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Do Deewane Seher Mein Movie Review: क्या दर्शकों के दिलों पर खरी उतर पाई ‘दो दीवाने सहर में’?

रिव्यूज: Do Deewane Seher Mein Movie Review: अगर आप सिद्धांत चतुर्वेदी और मृणाल ठाकुर की ‘दो दीवाने सहर में’ को देखने का प्लान बना रहे है तो हम बताएंगे कि फिल्म कैसी है.

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Do Deewane Seher Mein Movie Review
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फिल्म: दो दीवाने सहर में 
कलाकार: सिद्धांत चतुर्वेदी, मृणाल ठाकुर  ,इला अरुण, जॉय सेनगुप्ता 
निर्देशक: रवि उदयवार 
रेटिंग: 2.5

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Do Deewane Seher Mein Movie Review: मृणाल ठाकुर और सिद्धांत चतुर्वेदी की रोमांटिक ड्रामा 'दो दीवाने सहर में' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी हैं. फिल्म को दर्शकों की ओर से ठीक- ठाक रिस्पॉस भी मिल रहा हैं. ऐसे में अगर आप इस फिल्म को देखने का प्लान बना रहे हैं तो आज हम आपको बताएंगे कि यह फिल्म कैसी है. आइए जानते हैं कैसा हैं इस फिल्म 'दो दीवाने सहर में' का रिव्यू (Do Deewane Seher Mein Movie Review).

Do Deewane Seher Mein Trailer: सिद्धांत चतुर्वेदी- मृणाल ठाकुर की ‘दो दीवाने सहर में’ का ट्रेलर आउट

फिल्म की कहानी क्या हैं? (What is the story of the film?)

फिल्म 'दो दीवाने सहर में'  की कहानी शशांक शर्मा (सिद्धांत चतुर्वेदी) और रोशनी श्रीवास्तव (मृणाल ठाकुर) के इर्द-गिर्द घूमती है. शशांक एक सफल कॉर्पोरेट प्रोफेशनल है, जिसके पास करियर और पैसा तो है, लेकिन हकलाने की समस्या उसे अंदर से असुरक्षित बनाती है. रोशनी एक मीडिया एजेंसी में काम करती है, इंडिपेंडेंट और मॉडर्न है, लेकिन अपनी बॉडी इमेज और लुक्स को लेकर गहरी चिंता में रहती है. दोनों के बीच रिश्ते का कॉन्फ्लिक्ट बाहर की दुनिया से नहीं, बल्कि उनके अंदर से शुरू होता है. परिवार की शादी की उम्मीदों और शहर की भागदौड़ के बीच, यह जोड़ी अपने डर और कमियों के साथ लड़ते हुए धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आती है. क्या शशांक और रोशनी एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार कर पाते हैं, या फिर ये कमियाँ उनके रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत बन जाती हैं? इस सवाल का जवाब और इनकी दिलचस्प प्रेम कहानी का उतार-चढ़ाव जानने के लिए आपको यह दिल छू लेने वाली फिल्म एक बार जरूर देखनी चाहिए.

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फिल्म के कलाकारों का अभिनय कैसा है? (How is the acting of the actors in the film?)

फिल्म में मृणाल ठाकुर और सिद्धांत चतुर्वेदी ने असलियत पर आधारित शानदार परफॉर्मेंस दी है. सिद्धांत चतुर्वेदी ने शशांक की झिझक और कमज़ोरी को बहुत बारीकी से दिखाया है, कभी भी उसके किरदार की मुश्किलों को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं पेश किया. दूसरी तरफ, मृणाल ठाकुर ने रोशनी के किरदार में कमज़ोरी और मज़बूती का एक ऐसा मेल दिखाया है, जिससे दर्शक तुरंत जुड़ाव महसूस करता है. बॉडी इमेज को लेकर उनकी चिंता और आत्मविश्वास के उतार-चढ़ाव को उन्होंने बेहद सहजता से उकेरा है. दोनों के बीच की केमिस्ट्री बिना किसी ज़ोर-ज़बरदस्ती के बेहद नेचुरल लगती है, जो एक मॉडर्न रिश्ते की अनकही बातों और गर्मजोशी को बखूबी दर्शाती है. सपोर्टिंग कास्ट भी कहानी को काफी मज़बूत बनाती है - इला अरुण अपनी दमदार मौजूदगी से गंभीरता लाती हैं, आयशा रज़ा इमोशनल स्थिरता प्रदान करती हैं, और संदीपा धर परिवार के हर पहलू को और अधिक भरोसेमंद बनाती हैं.

फिल्म का निर्देशन कैसा है? (How is the direction of the film?)

इस फिल्म को अभिरुचि चंद ने लिखा है और रवि उदयवार ने डायरेक्ट किया है. राइटिंग दिलचस्प होने के साथ-साथ बेहद रिलेटेबल है, जिससे कैरेक्टर्स से कनेक्ट करना बेहद आसान हो जाता है. संवादों में वो हल्कापन और गहराई दोनों है, जो आज के यंग जनरेशन की सोच और उनके रिश्तों को सही तरीके से दर्शाता है. डायरेक्शन की बात करें तो रवि उदयवार का काम असरदार है, हालांकि थोड़ा और टाइट स्क्रीनप्ले फिल्म को और भी बेहतर बना सकता था. उनकी कहानी कहने का तरीका किरदारों को सिनेमाई नायक-नायिका की तरह नहीं, बल्कि हमारे आसपास रहने वाले आम लोगों की तरह पेश करता है, जिससे उनसे जुड़ाव गहरा होता है. शहरी माहौल को बड़ी बारीकी से कैमरे में कैद किया गया है और इमोशनल पल बिना किसी नाटकीयता के खुद-ब-खुद सामने आते हैं. फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी और प्यार को उसके सबसे इंसानी और नेचुरल रूप में दिखाने की इसकी कमिटमेंट है, जो इसे भीड़ से अलग खड़ा करती है.

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फिल्म का म्यूजिक कैसा है? (How is the music of the film?)

फिल्म का म्यूजिक कहानी के मूड के साथ पूरी तरह से जुड़ा हुआ है और इसे और गहराई प्रदान करता है. गाने कहानी में जबरदस्ती ठूंसे हुए नहीं लगते, बल्कि स्वाभाविक रूप से किरदारों की भावनाओं और कहानी के प्रवाह को आगे बढ़ाते हैं. हर गीत अपने सही समय पर आता है और शशांक व रोशनी के रिश्ते के उतार-चढ़ाव को और अधिक महसूस कराता है. वहीं, बैकग्राउंड स्कोर की बात करें तो यह कई भावुक पलों को और भी इमोशनल बना देता है. खासकर, जहां संवाद खत्म हो जाते हैं, वहां संगीत अपने सुरों से किरदारों के दिल की बात कह जाता है, जिससे दर्शक का अनुभव और भी समृद्ध और यादगार बन जाता है.

'दो दीवाने शहर में' क्यों देखें और क्यों नहीं? (Why watch 'Do Deewane Sheher Mein' and why not?)

'दो दीवाने शहर में' सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के लिए एक आइना है जो अपनी खुद की इनसिक्योरिटी और कमजोरियों से जूझ रहे हैं. यह फिल्म बड़ी खूबसूरती से याद दिलाती है कि हमारी कमियां ही हमें इंसान बनाती हैं, और सच्चा प्यार इन्हीं कमियों के बावजूद किसी को स्वीकार करने का नाम है. अगर आप ऐसी लव स्टोरी देखना चाहते हैं जो आपके शरीर से ज्यादा आपकी रूह से बात करे, जिसमें ग्लैमर और दिखावे से ज्यादा ईमानदारी और असलियत हो, तो यह फिल्म आपके लिए ही बनी है. यह अपने आपको समझने और स्वीकार करने की एक दिल को छू लेने वाली यात्रा है, जिसे आप मिस नहीं करना चाहेंगे.

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