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जब भी बॉलीवुड की यादगार फ़िल्मों की बात होती है, तो ‘कभी खुशी कभी ग़म’ का नाम अपने आप ज़ुबान पर आ जाता है। बॉलीवुड के टॉप लिस्ट के सितारे, पारिवारिक भावनाओं से ओतप्रोत कहानी , शानदार गाने और भव्य सेट तथा सुन्दर लोकेशन। इस फ़िल्म ने हर मामले में एक अलग ही मुकाम बनाया। आज भी यह फ़िल्म सिनेमा या किसी भी प्लैटफॉर्म पर आते ही लोग बार बार देखना नहीं छोड़ते। लेकिन अब इस फ़िल्म से जुड़ी एक ऐसी दिलचस्प कहानी सामने आई है, जिसने सबको हैरान कर दिया है।
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दरअसल, फ़िल्म के सबसे मशहूर गाने ‘बोले चूड़ियाँ’ को बनाने में इतना खर्च हुआ था कि वही रकम पूरी फ़िल्म के शुरुआती बजट से भी ज़्यादा निकल गई। यह बात हाल ही में फ़िल्मकार निखिल आडवाणी ने एक रेडियो इंटरव्यू में खुद बताई है। निखिल उस समय ‘कभी खुशी कभी ग़म’ में करण जौहर के साथ काम कर रहे थे और शूटिंग से जुड़ी हर बात को करीब से देख रहे थे। (Kabhi Khushi Kabhie Gham Bole Choodiyan song budget)
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निखिल ने बताया कि उस दौर में फ़िल्मों की प्लानिंग आज जैसी नहीं होती थी। आजकल तो महीनों बैठकर एक्सेल शीट पर बजट बनता है, हर खर्च गिना, गिनाया जाता है। लेकिन उस जमाने में खर्च पर फोकस ना करते हुए दिल से फ़िल्में बनाई जाती थी। जब फ़िल्म ‘कभी खुशी कभी ग़म’ की कहानी निर्माता यश जौहर को सुनाई गई, तो उन्होंने निखिल से कहा कि बजट लिखकर लाओ। निखिल ने कागज़ पर सीधा लिखा – तीन करोड़ रुपये। यश जौहर ने बिना ज़्यादा सवाल किए उसे मंज़ूरी दे दी और कहा, शूटिंग शुरू करो। (Nikhil Advani interview KKKG)
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सबसे हैरानी वाली बात यह थी कि फ़िल्म की पहली शूटिंग ही ‘बोले चूड़ियाँ’ गाने से शुरू हुई। इस गाने के लिए एक बहुत और आलीशान सेट बनाया गया। लगभग दो सौ डांसर, तीन सौ जूनियर कलाकार, भारी-भरकम लाइटिंग, असली झूमर, महंगे कपड़े, यानी हर चीज़ बेहद भव्य रखी गई। ऐसा सेट, ऐसी शूटिंग पहले कभी नहीं हुई थी। करण जौहर चाहते थे कि यह गाना देखकर लोग दंग रह जाएं।
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इतनी भव्यता को संभालते हुए सेट पर हालत काफी अस्त व्यस्त हो गई थी। इस आपाधापी में खुद करण जौहर बेहोश तक हो गए थे। वहीं काजोल की लहंगे में दिक्कत आ गई थी और वह ठीक से डांस नहीं कर पा रही थीं। पूरी टीम परेशान थी, लेकिन फिर भी सब कुछ संभाल लिया गया और शूटिंग बदस्तूर चलती रही। सभी चाहते थे कि यह गाना परफेक्ट तरीके से बने।
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जब शूटिंग कुछ दिन चली, तब जाकर यश जौहर को एहसास हुआ कि खर्च बहुत ही ज़्यादा हो रहा है। उन्होंने शाम की चाय पर करण और निखिल दोनों को बुलाया और पूछा, बजट कितना तय किया गया था? निखिल को ठीक से याद नहीं रहा था तो यश जौहर ने वही कागज़ निकाला जो निखिल ने उन्हें दिया था। उस पर लिखा था – तीन करोड़ रुपये। (Karan Johar KKKB production insights)
यश जौहर ने वह पढ़कर कहा कि जितना खर्च अभी तक सिर्फ़ इसी एक गाने में हो चुका है, वह पूरे फ़िल्म के बजट से ज़्यादा है। यह सुनकर दोनों के जैसे होश उड़ गए और वे चुप हो गए। तब यश जौहर ने वही कागज़ हाथ में लेकर फाड़ दिया और कहा, अब तुम लोग खुलकर फ़िल्म बनाओ, बजट की चिंता मत करो।
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यह बात सुनकर आज के ज़माने में लोग सोच भी नहीं सकते कि कोई निर्माता ऐसा कर सकता है। लेकिन यह वही यश जौहर थे, जिनके लिए फ़िल्म सिर्फ़ पैसा कमाने का ज़रिया नहीं, बल्कि जुनून थी। आश्चर्य की बात नहीं कि उनके बेटे करण जौहर भी वैसे ही हैं। निखिल ने बताया कि उस समय फ़िल्म बनाने में एक अलग ही नशा होता था। लोग अपने घर और जेवरात बेचने तक का रिस्क लेने को तैयार रहते थे।
निखिल ने यह भी कहा कि यश जौहर जैसे निर्माता अब शायद ही मिलें। वे कभी किसी बात के लिए मना नहीं करते थे, बस पूछते थे कि ऐसा क्यों करना है। अगर वजह सही होती, तो तुरंत मंज़ूरी दे देते थे। चाहे चार सौ जूनियर कलाकार चाहिए हों या महंगा सेट, उन्हें फ़िल्म की भव्यता से प्यार था। (KKKB iconic song shooting cost)/mayapuri/media/post_attachments/indiatoday/images/story/202005/kareena__2__0-466051.jpeg)
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आज के समय में फ़िल्में ज़्यादातर बॉक्स ऑफिस के हिसाब से बनाई जाती हैं। पहले ही सोच लिया जाता है कि कितनी कमाई होगी, क्या चलेगा, क्या नहीं। लेकिन उस दौर में दिल से फ़िल्म बनाई जाती थी। यही वजह है कि ‘कभी खुशी कभी ग़म’ आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा है और ‘बोले चूड़ियाँ’ गाना भी आज तक उतना ही पसंद किया जाता है। शादी हो, त्योहार हो या कोई फैमिली फंक्शन, यह गाना बजते ही माहौल खुशियों से भर जाता है। इस गाने में करीना कपूर का लहंगा भी उस समय बहुत ट्रेंड में आ गया था। फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा को उसी डिज़ाइन की कई कॉपी बनवानी पड़ी थीं क्योंकि लोग वही लहंगा मांग रहे थे।
इस पूरी कहानी से यह साफ़ है कि पुराने ज़माने के फ़िल्मकार कितने कलात्मक दिल से काम करते थे। उन्हें इस बात की चिंता नहीं होती थी कि पैसा कितना लगेगा। बस वे सिर्फ यह देखते थे कि स्क्रीन पर कुछ यादगार बनना चाहिए। यही वजह है कि आज भी ‘कभी खुशी कभी ग़म’ और उसका गाना ‘बोले चूड़ियाँ’ लोगों के दिलों पर राज करता है। यह अनेकडॉट हमें उस दौर की याद दिलाती है जब फिल्में सिर्फ़ बिज़नेस नहीं, बल्कि इमोशन हुआ करती थीं। और शायद इसी जुनून ने बॉलीवुड को वो यादगार फ़िल्में दीं, जिन्हें लोग पीढ़ियों तक देखते रहेंगे। (Bollywood family drama film trivia)
FAQ
Q1. ‘कभी खुशी कभी ग़म’ के गाने ‘बोले चूड़ियाँ’ का बजट कितना था?
हालांकि सटीक राशि नहीं बताई गई, लेकिन इस गाने पर इतना खर्च हुआ कि यह फ़िल्म के शुरुआती बजट से भी ज़्यादा था।
Q2. यह जानकारी किसने साझा की?
यह खुलासा फ़िल्मकार निखिल आडवाणी ने हाल ही में एक रेडियो इंटरव्यू में किया।
Q3. ‘बोले चूड़ियाँ’ गाने का महत्व क्या है?
यह गाना फ़िल्म के सबसे मशहूर और यादगार गानों में से एक है, जिसने फिल्म की लोकप्रियता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
Q4. इस गाने की शूटिंग में क्या खास था?
शानदार सेट, भव्य लोकेशन और फ़िल्म के टॉप सितारों की मौजूदगी के कारण इस गाने की शूटिंग बेहद महंगी और यादगार रही।
Q5. क्या इस गाने के कारण फ़िल्म का कुल बजट प्रभावित हुआ?
हाँ, गाने पर इतना खर्च होने के कारण यह फ़िल्म के शुरुआती बजट से अधिक था, लेकिन फिल्म की सफलता ने इस खर्च को सही ठहराया।
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