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प्रधानमंत्री Shri Narendra Modi जी ने एआई (AI) को मानवता के भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति बताया

AI इम्पैक्ट समिट 2026 में नरेंद्र मोदी ने तकनीकी बदलाव को डर नहीं बल्कि मानवता के लिए अवसर बताया। उन्होंने कहा कि AI का लाभ केवल अमीर देशों या बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आम लोगों तक पहुंचना चाहिए।

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दिल्ली में चल रहे AI इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो बातें कहीं वो भविष्य की तकनीक को लेकर भारत का नज़रिया साफ़ करती हैं।

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भारत की राजधानी नई दिल्ली में इन दिनों दुनिया भर के दिग्गज जुटे हैं और मौका है ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट का। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समिट के मुख्य सत्र को संबोधित किया और एक बहुत बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि आज जो दुनिया के सामने तकनीकी बदलाव की चुनौती खड़ी है इसे हमें डर की तरह नहीं बल्कि इंसानियत के लिए सबसे बड़े मौके की तरह देखना चाहिए। पीएम ने साफ़ किया कि भारत चाहता है कि आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस यानी AI का फायदा सिर्फ कुछ अमीर देशों या बड़ी कंपनियों तक न रहे बल्कि ये पूरी दुनिया के आम लोगों के काम आए। इस समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूएन के चीफ एंटोनियो गुटेरेस ने भी हिस्सा लिया जो दर्शाता है कि भारत अब दुनिया के तकनीकी फैसलों में कितनी बड़ी भूमिका निभा रहा है।

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संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने एक ख़ास फ्रेमवर्क की बात की जिसका नाम है 'मानव' (MANAV)। इसका सीधा मतलब है कि AI चाहे कितनी भी तरक्की कर ले उसका केंद्र इंसान ही होना चाहिए। मोदी जी ने जोर देकर कहा कि तकनीक का विकास संवेदनशीलता के साथ होना चाहिए ताकि ये समाज में भेदभाव न बढ़ाए। उन्होंने भगवान बुद्ध की धरती का जिक्र करते हुए कहा कि 'सही समझ से ही सही एक्शन निकलता है'। उनका कहना था कि जब तक हम AI के असर को पूरी तरह नहीं समझेंगे तब तक हम सही फैसले नहीं ले पाएंगे। उन्होंने पुरानी यादें ताज़ा करते हुए कोरोना काल का उदाहरण दिया और बताया कि जैसे उस वक्त पूरी दुनिया ने मिलकर वैक्सीन बनाई और एक दूसरे की जान बचाई वैसे ही आज AI के मामले में भी सबको साथ आने की ज़रूरत है।

PM Modi unveils MANAV vision, calls for AI democratisation at summit

इस समिट में एक और चीज़ ने सबका ध्यान खींचा और वो था पीएम मोदी जी के सामने रखा हुआ नामपट्ट। उनकी टेबल पर जो नेमप्लेट लगी थी उस पर 'इंडिया' की जगह 'भारत' लिखा हुआ था। ये पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ हो। इससे पहले 2024 के जी20 शिखर सम्मेलन में भी 'भारत' नाम का ही इस्तेमाल किया गया था। सरकार का ये कदम दर्शाता है कि वो देश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर कितनी मजबूती से रखना चाहती है। विदेशी डेलीगेट्स को जो बुकलेट बांटी गई उसमें भी 'भारत: लोकतंत्र की जननी' लिखा गया है और बताया गया है कि संविधान में भी इसे भारत कहा गया है। ये छोटी सी दिखने वाली बात अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बहुत बड़ा सन्देश देती है।

PM Modi's 'Bharat' Nameplate at G20 Summit: A Social Media Sensation

पीएम मोदी ने AI को लेकर अपनी चिंताएं और विज़न दोनों साझा किए। आज जब पूरी दुनिया में चर्चा चल रही है कि क्या AI लोगों की नौकरियां छीन लेगा या क्या ये गलत हाथों में पड़कर तबाही मचा सकता है तब मोदी जी ने 'डेमोक्रेटाइजेशन' यानी इसके लोकतंत्रीकरण की मांग की। उन्होंने कहा कि AI को एक 'ग्लोबल पब्लिक गुड' की तरह विकसित करना चाहिए जिसका मतलब है कि इस पर सबका हक होना चाहिए। भारत का मंत्र 'सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय' ही यहाँ भी लागू होता है। उन्होंने साफ़ किया कि अगर तकनीक समावेशी नहीं होगी तो ये खाई को और बढ़ा देगी। इसलिए ज़रूरी है कि गरीब से गरीब देश के पास भी वो टूल्स हों जो अमीर देशों के पास हैं।

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समिट के चौथे दिन काफी गहमागहमी रही क्योंकि इसमें दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ भी शामिल हुए थे। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने आखिरी वक्त पर अपना दौरा रद्द कर दिया पर फिर भी चर्चा की कमी नहीं रही। मोदी जी ने टेक लीडर्स के साथ एक ग्रुप फोटो भी खिंचवाई और उनसे अपील की कि वे ऐसी तकनीक बनाएं जो लोगों को सशक्त करे न कि उन्हें डराए। उन्होंने सुरक्षा और एथिक्स यानी नैतिकता पर बहुत ज़ोर दिया। उनका मानना है कि बिना नियमों के AI एक बिना लगाम के घोड़े जैसा हो सकता है जो किसी को भी नुकसान पहुँचा सकता है। इसीलिए भारत एक ऐसा ग्लोबल फ्रेमवर्क बनाने की वकालत कर रहा है जहाँ नियम सबके लिए एक हों।

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भारत का लक्ष्य साफ़ है कि वो खुद को ग्लोबल AI इकोसिस्टम का केंद्र बनाने के लिए कमर कस चुकी है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास डेटा भी है और टैलेंट भी। हमारे युवा जिस तरह से नई चीज़ों को अपनाते हैं वो दुनिया के लिए एक मिसाल है। समिट में ये भी चर्चा हुई कि कैसे खेती और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में AI बड़ा बदलाव ला सकता है। पीएम ने ये भी कहा कि ये समिट सिर्फ भाषणों के लिए नहीं है बल्कि ये एक ऐसा रास्ता तैयार करने के लिए है जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि जब नीयत साफ़ हो और समय पर सही फैसला लिया जाए तभी तकनीक का असली लाभ मिलता है।

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कुल मिलाकर ये समिट भारत के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज़ बनकर भारत ने दुनिया को बताया है कि AI का भविष्य कैसा होना चाहिए। मोदी जी का ये संबोधन इस बात पर मुहर लगाता है कि भारत अब सिर्फ तकनीक इस्तेमाल करने वाला देश नहीं रहा बल्कि वो दुनिया को ये बताने वाला देश बन गया है कि तकनीक का इस्तेमाल कैसे करना है। आने वाले दिनों में इस समिट से निकले सुझावों पर पूरी दुनिया की नज़र रहेगी क्योंकि ये सिर्फ मशीनों की नहीं बल्कि इंसानों और मशीनों के मिलकर चलने की बात है।

FAQ

Q1: AI इम्पैक्ट समिट 2026 कहाँ आयोजित हो रहा है?

A: यह समिट भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित किया गया है।

Q2: समिट को किसने संबोधित किया?

A: समिट के मुख्य सत्र को Narendra Modi ने संबोधित किया।

Q3: प्रधानमंत्री मोदी ने AI को लेकर क्या संदेश दिया?

A: उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव को डर की तरह नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखना चाहिए।

Q4: ‘MANAV’ फ्रेमवर्क क्या है?

A: ‘MANAV’ एक ऐसा दृष्टिकोण है जिसमें AI का केंद्र इंसान को रखा गया है, ताकि तकनीक का विकास संवेदनशील और समावेशी हो।

Q5: समिट में किन अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने हिस्सा लिया?

A: फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron और संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres भी समिट में शामिल हुए।

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AI Impact Summit 2026 | Antonio Guterres | Global AI summit Delhi not present in content

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