग खाने, कपड़े, घर, सेहत, परिवार, करियर, सफलता—इन सबके लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे में मैं जो कुछ भी मिला है, उसके लिए भगवान का बहुत शुक्रगुजार हूँ,” वे कहते हैं। (Actor advice on living in present)
Also Read: Gaurav Khanna Wife: तलाक की अफवाहों पर आकांक्षा चमोला ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं – ‘गौरव और मेरे बीच...’
हालाँकि वे संतुष्ट हैं, लेकिन आगे बढ़ने की चाह हमेशा रहती है। “प्रगति की इच्छा का मतलब यह नहीं कि मैं अभी की ज़िंदगी से असंतुष्ट हूँ। मैं मेहनत करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि भगवान मेरे भविष्य के लिए जो भी बेहतर हो, वह दे।”
वे मानते हैं कि इंडस्ट्री अनप्रिडिक्टेबल ही नहीं, बल्कि बहुत प्रतिस्पर्धात्मक भी है।
“चाहे हम मानें या नहीं, जीवन और इंडस्ट्री दोनों में प्रतियोगिता रहती है। और ये ज़रूरी भी है,” दानिश कहते हैं।
Also Read: ‘मर्दानी’ रानी मुखर्जी के लिए Shah Rukh Khan का उत्साह, ‘Mardaani 3’ बॉक्स ऑफिस पर कर रही है शानदार प्रदर्शन।
उनका मानना है कि प्रतियोगिता इंसान को लक्ष्य के करीब ले जाती है। “ज़िंदगी में बाधाएँ और प्रतिस्पर्धा हमेशा रहेंगी। इनके बीच आगे बढ़ना ही असली कला है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जीवन की महत्वपूर्ण चीजों या परिवार को भूल जाएँ। मैं दोनों को साथ लेकर चलता हूँ,” उन्होंने कहा। (Life lessons from Indian TV actors)
/bollyy/media/media_files/uploads/2022/08/Danish-Akhtar-Saifi.jpg)
अपने जीवन दर्शन पर दानिश कहते हैं, “किसी भी चीज़ के लिए घबराने की ज़रूरत नहीं। सही समय भगवान के हाथ में है। इंसान को बस लगातार मेहनत करते रहना चाहिए। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।”
अंत में वे अपने दो मूल मंत्र बताते हैं: “मेरी ज़िंदगी के दो नियम हैं—कृतज्ञता और धैर्य। जो मिला है उसके लिए शुक्रगुज़ार रहो, और जो चाहिए उसके लिए धैर्य रखो। अगर कोई इन्हें अपना ले, तो उसकी ज़िंदगी में खुशियाँ भी रहेंगी और मनचाही मंज़िल भी मिलेगी।”
Follow Us
/mayapuri/media/media_files/2026/02/13/cover-2680-2026-02-13-18-28-19.png)