Vaa Vaathiyar
ताजा खबर:नलन कुमारसामी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘वा वाथियार’ (Vaa Vaathiyar) में कार्थी, कृति शेट्टी, सत्यराज, राजकिरण, करुणाकरन और शिल्पा मंजुनाथ अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं. फिल्म का संगीत संतोष नारायणन ने दिया है और इसे ज्ञानवेल राजा ने प्रोड्यूस किया है. कई बार रिलीज डेट घोषित होने के बावजूद बार-बार टलने के बाद आखिरकार यह फिल्म आज रिलीज हो गई है. आइए जानते हैं फिल्म कैसी है.‘सूदु कव्वुम’ और ‘काधलुम कड़ंदु पोगुम’ जैसी दो बेहतरीन फिल्में देने के बाद, नलन कुमारसामी ने कई सालों के अंतराल पर ‘वा वाथियार’ के जरिए निर्देशन में वापसी की है.
कहानी (Vaa Vaathiyar story)
फिल्म की कहानी की शुरुआत एक ऐसे परिवार से होती है, जहां दादा एमजीआर के कट्टर प्रशंसक होते हैं. एक दिन जब वे थिएटर में एमजीआर की फिल्म देख रहे होते हैं, उसी दौरान वाथियार एमजीआर का निधन हो जाता है. उसी दिन और उसी समय दादा राजकिरण के घर पोते का जन्म होता है.
राजकिरण अपने पोते को एमजीआर का अगला अवतार मानकर उसका पालन-पोषण पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ करते हैं. लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, कार्थीके किरदार के भीतर शरारतें और चालाकी घर कर जाती हैं. फिर एक ऐसी परिस्थिति आती है जो उसे पूरी तरह बदल देती है. इसके बाद वह एक ऐसे हीरो में बदल जाता है जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है. आगे क्या होता है, यही फिल्म की कहानी है
एमजीआर के रूप में अभिनय करते समय जो थोड़ी बनावटीपन और कुछ जगहों पर मेल न खाने वाले एमजीआर के हाव-भाव नजर आते हैं, वे उस किरदार को थोड़ा कमजोर बना देते हैं. हालांकि, अभिनेता ने इसे बाहर ज्यादा जाहिर नहीं होने दिया और अच्छे से संभाल लिया.कृति शेट्टी की यह पहली तमिल फिल्म है. लगता है कि उनके किरदार को और भी मजबूत तरीके से लिखा जा सकता था. कुछ गानों में उनके डांस को छोड़ दें तो कई जगहों पर उनकी एक्टिंग कुछ खास प्रभाव छोड़ती नहीं है, जो थोड़ी निराशाजनक बात है.
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अन्य किरदार (Vaa Vaathiyar cast)
पूरी फिल्म में रामचंद्रन के साथ नजर आने वाले किरदार में आनंद राज अपने चिर-परिचित अंदाज में अभिनय करते हैं. वहीं, शुरुआत से ही एमजीआर के कट्टर फैन के रूप में राजकिरण को दिखा दिया गया है, जिससे उनका किरदार ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाता. हालांकि, एक असली एमजीआर फैन किस तरह दीवानगी दिखाता है, उसे स्क्रीन पर सजीव तरीके से पेश करने के लिए आनंद को खास तारीफ मिलती है.
फिल्म के विलेन के रूप में सत्यराज नजर आते हैं. लेकिन इस बार उनके किरदार में खलनायकी कुछ कम ही नजर आती है. ऊपर से उन्हें खास लुक देने के नाम पर जरूरत से ज्यादा सजाया गया है, जिससे उनका व्यक्तित्व थोड़ा अजीब लगता है. सच कहें तो सत्यराज जैसे कलाकार के लिए यह रोल “हाथी के मुंह में जीरा” जैसा ही है.
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मेकिंग और निर्देशन
निर्देशक नलन कुमारसामी की मेकिंग को देखें तो लगता है कि उन्होंने अपनी पुरानी फॉर्म अभी तक नहीं खोई है. तेज़-तर्रार स्क्रीनप्ले और डार्क कॉमेडी डायलॉग्स के जरिए उन्होंने अपने स्टाइल में अच्छा असर छोड़ा है. हालांकि, रामेश्वरम रामचंद्रन से एमजीआर बनने वाले हिस्सों में थोड़ी और बारीकी बरती जा सकती थी.
फैंटेसी का टैग देकर दर्शकों को तैयार किया गया था, लेकिन कुछ जगहों पर यह सब किसी जादू के शो जैसा महसूस होता है, जो फिल्म का एक नकारात्मक पहलू बन जाता है.
संगीत – संतोष नारायणन (Vaa Vaathiyar songs)
कहानी को सही तरीके से पेश करने और किरदारों को संतोषजनक ढंग से सामने लाने में टीम ने अच्छा काम किया है, लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं संतोष नारायणन.जिस तरह ‘सूदु कव्वुम’ और ‘काधलुम कड़ंदु पोगुम’ में नलन-संतोष की जोड़ी ने धमाल मचाया था, उसी तरह यहां भी संतोष ने शानदार संगीत दिया है. फिल्म की शुरुआत से लेकर अंत तक उन्होंने अलग-अलग तरह के म्यूजिक से दर्शकों को बांधे रखा है.
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फिल्म की कमियां (Vaa Vaathiyar review)
फिल्म में कमियां भी हैं. निर्देशक का ज्यादातर ध्यान कार्थी के किरदार को दर्शकों तक सही तरीके से पहुंचाने पर ही केंद्रित रहा, जिससे कहानी पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा सका. कई जगहों पर लॉजिक की कमी भी साफ नजर आती है.
हालांकि तेज़ रफ्तार पटकथा इन कमियों को कुछ समय के लिए ढक देती है, लेकिन थोड़ी देर बाद ये खामियां फिर उभरकर सामने आ जाती हैं, जो फिल्म का बड़ा माइनस साबित होती हैं.इसके अलावा, जब रात के समय हीरो एमजीआर (रामचंद्रन) बनकर अन्याय के खिलाफ लड़ता है, तो कई सीन स्थानीय सुपरमैन टाइप फिल्मों की याद दिला देते हैं, जिससे तुलना से बच पाना मुश्किल हो जाता है.
कुल मिलाकर
कई सालों बाद निर्देशन की कमान संभालने वाले नलन कुमारसामी ने एमजीआर के अंदाज और अपनी स्मार्ट मेकिंग से अच्छा प्रभाव छोड़ा है. वह “पास मार्क” से भी ऊपर जाते नजर आते हैं.
FAQ
1. ‘वा वाथियार’ किस तरह की फिल्म है?
यह एक फैंटेसी-ड्रामा फिल्म है, जिसमें मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश भी देने की कोशिश की गई है.
2. फिल्म में कार्थी किस रोल में नजर आते हैं?
कार्थी फिल्म में एमजीआर के अंदाज से प्रेरित किरदार निभाते हैं, जिसमें एक्शन और स्टाइल दोनों देखने को मिलते हैं.
3. क्या कार्थी का एमजीआर अवतार प्रभावी लगता है?
कुल मिलाकर उनका अभिनय अच्छा है, लेकिन कुछ जगहों पर थोड़ा बनावटीपन महसूस होता है. फिर भी उन्होंने इसे अच्छे से संभाला है.
4. कृति शेट्टी का रोल कैसा है?
यह कृति शेट्टी की पहली तमिल फिल्म है. उनका किरदार और मजबूत लिखा जा सकता था. डांस तो अच्छा है, लेकिन अभिनय में और निखार की गुंजाइश थी.
5. फिल्म के विलेन का रोल कौन निभाता है?
फिल्म में सत्यराज खलनायक की भूमिका में हैं, लेकिन उनका किरदार उनकी काबिलियत के मुकाबले कम प्रभावी लगता है.
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