‘Seher Hone Ko Hai’ को लेकर Parth Samthaan ने की बात, आने वाले ट्रैक पर कहा...
टीवी का चर्चित शो ‘सेहर होने को है’ दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है। शो के लीड एक्टर पार्थ समथान ने हालिया इंटरव्यू में इसकी कहानी, अपने किरदार की गहराई और उससे जुड़ी चुनौतियों पर खुलकर बात की।
टीवी का लोकप्रिय शो ‘सेहर होने को है’ (Seher Hone Ko Hai) इन दिनों दर्शकों के बीच लगातार चर्चा में बना हुआ है. हाल ही में शो के लीड एक्टर पार्थ समथान (Parth Samthaan) ने एक इंटरव्यू में कहानी, अपने किरदार, इंडस्ट्री के अनुभव और निजी सोच को लेकर खुलकर बात की. आइये जानते हैं उन्होंने क्या कहा...
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रैपिड फायर –उत्तर
TV या OTT? देखने के लिए OTT, लेकिन काम करने के लिए Television – क्योंकि टीवी से किरदार सीधे दर्शकों तक पहुंचता है.
किससे ज़्यादा कनेक्शन बनता है – TV या OTT? टेलीविजन
रोमांटिक सीन या इंटेंस इमोशनल सीन?
दोनों
अर्ली मॉर्निंग शूट या लेट नाइट शूट? लेट नाइट शूट
इस शो से आपने क्या सीखा? हर दिन कुछ नया सीखा, खासकर उर्दू शब्दों की समझ और भावनाओं को ईमानदारी से निभाना.
कॉफी या चाय? कॉफी
फिटनेस के बिना एक दिन – पॉसिबल या इम्पॉसिबल? बिल्कुल पॉसिबल है
फेम – ब्लेसिंग या रिस्पॉन्सिबिलिटी? रिस्पॉन्सिबिलिटी
इंस्टाग्राम रील्स या रियल लाइफ कंटेंट? दोनों, जो सीखने को मिले वही ज़रूरी है.
फिल्म, वेब या डायरेक्शन – भविष्य में क्या चुनेंगे? डायरेक्शन, क्योंकि भावनाओं को दूसरों से निकलवाने की कला है.
लोग आपको पार्थ कहें या माहिद ? दोनों, किरदार से पहचाना जाना एक कलाकार के लिए उपलब्धि है.
सेहर से जुड़ा रैपिड फायर
सेहर – उम्मीद या संघर्ष? उम्मीद
माहिद दिल से फैसले लेता है या दिमाग से? अभी दिमाग से.
इस किरदार ने आपको मज़बूत बनाया या संवेदनशील? संवेदनशील
अपने किरदार को एक लाइन में कैसे बताएँगे? एक टूटा हुआ इंसान, जो किसी से जुड़ने का इंतज़ार कर रहा है.
आपको कौन-सा जॉनर पसंद है? इंटेंस रोमांटिक
ऐसा कौन-सा किरदार है, जिसे आप दोबारा निभाना चाहेंगे? ‘मैं हीरो बोल रहा हूं’ शो का नवाब – एक गैंगस्टर किरदार
सेहर का किरदार अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण क्यों रहा?
अब तक निभाए गए किरदार आमतौर पर पॉजिटिव, खुशमिज़ाज और बॉय-नेक्स्ट-डोर टाइप रहे हैं. लेकिन यह किरदार उससे बिल्कुल अलग है. यह एक ऐसा इंसान है, जो अपने अतीत के ट्रॉमा से गुज़रा है, खुद को दुनिया से दूर रखता है और भावनात्मक रूप से बहुत लेयर्ड है. उसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि लोग उसके बारे में क्या सोचते हैं. जब उसकी ज़िंदगी में प्यार आता है, तो वह एक ही पल में नहीं बदलता, बल्कि धीरे-धीरे, सोच-समझकर आगे बढ़ता है. यही धीमी और वास्तविक ग्रोथ इस किरदार को चुनौतीपूर्ण बनाती है.
लंबे समय बाद टीवी पर वापसी करने की वजह क्या रही?
किसी भी प्रोजेक्ट से जुड़ने से पहले सबसे ज़रूरी रहा कि कहानी और किरदार पर पूरा भरोसा हो. कई बार टेलीविजन में सुनाया कुछ और जाता है और स्क्रीन पर कुछ और दिखता है. ऐसे में एक ऐसी टीम के साथ काम करना जरूरी था, जिस पर विश्वास हो. क्रिएटिव डायरेक्टर और पूरी टीम पहले से जानी-पहचानी रही है, इसलिए यह भरोसा बना कि किरदार और कहानी के साथ कोई समझौता नहीं होगा.
शो में उर्दू भाषा पर इतना फोकस क्यों रखा गया है?
भाषा इस कहानी की आत्मा है. सही लहजा, सही अल्फ़ाज़ और साफ उच्चारण बेहद जरूरी थे. इसी वजह से उर्दू को गंभीरता से सीखा गया और सेट पर एक उर्दू स्पेशलिस्ट भी मौजूद रहा. कोशिश यही रही कि संवाद सिर्फ बोले न जाएं, बल्कि महसूस किए जाएं. उर्दू के कुछ शब्द ऐसे हैं, जो सुनने और बोलने दोनों में बेहद खूबसूरत लगते हैं.
आपकी को-एक्ट्रेस ऋषिता कोठारी के साथ ऑन-स्क्रीन बॉन्डिंग कैसी है?
ऋषिता कोठारी (Rishita Kothari) बेहद टैलेंटेड और मेहनती कलाकार हैं. यह उनका पहला शो है, लेकिन काम को लेकर उनका फोकस और ईमानदारी साफ नजर आती है. वह अपने किरदार पर पूरा ध्यान देती हैं और डायरेक्टर पर पूरा भरोसा रखती हैं. ऑफ-स्क्रीन भी उनका स्वभाव बेहद सादा और दिल से जुड़ा हुआ है, जिसका असर ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री में भी दिखता है.
आज की जनरेशन से यह कहानी कैसे जुड़ेगी?
दुनिया, भाषा और समय बदल सकता है, लेकिन इमोशंस कभी नहीं बदलते. जलन, प्यार, बदला, दर्द और रोमांस—ये भावनाएं हर दौर में एक जैसी रहती हैं. फर्क सिर्फ इस बात का होता है कि उन्हें कितनी सच्चाई से दिखाया गया है. अगर इमोशंस ईमानदारी से निभाए जाएं, तो हर जनरेशन उनसे खुद को जोड़ लेती है.
आपने ‘CID’ जैसे आइकॉनिक शो में भी काम किया है, उसका अनुभव कैसा रहा?
‘सीआईडी’ (CID) में काम करना बेहद मज़ेदार अनुभव रहा. वहां इमोशनल बैगेज नहीं होता—एक अधिकारी के तौर पर केस सुलझाने पर फोकस रहता है. दया और अभिजीत जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करना सीखने वाला अनुभव रहा. शुरुआत में उनका ऑरा काफी प्रभावशाली था, लेकिन धीरे-धीरे किरदार में सहजता आ गई.
प्यार को लेकर सोच कैसी है?
प्यार के मामले में सोच आज भी काफी ओल्ड-स्कूल है. दिल से जुड़ाव, बातचीत से बढ़ता रिश्ता और वो फीलिंग कि ‘लव इज़ इन द एयर’—यही रोमांस की असली परिभाषा है. डेटिंग ऐप्स से ज्यादा भरोसा आज भी रियल कनेक्शन पर है.
एक्टर के तौर पर खुद को लगातार एक्सप्लोर करना प्राथमिकता रही है. पर्सनल लाइफ को निजी रखना पसंद है और कैमरे के सामने बहुत ज्यादा वल्नरेबल होना सहज नहीं लगता. इसलिए फोकस सिर्फ अभिनय और किरदारों पर रखा गया है.
आप अपने फैंस और सोशल मीडिया से जुड़ाव कैसे बनाए रखते हैं? हर मैसेज का जवाब देना संभव नहीं होता, लेकिन लाइव चैट, लाइक्स और कमेंट्स के ज़रिए फैंस तक पहुंचने की कोशिश रहती है. सोशल मीडिया पर मिलने वाला प्यार बेहद सच्चा और भावुक होता है, जो अंदर तक छू जाता है.
Dr Anil Rastogi | Padma Shri Award 2026 | Indian Theatre Artist | Veteran Theatre Actor | Hindi film actorAyushman Khurana | Television Actor India | Lucknow Theatre not present in content
‘Seher Hone Ko Hai’ को लेकर Parth Samthaan ने की बात, आने वाले ट्रैक पर कहा...
टीवी का चर्चित शो ‘सेहर होने को है’ दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है। शो के लीड एक्टर पार्थ समथान ने हालिया इंटरव्यू में इसकी कहानी, अपने किरदार की गहराई और उससे जुड़ी चुनौतियों पर खुलकर बात की।
टीवी का लोकप्रिय शो ‘सेहर होने को है’ (Seher Hone Ko Hai) इन दिनों दर्शकों के बीच लगातार चर्चा में बना हुआ है. हाल ही में शो के लीड एक्टर पार्थ समथान (Parth Samthaan) ने एक इंटरव्यू में कहानी, अपने किरदार, इंडस्ट्री के अनुभव और निजी सोच को लेकर खुलकर बात की. आइये जानते हैं उन्होंने क्या कहा...
रैपिड फायर –उत्तर
TV या OTT?
देखने के लिए OTT, लेकिन काम करने के लिए Television – क्योंकि टीवी से किरदार सीधे दर्शकों तक पहुंचता है.
किससे ज़्यादा कनेक्शन बनता है – TV या OTT?
टेलीविजन
रोमांटिक सीन या इंटेंस इमोशनल सीन?
दोनों
अर्ली मॉर्निंग शूट या लेट नाइट शूट?
लेट नाइट शूट
इस शो से आपने क्या सीखा?
हर दिन कुछ नया सीखा, खासकर उर्दू शब्दों की समझ और भावनाओं को ईमानदारी से निभाना.
कॉफी या चाय?
कॉफी
फिटनेस के बिना एक दिन – पॉसिबल या इम्पॉसिबल?
बिल्कुल पॉसिबल है
फेम – ब्लेसिंग या रिस्पॉन्सिबिलिटी?
रिस्पॉन्सिबिलिटी
इंस्टाग्राम रील्स या रियल लाइफ कंटेंट?
दोनों, जो सीखने को मिले वही ज़रूरी है.
फिल्म, वेब या डायरेक्शन – भविष्य में क्या चुनेंगे?
डायरेक्शन, क्योंकि भावनाओं को दूसरों से निकलवाने की कला है.
लोग आपको पार्थ कहें या माहिद ?
दोनों, किरदार से पहचाना जाना एक कलाकार के लिए उपलब्धि है.
सेहर से जुड़ा रैपिड फायर
सेहर – उम्मीद या संघर्ष?
उम्मीद
माहिद दिल से फैसले लेता है या दिमाग से?
अभी दिमाग से.
इस किरदार ने आपको मज़बूत बनाया या संवेदनशील?
संवेदनशील
अपने किरदार को एक लाइन में कैसे बताएँगे?
एक टूटा हुआ इंसान, जो किसी से जुड़ने का इंतज़ार कर रहा है.
आपको कौन-सा जॉनर पसंद है?
इंटेंस रोमांटिक
ऐसा कौन-सा किरदार है, जिसे आप दोबारा निभाना चाहेंगे?
‘मैं हीरो बोल रहा हूं’ शो का नवाब – एक गैंगस्टर किरदार
सेहर का किरदार अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण क्यों रहा?
अब तक निभाए गए किरदार आमतौर पर पॉजिटिव, खुशमिज़ाज और बॉय-नेक्स्ट-डोर टाइप रहे हैं. लेकिन यह किरदार उससे बिल्कुल अलग है. यह एक ऐसा इंसान है, जो अपने अतीत के ट्रॉमा से गुज़रा है, खुद को दुनिया से दूर रखता है और भावनात्मक रूप से बहुत लेयर्ड है. उसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि लोग उसके बारे में क्या सोचते हैं. जब उसकी ज़िंदगी में प्यार आता है, तो वह एक ही पल में नहीं बदलता, बल्कि धीरे-धीरे, सोच-समझकर आगे बढ़ता है. यही धीमी और वास्तविक ग्रोथ इस किरदार को चुनौतीपूर्ण बनाती है.
लंबे समय बाद टीवी पर वापसी करने की वजह क्या रही?
किसी भी प्रोजेक्ट से जुड़ने से पहले सबसे ज़रूरी रहा कि कहानी और किरदार पर पूरा भरोसा हो. कई बार टेलीविजन में सुनाया कुछ और जाता है और स्क्रीन पर कुछ और दिखता है. ऐसे में एक ऐसी टीम के साथ काम करना जरूरी था, जिस पर विश्वास हो. क्रिएटिव डायरेक्टर और पूरी टीम पहले से जानी-पहचानी रही है, इसलिए यह भरोसा बना कि किरदार और कहानी के साथ कोई समझौता नहीं होगा.
शो में उर्दू भाषा पर इतना फोकस क्यों रखा गया है?
भाषा इस कहानी की आत्मा है. सही लहजा, सही अल्फ़ाज़ और साफ उच्चारण बेहद जरूरी थे. इसी वजह से उर्दू को गंभीरता से सीखा गया और सेट पर एक उर्दू स्पेशलिस्ट भी मौजूद रहा. कोशिश यही रही कि संवाद सिर्फ बोले न जाएं, बल्कि महसूस किए जाएं. उर्दू के कुछ शब्द ऐसे हैं, जो सुनने और बोलने दोनों में बेहद खूबसूरत लगते हैं.
आपकी को-एक्ट्रेस ऋषिता कोठारी के साथ ऑन-स्क्रीन बॉन्डिंग कैसी है?
ऋषिता कोठारी (Rishita Kothari) बेहद टैलेंटेड और मेहनती कलाकार हैं. यह उनका पहला शो है, लेकिन काम को लेकर उनका फोकस और ईमानदारी साफ नजर आती है. वह अपने किरदार पर पूरा ध्यान देती हैं और डायरेक्टर पर पूरा भरोसा रखती हैं. ऑफ-स्क्रीन भी उनका स्वभाव बेहद सादा और दिल से जुड़ा हुआ है, जिसका असर ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री में भी दिखता है.
आज की जनरेशन से यह कहानी कैसे जुड़ेगी?
दुनिया, भाषा और समय बदल सकता है, लेकिन इमोशंस कभी नहीं बदलते. जलन, प्यार, बदला, दर्द और रोमांस—ये भावनाएं हर दौर में एक जैसी रहती हैं. फर्क सिर्फ इस बात का होता है कि उन्हें कितनी सच्चाई से दिखाया गया है. अगर इमोशंस ईमानदारी से निभाए जाएं, तो हर जनरेशन उनसे खुद को जोड़ लेती है.
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आपने ‘CID’ जैसे आइकॉनिक शो में भी काम किया है, उसका अनुभव कैसा रहा?
‘सीआईडी’ (CID) में काम करना बेहद मज़ेदार अनुभव रहा. वहां इमोशनल बैगेज नहीं होता—एक अधिकारी के तौर पर केस सुलझाने पर फोकस रहता है. दया और अभिजीत जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करना सीखने वाला अनुभव रहा. शुरुआत में उनका ऑरा काफी प्रभावशाली था, लेकिन धीरे-धीरे किरदार में सहजता आ गई.
प्यार को लेकर सोच कैसी है?
प्यार के मामले में सोच आज भी काफी ओल्ड-स्कूल है. दिल से जुड़ाव, बातचीत से बढ़ता रिश्ता और वो फीलिंग कि ‘लव इज़ इन द एयर’—यही रोमांस की असली परिभाषा है. डेटिंग ऐप्स से ज्यादा भरोसा आज भी रियल कनेक्शन पर है.
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आपने रियलिटी शोज़ से दूरी क्यों बनाई हुई है?
एक्टर के तौर पर खुद को लगातार एक्सप्लोर करना प्राथमिकता रही है. पर्सनल लाइफ को निजी रखना पसंद है और कैमरे के सामने बहुत ज्यादा वल्नरेबल होना सहज नहीं लगता. इसलिए फोकस सिर्फ अभिनय और किरदारों पर रखा गया है.
आप अपने फैंस और सोशल मीडिया से जुड़ाव कैसे बनाए रखते हैं?
हर मैसेज का जवाब देना संभव नहीं होता, लेकिन लाइव चैट, लाइक्स और कमेंट्स के ज़रिए फैंस तक पहुंचने की कोशिश रहती है. सोशल मीडिया पर मिलने वाला प्यार बेहद सच्चा और भावुक होता है, जो अंदर तक छू जाता है.
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Dr Anil Rastogi | Padma Shri Award 2026 | Indian Theatre Artist | Veteran Theatre Actor | Hindi film actorAyushman Khurana | Television Actor India | Lucknow Theatre not present in content