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ताजा खबर: जावेद अख्तर एक भारतीय पटकथा लेखक, गीतकार, शायर और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं. हिंदी सिनेमा में अपने व्यापक योगदान के लिए वे अत्यंत प्रसिद्ध हैं. उन्होंने अब तक पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और सोलह फिल्मफेयर पुरस्कार जीते हैं. भारत सरकार ने उन्हें 1999 में पद्म श्री और 2007 में पद्म भूषण से सम्मानित किया—ये देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं. जावेद अख्तर को भारतीय सिनेमा के इतिहास के महानतम पटकथा लेखकों और गीतकारों में गिना जाता है.
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कैसे मिली मिली पहचान
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जावेद अख्तर को पहली बड़ी पहचान सलीम–जावेद की मशहूर लेखक जोड़ी के रूप में मिली, जिसमें वे सलीम खान के साथ काम करते थे. इस जोड़ी ने जंजीर (1973) से जबरदस्त सफलता हासिल की और इसके बाद दीवार (1975) और शोले (1975) जैसी कालजयी फिल्में लिखीं. इन फिल्मों ने भारतीय पॉपुलर कल्चर पर गहरा असर डाला, खासकर “एंग्री यंग मैन” की छवि को स्थापित करने में. 1980 के शुरुआती वर्षों में जोड़ी के अलग होने के बाद जावेद अख्तर ने बतौर गीतकार नया सफर शुरू किया और अपनी सामाजिक चेतना से भरी कविताओं और गीतों के लिए खूब सराहे गए.
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फ़िल्मी करियर
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फिल्मी करियर के अलावा, जावेद अख्तर एक मुखर सार्वजनिक बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता भी रहे हैं. वे धर्मनिरपेक्षता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लैंगिक समानता के प्रबल समर्थक हैं. उन्होंने धर्म, मानवाधिकार और तर्कवाद जैसे विषयों पर खुलकर लिखा और बोला है. वे 2010 से 2016 तक कला क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे. 2019 के आम चुनाव में उन्होंने सार्वजनिक रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) का समर्थन किया. साहित्य, सिनेमा और मुक्त विचारों में योगदान के लिए उन्हें 2020 में ‘रिचर्ड डॉकिन्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया—यह सम्मान पाने वाले वे पहले भारतीय बने.
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2024 में अमेज़न प्राइम वीडियो पर ‘Angry Young Men’ नामक तीन भागों की डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ रिलीज़ हुई, जिसमें सलीम खान और जावेद अख्तर की रचनात्मक साझेदारी, उनके व्यक्तिगत रिश्ते और भारतीय सिनेमा पर उनके स्थायी प्रभाव को दिखाया गया.
दिसंबर 2025 में जावेद अख्तर ने नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक सार्वजनिक दार्शनिक बहस “Does God Exist?” में हिस्सा लिया. इस बहस में उन्होंने इस्लामिक स्कॉलर शमाइल नदवी के साथ आस्था, नैतिकता और मानवीय पीड़ा जैसे विषयों पर चर्चा की. नास्तिक दृष्टिकोण से उन्होंने विशेष रूप से युद्ध क्षेत्रों में आम नागरिकों के कष्टों के संदर्भ में दैवी न्याय की अवधारणा पर सवाल उठाए. इस बहस को भारत और विदेशों में व्यापक मीडिया कवरेज मिला.
प्रारंभिक जीवन
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जावेद अख्तर का जन्म 1945 में ग्वालियर में हुआ था. उनके पिता जान निसार अख्तर हिंदी फिल्मों के गीतकार और उर्दू के मशहूर शायर थे. उनके दादा मुज़्तर ख़ैराबादी भी शायर थे, जबकि उनके परदादा फ़ज़्ल-ए-हक़ ख़ैराबादी एक इस्लामी विद्वान थे, जिन्होंने 1857 की क्रांति में ब्रिटिश शासन के खिलाफ फतवा दिया था.
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जावेद अख्तर का असली नाम ‘जादू’ था, जो उनके पिता की एक कविता की पंक्ति से लिया गया था—“लम्हा, लम्हा किसी जादू का फ़साना होगा”बाद में इसका आधिकारिक नाम जावेद रखा गया.उन्होंने अपना बचपन और स्कूली शिक्षा लखनऊ में बिताई और बाद में भोपाल के सैफिया कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की.
पटकथा लेखक के रूप में करियर
1970 के दशक में आमतौर पर एक ही लेखक द्वारा कहानी, पटकथा और संवाद लिखने की परंपरा नहीं थी और लेखकों को क्रेडिट भी नहीं मिलता था. राजेश खन्ना को सलीम–जावेद को पहला बड़ा मौका देने का श्रेय दिया जाता है.
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इसके बाद अंदाज़ (1971), हाथी मेरे साथी (1971), सीता और गीता (1972) जैसी फिल्मों से उन्हें सफलता मिली. फिर उन्होंने यादों की बारात, जंजीर, दीवार, शोले, डॉन, त्रिशूल, दोस्ताना, क्रांति, मिस्टर इंडिया जैसी सुपरहिट फिल्में लिखीं.
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24 फिल्मों में से 20 हिट रहीं. हालांकि शान और आख़िरी दांव जैसी कुछ फिल्में उस वक्त सफल नहीं रहीं, लेकिन बाद में सलीम–जावेद को भारतीय सिनेमा के सबसे सफल पटकथा लेखकों में गिना गया. वे भारतीय सिनेमा के पहले लेखक थे, जिन्होंने स्टार जैसा दर्जा हासिल किया.
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निजी जीवन और विचार
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जावेद अख्तर खुद को नास्तिक बताते हैं. उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे किसी धर्म या आध्यात्मिक विश्वास में नहीं मानते.उनकी पहली शादी हनी ईरानी से हुई, जिनसे उनके दो बच्चे हैं—फरहान अख्तर (अभिनेता, निर्देशक, निर्माता) औरजोया अख्तर (लेखिका, निर्देशक, निर्माता).
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बाद में उन्होंने अभिनेत्री शबाना आज़मी से विवाह किया. जावेद अख्तर खुद को धार्मिक रूप से नास्तिक मानते हैं, लेकिन अपनी विरासत के कारण खुद को “सांस्कृतिक मुस्लिम” कहते हैं.
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पुरस्कार और सम्मान
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पद्म श्री – 1999
पद्म भूषण – 2007
साहित्य अकादमी पुरस्कार (उर्दू) – 2013 (कविता संग्रह लावा)
मानद डॉक्टरेट – जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय
रिचर्ड डॉकिन्स अवॉर्ड – 2020
लोकमत सुर ज्योत्स्ना नेशनल म्यूज़िक अवॉर्ड (लीजेंड अवॉर्ड) – 2025
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जावेद अख्तर वर्क फ्रंट
जावेद अख्तर के रीसेंट प्रोजेक्ट्स में 120 बहादुर (2025) जैसी फिल्मों के लिए गाने शामिल है और 2024 की एंग्री यंग मेन डॉक्यूसीरीज़ लॉन्च के दौरान यह भी अनाउंस किया गया था कि वह सलीम खान के साथ आखिरी फिल्म के लिए फिर से साथ आ सकते हैं, साथ ही एक बायोपिक की भी अफवाह है, लेकिन खास डिटेल्स कम हैं
फिल्म्स
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गाने
FAQ
Q1. जावेद अख्तर का जन्म कब और कहां हुआ था?
उत्तर: जावेद अख्तर का जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ था.
Q2. जावेद अख्तर किन-किन क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं?
उत्तर: वे पटकथा लेखक, गीतकार, शायर और सामाजिक-राजनीतिक विचारक के रूप में सक्रिय रहे हैं.
Q3. सलीम–जावेद की जोड़ी क्यों मशहूर है?
उत्तर: सलीम–जावेद ने जंजीर, दीवार और शोले जैसी कालजयी फिल्मों से हिंदी सिनेमा की दिशा बदल दी.
Q4. ‘एंग्री यंग मैन’ की अवधारणा किससे जुड़ी है?
उत्तर: यह अवधारणा सलीम–जावेद द्वारा लिखी गई फिल्मों से जुड़ी है, जिसने 1970 के दशक के सिनेमा को नया तेवर दिया.
Q5. जावेद अख्तर ने गीतकार के रूप में कब पहचान बनाई?
उत्तर: 1980 के दशक में सलीम–जावेद के अलग होने के बाद उन्होंने गीत लेखन में बड़ी पहचान बनाई.
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