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आज हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की दिग्गज अभिनेत्री कामिनी कौशल (Kamini Kaushal) का जन्मदिन है. उनके जन्मदिन पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं—उनकी कला और योगदान हिंदी सिनेमा में हमेशा जीवित रहेंगे.
हिंदी सिनेमा की इस दिग्गज अभिनेत्री का जन्म 24 फरवरी, 1927 को लाहौर में हुआ था. उनका असली नाम उमा कश्यप था और वे प्रख्यात वनस्पति वैज्ञानिक प्रोफेसर शिव राम कश्यप की पुत्री थीं. वह दो भाईयों और तीन बहनों में सबसे छोटी थीं. उनके पिता लाहौर स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में बॉटनी के प्रोफेसर थे. वह प्रोफेसर शिव राम कश्यप की पुत्री थीं, जिन्हें भारतीय वनस्पति विज्ञान का जनक माना जाता है. एक बौद्धिक और प्रगतिशील परिवार में पली-बढ़ीं कामिनी का सिनेमा से जुड़ाव कभी प्लान नहीं था – यह एक बचपन की मजाकिया 'कॉमिक ट्रेजडी' से शुरू हुआ, जो बाद में 'नीचा नगर' जैसी क्लासिक फिल्म के साथ अंतरराष्ट्रीय शोहरत में बदल गया. (Kamini Kaushal birth and early life)
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मजाक से शुरु हुई थी एक्टिंग
एक इंटरव्यू में कामिनी ने बताया था कि उनकी एक्टिंग जर्नी एक मजाक से शुरू हुई. जब वह महज 7 साल की थीं, तब उनके भाई ने एक छोटी फिल्म बनाई, जिसका नाम था 'द ट्रेजडी'. यह एक कॉमिक ट्रेजडी थी. भाई ने कहानी, स्क्रिप्ट और निर्देशन सब खुद किया और हंसी-मजाक में छोटी कामिनी को इसमें मुख्य भूमिका दे दी. कामिनी ने कहा, "यह वास्तव में एक मजाक की तरह था. भाई ने मुझे फिल्म में डाल दिया और मैंने खूब अच्छा काम किया.” (Kamini Kaushal real name Uma Kashyap)
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'नीचा नगर' से की शुरुआत
कामिनी कौशल ने साल 1946 में फिल्म 'नीचा नगर' से बॉलीवुड में कदम रखा था. सामाजिक असमानता और गरीब-अमीर के संघर्ष पर आधारित इस फिल्म ने कान फिल्म समारोह में बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड जीता. बता दें कि यह कान फिल्म महोत्सव में पाल्मे डी'ओर पुरस्कार जीतने वाली पहली और अब तक की एकमात्र भारतीय फिल्म है. फिल्म में कामिनी ने अभिनेता रफीक अनवर और आनंद की पत्नी उमा के साथ अभिनय किया था. चेतन आनंद ही थे, जिन्होंने फिल्म में काम कर रही दो उमा के बीच भ्रम से बचने के लिए उनका नाम कामिनी कौशल रखा था. कामिनी कौशल ने इस फिल्म में न केवल अपनी अभिनय क्षमता को साबित किया, बल्कि भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई.
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कामिनी कौशल की प्रमुख फिल्में
कामिनी कौशल भारतीय सिनेमा की सबसे फेमस हस्तियों में से एक थीं. उन्होंने अपने शानदार करियर में लगभग 90 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. इनमें शहीद (1948), नदिया के पार (1948), आग (1948), जिद्दी (1948), पारस, शबनम (1949), आरजू (1950), 'झांझर' (1953), बिराज बहू (1954), 'आबरू' (1956), 'बड़े सरकार' (1957), 'जेलर' (1958), 'नाइट क्लब' (1958), 'गोदान' (1963) जैसी फिल्में शामिल हैं. 'बिराज बहू' के लिए उन्हें 1954 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला. कामिनी कौशल के अभिनय के साथ-साथ उनकी खूबसूरती के चर्चे भी खूब मशहूर रहे. उन्होंने हर दौर के सितारों के साथ भी काम किया है.
फिल्मों के अलावा कामिनी कौशल ने कई टेलीविजन शो में भी काम किया, जिनमें दूरदर्शन पर 'चांद सितारे', स्टारप्लस पर 'शन्नो की शादी और डीडी नेशनल पर 'वक्त की रफ्तार' शामिल हैं.
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बहन के पति से की शादी
कामिनी कौशल की निजी जिंदगी ग्लैमर से कहीं अधिक त्याग और दर्द से भरी रही. 1947 में उनकी बड़ी बहन की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई, जिनकी दो बेटियाँ कुमकुम और कविता थीं।. महज 20–21 वर्ष की उम्र में कामिनी पर परिवार की बड़ी जिम्मेदारी आ गई. 1948 में उन्होंने बहन के पति बी.एस. सूद से विवाह किया और दोनों भांजियों को अपनी बेटियों की तरह पाला. बाद में उनके तीन बेटे—राहुल, विदुर और श्रवण—हुए। यह उनके जीवन की सादगी, संवेदनशीलता और त्याग की मिसाल है.
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दिलीप कुमार संग कामिनी की अधूरी मोहब्बत
‘शहीद’, ‘नदिया के पार’, ‘शबनम’ और ‘अर्जू’ जैसी फिल्मों में कामिनी और दिलीप साहब की जोड़ी को दर्शकों ने हमेशा पसंद किया. शूटिंग के दौरान दिलीप कुमार उनसे बेहद प्रभावित हुए और दोनों एक-दूसरे के करीब आए. लेकिन किस्मत ने उन्हें साथ नहीं आने दिया. कामिनी पहले ही अपनी दिवंगत बहन के पति से शादी कर चुकी थीं ताकि अपनी बहन के बच्चे की परवरिश हो सके. ऐसे में अपने घर-परिवार को छोड़ना उनके लिए संभव नहीं था. रिश्ते के खिलाफ उनके भाई का सख्त रुख भी बड़ा कारण बना. कहा जाता है कि कामिनी के भाई ने दिलीप साहब से साफ कह दिया था कि यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ सकता. यह मोहब्बत अधूरी ही रह गई, लेकिन एक-दूसरे के लिए सम्मान कभी कम नहीं हुआ.
अपने कई इंटरव्यूज में उन्होंने दिलीप साहब की तारीफ है. उन्होंने कहा, “दिलीप कुमार कभी दिखावे के लिए नहीं बोलते थे, वह जैसे थे, वैसी ही ईमानदारी से बात करते थे.” उन्होंने यह भी स्वीकारा कि वह खुद भी बेहद साफ-सुथरे स्वभाव की थीं और बनावट उन्हें कभी रास नहीं आई. (Kamini Kaushal international recognition cinema)
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20 साल की उम्र में हासिल किया स्टारडम
कामिनी कौशल ने साल 1946 में फिल्म 'नीचा नगर' नगर से करियर की शुरुआत की थी. इस फिल्म में कामिनी कौशल ने रूपा की भूमिका निभाई थी. फिल्म ‘नीचा नगर' का पहला प्रदर्शन 29 सितंबर 1946 को फ्रांस के कान अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में हुआ. वहां इस फिल्म को 'गोल्डन पाम' पुरस्कार मिला. यह चेतन आदर्श के निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी. 20 साल की उम्र में वे स्टारडम के शिखर पर पहुंच गई थीं. कामिनी कौशल 1940 के दशक और उसके बाद 60 के दशक तक, बॉलीवुड की सबसे महंगी एक्ट्रेस बनी.
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आखिरी बार इन फिल्मों में किया था काम
कामिनी कौशल हिंदी सिनेमा की वह एकमात्र अभिनेत्री थीं, जिन्होंने शादी के बाद भी सबसे लंबे समय तक अभिनय किया. उनकी आखिरी फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' (Laal Singh Chaddha) थी, जिसमें 95 वर्ष की उम्र में उन्होंने स्क्रीन पर उपस्थिति दर्ज कराई. इसके अलावा फिल्म 'कबीर सिंह' में वे शाहिद कपूर की दादी के रूप में नजर आईं. वहीं, 'चेन्नई एक्सप्रेस' में उन्हें शाहरुख खान की दादी के रोल में भी देखा गया. (Kamini Kaushal Lahore birth story)
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कामिनी कौशल जी के जन्मदिन के अवसर पर ‘मायापुरी’ परिवार उन्हें सादर नमन करता है. उनका कला-समर्पण, सादगी और भारतीय सिनेमा में दिया गया अमूल्य योगदान सदैव अमर रहेगा.
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