Advertisment

टाइगर हिल का शेर: 15 गोलियों के बाद भी नहीं झुके कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव

टाइगर हिल की लड़ाई में कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने 15 गोलियों के बावजूद साहस और वीरता दिखाते हुए कभी झुकने का नाम नहीं लिया, जो उन्हें असली नायक बनाता है।

New Update
टाइगर हिल का शेर
Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

गणतंत्र दिवस का दिन हमें अपने देश के संविधान के साथ-साथ उन वीर सपूतों की भी याद दिलाता है, जिनके अदम्य साहस और बलिदान के कारण हम आज आज़ाद हवा में सांस ले पा रहे हैं। ऐसे ही एक असाधारण योद्धा हैं कैप्टन (मानद) योगेंद्र सिंह यादव, जिनकी कहानी न सिर्फ इतिहास के पन्नों में दर्ज है, बल्कि हर भारतीय के दिल में गर्व और प्रेरणा भर देती है। उनकी वीरता यह सिखाती है कि देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज़्बा उम्र नहीं देखता।

Advertisment

Yogendra Singh Yadav - Wikipedia

 बचपन से देशसेवा का सपना

कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव का जन्म 10 मई 1980 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद अहिर गांव में हुआ था। उनके पिता करण सिंह यादव भारतीय सेना में कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिक रह चुके थे और 1965 व 1971 के भारत-पाक युद्ध में हिस्सा ले चुके थे। बड़े भाई जितेंद्र सिंह यादव भी भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में सेवा दे रहे थे। ऐसे सैन्य माहौल में पले-बढ़े योगेंद्र के मन में बचपन से ही देशभक्ति और सेना में जाने का जज़्बा था। (Captain Yogendra Singh Yadav Republic Day tribute)

May 10 : Subedar Major Yogendra Singh Yadav of the Indian Army was born in  1980. | Shortpedia

16 साल की उम्र में सेना में रखा कदम

योगेंद्र सिंह यादव की दृढ़ इच्छाशक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज 16 साल 5 महीने की उम्र में भारतीय सेना में भर्ती के लिए आवेदन कर दिया। कठिन प्रशिक्षण और अनुशासन के बीच उन्होंने खुद को साबित किया और 18 ग्रेनेडियर्स का हिस्सा बने। कम उम्र में ही उन्होंने एक जांबाज और निडर सैनिक के रूप में पहचान बना ली।

Interview With Captain (Hony) Yogendra Singh Yadav, Author of "The Hero Of Tiger  Hill"

कारगिल युद्ध और टाइगर हिल की चुनौती
साल 1999 में जब कारगिल युद्ध शुरू हुआ, तब पाकिस्तानी सेना ने कई ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा कर रखा था। इनमें सबसे महत्वपूर्ण थी 16,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित टाइगर हिल, जहां से दुश्मन भारतीय ठिकानों पर सीधी नजर रख सकता था। इस चोटी को वापस लेना भारतीय सेना के लिए बेहद जरूरी था। 3-4 जुलाई 1999 की बर्फीली और अंधेरी रात को 18 ग्रेनेडियर्स की एक टुकड़ी को टाइगर हिल पर मौजूद दुश्मन बंकरों पर कब्जा करने का आदेश मिला।

Also Read:गुजराती क्लासिक, 'Desh Re Joya Dada Pardesh Joya' अल्ट्रा मीडिया द्वारा एक रिस्टोर्ड वर्जन में सिनेमाघरों में वापस आ रही है

19 साल का जवान

इस खतरनाक मिशन में सबसे मुश्किल काम था खड़ी और बर्फ से ढकी चट्टान पर चढ़कर रास्ता बनाना। योगेंद्र सिंह यादव ने स्वेच्छा से सबसे आगे बढ़ने की जिम्मेदारी ली। वह रस्सी लेकर चट्टान पर चढ़ रहे थे, ताकि उनके साथी पीछे से ऊपर आ सकें। तभी दुश्मन ने उन पर गोलियों और ग्रेनेड से भीषण हमला कर दिया। (Indian Army war hero Captain Yogendra Singh Yadav)

10.12.2024: Governor felicitates Hon. Captain Yogendra Singh Yadav, PVC &  his wife Mrs. Reena Yadav | Lok Bhavan Maharashtra | India

15 गोलियां, लेकिन हौसला अडिग

दुश्मन के हमले में योगेंद्र की टीम के सभी साथी शहीद हो गए। खुद योगेंद्र के शरीर में एक-दो नहीं, बल्कि 15 से ज्यादा गोलियां और ग्रेनेड के टुकड़े लगे। कंधा, कमर और पैर बुरी तरह जख्मी थे और पूरा शरीर खून से लथपथ था। इसके बावजूद उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया और आगे बढ़ते रहे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद योगेंद्र सिंह यादव रेंगते हुए दुश्मन के पहले बंकर तक पहुंचे और ग्रेनेड फेंककर वहां मौजूद सैनिकों को मार गिराया। इसके बाद उन्होंने दूसरे बंकर पर हमला किया और अकेले ही कई दुश्मन सैनिकों को ढेर कर दिया। उनकी इस अदम्य वीरता ने बाकी भारतीय सैनिकों में नया जोश भर दिया और अंततः भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर तिरंगा फहरा दिया। (Captain Yogendra Singh Yadav gallantry and courage)

4 July,1999: Saluting Param Vir Chakra Awardee Kargil War Hero, Army's  Living Legend Subedar Major Yogendra Singh Yadav - Jammu Kashmir Now | The  facts and information about J&K

Also Read:मिलिए ब्लडी मैरी Priyanka Chopra से जो है एक मदर, प्रोटेक्टर और खूंखार पाइरेट,

परमवीर चक्र से हुए सम्मानित 

योगेंद्र सिंह यादव को गंभीर हालत में हेलीकॉप्टर से अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब डेढ़ साल तक उनका इलाज चला। 15 गोलियां झेलने के बावजूद उनकी मजबूत इच्छाशक्ति ने उन्हें जीवन की जंग भी जिता दी। उनकी असाधारण बहादुरी के लिए 26 जनवरी 2000 को उन्हें भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वे इस सम्मान को पाने वाले भारत के सबसे युवा सैनिक बने। साल 2021 में उन्हें मानद कैप्टन की उपाधि दी गई और उसी वर्ष वे सेना से सेवानिवृत्त भी हुए। (Patriotism and bravery Captain Yogendra Singh Yadav)

कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव की कहानी हर बच्चे और युवा को यह सिखाती है कि उम्र चाहे कितनी भी छोटी क्यों न हो, अगर हौसला बड़ा हो तो इतिहास रचा जा सकता है। उनकी गाथा हमें बताती है कि सच्ची देशभक्ति शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म और साहस में दिखाई देती है।

Also Read: अक्षय कुमार की हॉरर कॉमेडी ‘भूत बंगला’ 15 मई को देगी सिनेमाघरों में दस्तक......!

इस गणतंत्र दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम एक जिम्मेदार, ईमानदार और साहसी नागरिक बनेंगे। टाइगर हिल का यह शेर हमेशा हमें याद दिलाता रहेगा कि हमारे वीर जवान तिरंगे की शान की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार रहते हैं।

Also Read:Diljit Dosanjh और सचेत-परंपरा ने बॉर्डर 2* के भावपूर्ण नए मेलोडी 'Ishq Da Chehra' के साथ भावनात्मक तालमेल बिठाया

 Indian Army Hero not present in content

Advertisment
Latest Stories