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ताजा खबर: 1965 में हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक अहम मोड़ तब आया, जब राजेश खन्ना ने प्रतिष्ठित फिल्मफेयर टैलेंट कॉन्टेस्ट जीता. इस जीत के साथ ही उन्हें यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स के तहत 12 फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट मिला, जिसमें जी.पी. सिप्पी, शक्ति सामंत और बी.आर. चोपड़ा जैसे दिग्गज निर्माता शामिल थे. इन्हीं फिल्मों में से एक थी आराधना—वही फिल्म जिसने राजेश खन्ना को ऐसी शोहरत दिलाई, जैसी न पहले कभी देखी गई और न बाद में.
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दिलचस्प बात यह है कि राजेश खन्ना खुद इस फिल्म को करना नहीं चाहते थे. उन्हें लगता था कि यह फिल्म पूरी तरह हीरोइन-ओरिएंटेड है. कहा जाता है कि उन्होंने निर्माता-निर्देशक शक्ति सामंत से साफ पूछा था—“मैं क्या करूंगा?” लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था.
कैसे शुरू हुई ‘आराधना’ की कहानी
हाल ही में रेडियो नशा को दिए एक इंटरव्यू में शक्ति सामंत के बेटे आशीम सामंत ने ‘आराधना’ के बनने की पूरी कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि शक्ति सामंत पहले शम्मी कपूर के साथ एक फिल्म बनाने वाले थे, लेकिन वजन बढ़ने की वजह से शम्मी कपूर ने छह महीने का समय मांग लिया. इसी बीच सामंत ने एक नई फिल्म बनाने का फैसला किया.यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स के तहत पहले से साइन किए गए राजेश खन्ना को लेकर सामंत ने फिल्म प्लान की. तभी लेखक सचिन भौमिक की दस साल पुरानी कहानी ‘आराधना’ उन्हें याद आई. कहानी पसंद आई और फिल्म पर काम शुरू हो गया.
जबरदस्ती साइन की गई फिल्म बनी सुपरहिट
आशीम सामंत ने बताया कि राजेश खन्ना को फाइनल करने से पहले शक्ति सामंत ने नासिर हुसैन से ‘बहारों के सपने’ का एक रील दिखाने को कहा. राजेश खन्ना का अभिनय देखकर वह काफी प्रभावित हुए. हालांकि जब राजेश खन्ना ने ‘आराधना’ की कहानी सुनी, तो उन्होंने फिर वही कहा—“मैं क्या करूंगा?”शक्ति सामंत ने उन्हें भरोसा दिलाया कि फिल्म हिट होगी, लेकिन राजेश खन्ना केवल इसलिए माने क्योंकि वे यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स के कॉन्ट्रैक्ट से बंधे हुए थे. अगर ऐसा नहीं होता, तो शायद वे यह फिल्म कभी नहीं करते.
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दिल्ली प्रीमियर ने बदली किस्मत
‘आराधना’ का पहला प्रीमियर दिल्ली में हुआ, जहां तत्कालीन वित्त मंत्री जगजीवन राम मुख्य अतिथि थे. आशीम सामंत के मुताबिक, शो शुरू होने से पहले दर्शकों को राजेश खन्ना में कोई दिलचस्पी नहीं थी. सबकी निगाहें शर्मिला टैगोर और गानों पर थीं.लेकिन इंटरवल तक आते-आते माहौल बदल गया. फिल्म खत्म होते-होते राजेश खन्ना सुपरस्टार बन चुके थे. लोग उनके ऑटोग्राफ लेने के लिए उमड़ पड़े. यहीं से हिंदी सिनेमा का पहला “सुपरस्टार कल्चर” जन्मा.
‘मेरे सपनों की रानी’ गाने पर आया संकट
आशीम सामंत ने यह भी बताया कि फिल्म का मशहूर गाना ‘मेरे सपनों की रानी’ आखिरी वक्त पर मुश्किल में पड़ गया था. शर्मिला टैगोर ने शूट कैंसिल कर दिया क्योंकि उन्हें सत्यजीत रे की फिल्म के लिए बुलावा आ गया था. मजबूरी में शक्ति सामंत ने गाने का ज्यादातर हिस्सा राजेश खन्ना और शूजीत कुमार के साथ शूट किया और बाद में आउटडोर सेट पर शर्मिला के क्लोज-अप्स फिल्माए.
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