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"Holi में उड़े रे गुलाल, कहियो रे मंगेतर से..."

भारतीय सनातन संस्कृति में होली गीतों की परंपरा और एक लोकप्रिय गीत की अनोखी खासियतों को समझाता यह लेख बताता है कि क्यों इसकी लोकप्रियता हर साल बनी रहती है।

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भारतीय सनातन संस्कृति में होली गीतों का बड़ा महत्व है। ऐसा ही एक होली गीत है जिसे हम हर वर्ष सुनते हैं इसके शब्दों से लुत्फ उठाते हैं। पर कभी ध्यान नहीं देते की इस गीत में ऐसा है क्या जो इसकी पॉपुलोरिटी थमती ही नही? आइए, एक बानगी देखते है-

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"रे होलिया में उड़े रे गुलाल, कहियो रे मंगेतर से...। 

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इस एक लाइन में ही गुदगुदी है, जिसके कारण हर होली पर यह गीत जरूर बजता है। गीत की टैग लाइन 'होलिया में उड़े रे गुलाल… रंग, मस्ती और मंगेतर की चुहल से जुड़ा एक दिलकश गीत है। जिसके शब्द कुछ यूं हैं- (Holiya Mein Ude Re Gulal song meaning)

" रे होली है, रे होली है, रे होली है...
गांव का सारा लोग- लुगाई लगा दू प्रेम का गुलाल
भंग भंग पीलो भंग बज के चंग 
रे होलिया में उड़े रे गुलाल कहियो रे मंगेतर से...
महरी ये मंगेतर चुड़ा वाली घड़िया वालो रे नवाब, कहियो रे मंगेतर से...
माहरी ये मंगेतर(होय होय होय)
 रे माहरी ये मंगेतर नथनी वाली
रे मूच्या वालो रे नवाब, कहियो रे मंगेतर से...
माहरी ये मंगेतर पायल वाली, धोतया वालो रे नवाब, कहियो रे मंगेतर से...होलिया में उड़े रे गुलाल कहियो रे मंगेतर से।
अरे, माहरी ये मंगेतर नखरा वाली
पीछे भागे रे नवाब, कहियो रे मंगेतर से
रे होलिया में उड़े रे गुलाल कहियो रे मंगेतर से..."

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तापतर्य यह कि जब फागुन की हवा में भांग की महक घुलती है और गाँव-गली में  "होली है... " की आवाज़ गूँजती है, तब "होलिया में उड़े रे गुलाल, कहियो रे मंगेतर से…" के बोल सुनकर अपने आप लोगों के कदम थिरकाने लगता है। ये पंक्तियाँ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि राजस्थानी-हरीयाणवी की  वो चटपटी झलक हैं जहाँ नथनी-पायल, घड़ी-धोती वाले नवाब और शरमाती गोरियाँ सब एक ही रंग-पिचकारी में भीग जाती हैं। पुरानी लोक-बोली में गाँव की हर शादी-शुदा लड़की को 'मंगेतर' कहकर छेड़ा जाता है। नथनी वाली, पायल वाली, नखरे वाली कहकर गुलाल उड़ाते हुए कह दिया जाता है "कहियो रे मंगेतर से"। (Holi folk song Rajasthan Haryana culture)

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हाल के सालों में इस ढोलक-बजती पंक्ति ने कई नया रूप पाया है। साल  2024-25 में टी-सीरीज़/टिप्स के प्रोजेक्ट में इला अरुण, लिजो जॉर्ज, निखिता गांधी और रोमी ने इसे पॉप-फ़ोक्स बीट को सजाकर नया रूप दिया है, जिसमे  "ऐसे ना गोरी शरमाओ, थोड़ा-थोड़ा पास तो आओ" जैसी शहरी चुहल भी जुड़ गई। इस गीत के वीडियो में मनीषा रानी-अभिषेक कुमार की होली-मस्ती दिखती है, पर दिल-धड़कन वही पुरानी रहती है। गुलाल, बिरहा-मजाक और "मम्मी-डैडी का तो ख्याल कर" फ्लर्ट किया जाता है। (Lijo George Nikita Gandhi Romy Holi track)

Nikhita Gandhi is thrilled by the song “Holiyaan” from Vedaa

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गीत के शब्दों में में सामूहिक मौज मस्ती का आलम है- "गाँव का सारा लोग लुगाई लगा दू प्रेम का गुलाल" वाली पंक्ति पूरे मोहल्ले को एक रंग में बाँध देती है। गीत के अंतरे में मंगेतर की अलग-अलग पहचान (चूड़ला, घड़ी-वाले नवाब, पायल-वाली) सुनने वाले को अपनी टोली का कोई न कोई चेहरा याद दिलाता है। (viral Holi songs reels WhatsApp status)

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होली के दिन जब "भंग भंग भंग पिलो पचा के चंग" की हुड़दंग उठती है, तो ये गीत बस एक प्लेबैक नहीं—स्थानीय मीम बन जाता है, व्हाट्सएप स्टेटस, और छोटे-छोटे रील्स का बैकग्राउंड। इसके बोल श्रोता को याद दिलाते हैं कि होली सिर्फ रंग नहीं, रिश्तों की वो मीठी-तीखी नोक-झोंक है जहाँ गुलाल उड़ता है और साथ में हंसी भी।इस तरह होली गीतों का मुखौटा सदाबहार गीत बन गया है "होलिया में उड़े  रे गुलाल...!"

FAQ

Q1. “होलिया में उड़े रे गुलाल” गीत इतना लोकप्रिय क्यों है?

क्योंकि इसमें लोकभाषा, मस्ती, छेड़छाड़ और सामूहिक उत्सव का ऐसा मेल है जो हर पीढ़ी को जोड़ता है।

Q2. यह गीत किस सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है?

यह गीत राजस्थानी और हरियाणवी लोक संस्कृति की झलक पेश करता है, जहाँ होली पर हंसी-मजाक और रिश्तों की नोक-झोंक खास होती है।

Q3. क्या इस गीत का आधुनिक वर्जन भी आया है?

हाँ, 2024-25 में Ila Arun, Lijo George, Nikhita Gandhi और Romy ने इसे पॉप-फोक स्टाइल में नया रूप दिया है।

Q4. इस गीत में ‘मंगेतर’ शब्द का क्या अर्थ है?

लोकभाषा में ‘मंगेतर’ का प्रयोग शादीशुदा या युवतियों को मजाकिया अंदाज़ में छेड़ने के लिए किया जाता है।

Q5. क्या यह गीत आज के समय में भी प्रासंगिक है?

हाँ, यह गीत आज भी होली के दौरान रील्स, व्हाट्सएप स्टेटस और पार्टियों में खूब सुना जाता है, जिससे इसकी लोकप्रियता लगातार बनी हुई है।

Indian Folk Music not present in content

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