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ताजा खबर: अरुण गोविल (जन्म: 12 जनवरी 1952) एक भारतीय अभिनेता और राजनेता हैं, जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े हुए हैं. उन्हें सबसे ज्यादा पहचान दूरदर्शन के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाने के लिए मिली. इसके अलावा उन्होंने 1993 की एनिमेटेड फिल्म ‘रामायण: द लीजेंड ऑफ प्रिंस राम’ में भी भगवान राम को अपनी आवाज़ दी थी.
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अरुण गोविल ने अपने करियर में कई लोकप्रिय फिल्मों में काम किया है, जिनमें ‘पहेली’ (1977), ‘सावन को आने दो’ (1979), ‘सांच को आंच नहीं’ (1979), ‘जियो तो ऐसे जियो’ (1981), ‘हिम्मतवाला’ (1983), ‘दिलवाला’ (1986) और ‘गोविंदा गोविंदा’ (1994) शामिल हैं.
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वर्तमान में वह जून 2024 से मेरठ लोकसभा सीट से सांसद हैं.
कैसे मिली रामायण
अरूण गोविल (Arun Govil) ने रामायण के अलावा कई सीरियल और फिल्मों में काम किया है लेकिन लोग उन्हें भगवान राम के किरदार से जानते हैं. अरूण के फैंस उन्हें उनके असली नाम के जगह राम के नाम से ही जानते थे.
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अरूण को भगवान राम के किरदार की वजह से काफी पॉपुलेरिटी हासिल की. लेकिन क्या आप जानते है कि सीरियल रामायण के क्रिएटर रामानंद सागर ने अरूण को राम के किरदार के लिए रिजेक्ट कर दिया था.
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इसका कारण ये था कि वो सिग्रेटे पीते थे और रामानंद सागर नहीं चाहते थे की भगवान राम का किरदार करने वाले अभिनेता में कोई बूरी आदत हो. लेकिन अरूण के लुक टेस्ट के दौरान उन्हें सेलेक्ट किया गया क्योंकि रामानंद सागर को उनकी स्माइल ने काफी अट्रैक्ट किया था.
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अरूण (Arun Govil) के लुक टेस्ट से पहले सूरज बरजात्या ने अरूण को अपनी स्माइल को टेस्ट के दौरान स्माइल करने कहा था.
इसके बाद उनके करियर ने उंची उड़ान भरी. वो देश भर में भगवान राम के नाम से फेमस हो गए. जब रामायण को रिलीज किया गया था उस वक्त तो लोंगो के बीच काफी पसंद की गई थी लेकिन लॉकडाउन के दौरान 33 साल बाद एक बार फिर से शो को ऑडियंस द्वारा उतना ही प्यार मिला.
शुरुआती जीवन
अरुण गोविल का जन्म 12 जनवरी 1952 को मेरठ, उत्तर प्रदेश में हुआ था. उनका बचपन और किशोरावस्था शाहजहांपुर में बीता. उन्होंने शाहजहांपुर स्थित आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज से बीएससी (विज्ञान) की पढ़ाई की. उनके पिता चाहते थे कि वह सरकारी नौकरी करें, लेकिन अरुण कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिससे उन्हें हमेशा याद रखा जाए.
उनके पिता चंद्रप्रकाश गोविल एक सरकारी अधिकारी थे. अरुण अपने परिवार में छह भाइयों और दो बहनों में चौथे नंबर पर हैं. उनके बड़े भाई विजय गोविल की शादी पूर्व बाल कलाकार और दूरदर्शन के पहले सेलिब्रिटी टॉक शो ‘फूल खिले हैं गुलशन गुलशन’ की होस्ट तबस्सुम से हुई थी.
करियर
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साल 1975 में अरुण गोविल मुंबई आए और अपने भाई के बिजनेस से जुड़े, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि यह काम उन्हें पसंद नहीं है. कॉलेज में नाटकों से जुड़ाव के बाद उन्होंने अभिनय को अपना करियर बनाने का फैसला किया.
उन्हें पहला बड़ा ब्रेक साल 1977 में फिल्म ‘पहेली’ से मिला, जब उनकी मुलाकात तबस्सुम के जरिए ताराचंद बड़जात्या से हुई. इसके बाद उन्होंने ‘सावन को आने दो’ और ‘सांच को आंच नहीं’ जैसी फिल्मों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली.
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टीवी पर उन्होंने 1985 में ‘विक्रम और बेताल’ से डेब्यू किया, लेकिन असली लोकप्रियता उन्हें 1986 में रामानंद सागर के सीरियल ‘रामायण’ से मिली. इसमें भगवान राम की भूमिका निभाने के लिए उन्हें 1988 में उपट्रॉन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.
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इसके बाद उन्होंने ‘लव कुश’, ‘जय वीर हनुमान’, ‘विश्वामित्र’, ‘बुद्धा’ जैसे कई धारावाहिकों में ऐतिहासिक और पौराणिक किरदार निभाए. उन्होंने जापानी-भारतीय एनिमेटेड फिल्म ‘रामायण: द लीजेंड ऑफ प्रिंस राम’ में भी भगवान राम को अपनी आवाज़ दी.
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निजी जीवन
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अरुण गोविल की शादी अभिनेत्री श्रीलेखा से हुई है. उनके दो बच्चे हैं—सोनिका और अमल. उनकी बहू का नाम दिव्या है.
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राजनीतिक सफर
अरुण गोविल ने 18 मार्च 2021 को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली. इसके बाद 25 मार्च 2024 को उन्हें मेरठ लोकसभा सीट से भाजपा का उम्मीदवार घोषित किया गया.
4 जून 2024 को हुए चुनाव परिणामों में अरुण गोविल ने जीत हासिल की और वे मेरठ से लोकसभा सांसद बने.
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FAQ
Q1. अरुण गोविल का जन्म कब और कहां हुआ था?
A. अरुण गोविल का जन्म 12 जनवरी 1952 को मेरठ, उत्तर प्रदेश में हुआ था.
Q2. अरुण गोविल को सबसे ज्यादा पहचान किस भूमिका से मिली?
A. उन्हें सबसे ज्यादा पहचान टीवी सीरियल ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाने से मिली.
Q3. अरुण गोविल ने किन मशहूर फिल्मों में काम किया है?
A. उन्होंने ‘पहेली’, ‘सावन को आने दो’, ‘सांच को आंच नहीं’, ‘जियो तो ऐसे जियो’, ‘हिम्मतवाला’, ‘दिलवाला’ और ‘गोविंदा गोविंदा’ जैसी फिल्मों में काम किया है.
Q4. क्या अरुण गोविल ने एनिमेटेड फिल्म में भी भगवान राम की आवाज़ दी है?
A. हां, उन्होंने एनिमेटेड फिल्म ‘रामायण: द लीजेंड ऑफ प्रिंस राम’ में भगवान राम को अपनी आवाज़ दी थी.
Q5. अरुण गोविल को ‘रामायण’ के लिए कौन सा अवॉर्ड मिला था?
A. उन्हें ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका के लिए 1988 में उपट्रॉन अवॉर्ड मिला था.
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