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जनवरी के आख़िरी दिनों में सोशल मीडिया पर अचानक एक अजीब-सी बेचैनी फैलने लगी. दिल्ली में बच्चों और महिलाओं के लापता होने को लेकर पोस्ट, ग्राफिक्स और वीडियो तेज़ी से वायरल होने लगे. हर स्क्रीन पर एक ही सवाल उभर रहा था—क्या राजधानी में अचानक गुमशुदगी की कोई लहर आ गई है? यह डर सिर्फ़ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा. देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे माता-पिता भी चिंतित हो उठे. जिनके बच्चे दिल्ली में पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में रह रहे थे, उनके फोन लगातार बजने लगे. माहौल ऐसा बन गया मानो कोई बड़ी अनहोनी घट रही हो.
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देखते-ही-देखते एक्स (X), फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर आंकड़ों की बाढ़ आ गई. ग्राफिक्स और दावे इतने तीखे थे कि आम लोगों के लिए सच और अफवाह के बीच फर्क करना मुश्किल हो गया. जैसे-जैसे पोस्ट्स वायरल होती गईं, दहशत भी बढ़ती गई. (Delhi missing children and women)
क्या है मर्दानी 3 की भूमिका?
इसी बीच इस पूरे शोर-शराबे की टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए. 10 जनवरी को यशराज फिल्म्स ने अपनी फिल्म ‘मर्दानी 3’ (Mardaani 3) का पोस्टर रिलीज़ किया. पोस्टर में रानी मुखर्जी के पीछे कई छोटी बच्चियां दिखाई दे रही थीं और चारों ओर ‘Missing’ शब्द लिखा था. इसके बाद 12 जनवरी को फिल्म का ट्रेलर आया और 30 जनवरी को यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई. फिल्म की कहानी गुमशुदगी और अपराध पर आधारित है. पोस्टर पर लिखा था— “Rescue begins on the 30th January.”संयोग देखिए कि फिल्म की रिलीज़ के अगले ही दिन, यानी 1 फरवरी से, सोशल मीडिया पर दिल्ली में लापता बच्चों को लेकर पोस्ट्स की बाढ़ आ गई. मामला गरमाया तो न्यूज़ चैनल और अख़बार भी इसमें कूद पड़े और राजनीतिक बयानबाज़ी भी शुरू हो गई. (Social media panic over disappearances)
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रील का असर, रियल की चिंता
फिल्म देखकर लौटे कई दर्शकों ने अनजाने में इन पोस्ट्स को आगे बढ़ाया. धीरे-धीरे यह मुद्दा राजधानी की सबसे डरावनी खबरों में शामिल हो गया. इसी दौरान यह चर्चा भी सामने आई कि कहीं यह सब किसी पेड सोशल मीडिया कैंपेन का हिस्सा तो नहीं. हालांकि, अब दिल्ली पुलिस ने इसे अफवाह बताते हुए आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है. पुलिस का कहना है कि राजधानी में ऐसी कोई असामान्य स्थिति नहीं है और न ही किसी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने आई है.
सूत्रों के मुताबिक, कुछ प्रमोशनल कैंपेन से जुड़े लोगों ने लापता बच्चों के डेटा को संदर्भ से काटकर और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, जिससे सोशल मीडिया पर डर का माहौल बना. पुलिस के अनुसार, वास्तविक तथ्यों और सोशल मीडिया पर दिखाई गई तस्वीर के बीच बड़ा अंतर है.
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फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट से फैला भ्रम
ऑफ-रिकॉर्ड पुलिस अधिकारियों ने यह भी माना कि हाल में एक फिल्म के प्रमोशनल कैंपेन में मिसिंग बच्चों के वास्तविक डेटा को संदर्भ से काटकर इस्तेमाल किया गया. वही सामग्री सोशल मीडिया पर इस तरह फैलाई गई कि लोगों के बीच पैनिक जैसी स्थिति बन गई. दिल्ली और मुंबई पुलिस दोनों इस बात पर एकमत हैं कि यह ‘डेटा-ड्रिवन डर’ वास्तविक हालात को नहीं दर्शाता. हालांकि पुलिस ने किसी पीआर टीम या फिल्म का नाम आधिकारिक तौर पर लेने से इनकार किया है.
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बढ़ोतरी नहीं, बल्कि कमी दर्ज
दिल्ली पुलिस के पीआरओ संजय त्यागी ने बताया कि जनवरी 2026 में पिछले वर्षों की तुलना में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग में कमी दर्ज की गई है. लापता बच्चों के मामलों में किसी गिरोह, नेटवर्क या संगठित अपराध से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग पूरी तरह पारदर्शी है और थानों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तथा ERSS-112 के माध्यम से केस दर्ज किए जाते हैं. (Viral graphics and videos on missing people)
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सोशल मीडिया पर पुलिस का संदेश
बढ़ती अफवाहों के बीच दिल्ली पुलिस ने अपने एक्स हैंडल के ज़रिए स्थिति साफ़ की. पुलिस ने लिखा— हम नागरिकों से अपील करते हैं कि वे लापता बच्चों के मामलों में अचानक वृद्धि की अफवाहों का शिकार न हों. ऐसे दावों का खंडन करते हुए, हम अफवाह फैलाने वालों को आंकड़ों को गलत तरीके से प्रस्तुत करके अनावश्यक भय फैलाने के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी देते हैं.प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा दिल्ली पुलिस के लिए सर्वोपरि है. दिल्ली पुलिस 24x7 सेवा देने और लापता/अपहृत बच्चों का पता लगाने तथा उन्हें उनके परिवार के सदस्यों के साथ शीघ्रता से मिलाने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है.
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि हर लापता व्यक्ति की रिपोर्ट दर्ज की जाती है और तुरंत ट्रेसिंग शुरू होती है. घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है. अफवाहों से बचें और सही जानकारी के लिए केवल पुलिस के आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें.
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इन सबके बीच यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि इस पूरे मामले की सच्चाई क्या है, तभी हालात को सही संदर्भ में समझा जा सकता है. हम यह नहीं जानते और न ही यह दावा कर रहे हैं कि यह पूरा माहौल किसी फिल्म के प्रमोशन के लिए जानबूझकर तैयार किया गया. हमारा उद्देश्य किसी फिल्म, प्रोडक्शन हाउस या किसी पीआर एजेंसी पर आरोप लगाना नहीं है. हम केवल यह रेखांकित कर रहे हैं कि हाल के दिनों में जिस तरह से सोशल मीडिया पर इस संवेदनशील मुद्दे को उठाया गया, उससे लोगों के बीच डर और भ्रम का माहौल बन गया. (Social media spread fear in January)
After following a few leads, we discovered that the hype around the surge in missing girls in Delhi is being pushed through paid promotion. Creating panic for monetary gains won't be tolerated, and we'll take strict action against such individuals.
— Delhi Police (@DelhiPolice) February 6, 2026
साथ ही यह भी सच है कि भले ही सोशल मीडिया पर फैलाई गई जानकारी पूरी तरह सही न हो, लेकिन बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना हमेशा ज़रूरी है. अफवाहों से घबराने के बजाय जागरूक रहना, सावधानी बरतना और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना देना ही सबसे समझदारी भरा कदम है.
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