/mayapuri/media/media_files/2026/01/31/zc-2026-01-31-11-14-28.jpeg)
भारतीय संगीत जगत में 27 जनवरी की शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अरिजीत सिंह ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स के ज़रिए फिल्मों के लिए प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने का चौंकाने वाला ऐलान किया। यह खबर ऐसे समय आई है, जब दो दिन पहले ही सलमान खान की चर्चित फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ का गाना ‘मातृभूमि’ रिलीज़ हुआ है। लगभग दस साल तक सलमान खान के साथ विवाद के खात्मे के बाद अरिजीत सिंह ने सलमान खान की किसी फिल्म के लिए पार्श्व गायन किया, गाना रिलीज़ होने के दो दिन बाद ही उन्होंने पार्श्वगायन से इस्तीफा दे दिया।
/mayapuri/media/post_attachments/image/ab676161000051745ba2d75eb08a2d672f9b69b7-340816.jpeg)
एक युग का अंत या नई शुरुआत?
अरिजीत सिंह ने अपने भावुक संदेश में लिखा, ‘‘मैं अब पार्श्व गायक के रूप में कोई नया प्रोजेक्ट नहीं लूँगा। यह एक शानदार यात्रा रही है।’’ हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे संगीत बनाना बंद नहीं करेंगे, बल्कि एक ‘स्वतंत्र कलाकार’ के रूप में खुद को तलाशेंगे।
निर्णय के पीछे की संभावित वजहें
अरिजीत के इस फैसले के पीछे कई गहरे कारण नज़र आते हैं:
रचनात्मक ऊब
अरिजीत ने स्वीकार किया कि वे एक ही तरह के काम से ऊब जाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बहुत जल्दी बोर हो जाता हूँ, इसीलिए मैं अपने गानों के अरेंजमेंट बदलता रहता हूँ।’’ वे फिल्म उद्योग की व्यावसायिक सीमाओं से मुक्त होकर स्वतंत्र संगीत और शास्त्रीय जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं।
नए गायकों के लिए जगह
उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि इंडस्ट्री में नई प्रतिभाएँ सामने आएँ और उन्हें प्रेरित करें।
एक गायक का पार्श्व गायन से त्यागपत्र देना आम बात हो सकती है, लेकिन अरिजीत सिंह का पार्श्वगायन न करने का फैसला कोई आम बात नहीं है। क्योंकि अरिजीत सिंह का करियर चरम पर था। एक अनुमान के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से फिल्म संगीत का सत्तर प्रतिशत हिस्सा तो उनके नाम ही रहा है।
/mayapuri/media/post_attachments/storage/app/public/daily_banners/44543/large/c6c364a92606a5847b72fd7544ecfef9-234724.webp)
सिंहासन डोलने की आहट?
सिर्फ हमारा ही नहीं, कई विशेषज्ञों का मानना है कि अरिजीत सिंह का यह फैसला जितना सरल दिख रहा है, उतना है नहीं। यह सीधे तौर पर बॉलीवुड के उन बड़े म्यूजिक लेबल्स को चुनौती है जो दशकों से कलाकारों की रॉयल्टी और अधिकारों पर कुंडली मारकर बैठे हैं। देखिए, अरिजीत सिंह का करियर जितनी तेज़ी से ऊँचाई की तरफ बढ़ रहा था, उतने ही विवाद भी उनके साथ जुड़े हुए थे। पर वह निडरता से अपना काम करते जा रहे थे। पर 27 जनवरी को उन्होंने जो कदम उठाया, उसे समझने के लिए हमें उसके पहले के घटनाक्रमों पर भी नज़र डालनी होगी।
Also Read: ‘Mayasabha’ की स्क्रीनिंग में सितारों का जलवा, Suniel Shetty और Sonu Nigam हुए शामिल
वास्तव में इस कदम को अरिजीत सिंह ने सुनियोजित ढंग से ही उठाया है। लगभग चार साल पहले दिग्गज म्यूजिक लेबल/संगीत कंपनियों को चिढ़ाने के लिए अरिजीत सिंह ने खुद को ‘आरियन म्यूजिक’ लेबल शुरू कर दिया था। मतलब दूसरी संगीत कंपनियाँ उनसे दूरी बनाएँ, तो उनके पास अपनी संगीत कंपनी है, जिसके लिए वह संगीत बनाते रहेंगे। शायद यही वजह है कि अरिजीत सिंह ने कहा कि वह संगीत सीखते व संगीत बनाते रहेंगे। तो वहीं शायद तभी से जावेद अख्तर, शंकर महादेवन सहित संगीत जगत से जुड़े कुछ लोग संगीत को समर्पित ऐप ‘‘गुनगुनालो’’ की तैयारी कर रहे थे। अब 16 जनवरी को मुंबई के एक पाँच सितारा होटल में जावेद अख्तर और शंकर महादेवन ने ‘गुनगुनालो’ ऐप लॉन्च किया, जहाँ संगीत से जुड़े, गायक व संगीतकार मिलकर सौ लोग मौजूद थे। बॉलीवुड का एक बड़ा तबका और कई संगीत कंपनियाँ मान रही हैं कि ‘‘गुनगुनालो’’ ऐप इस कहानी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि यह ऐप कलाकारों को उनके संगीत का 100 प्रतिशत मालिकाना हक और सीधी रॉयल्टी देने का वादा करता है। और इस ऐप पर बहुत कम समय में सौ से अधिक गाने आ चुके हैं। तो अब अरिजीत सिंह के पास ‘गुनगुनालो’ ऐप के माध्यम से अपनी पसंद का संगीत बनाने और उसका सदा मालिक बने रहते हुए पैसा कमाने का भी साधन आ गया है। यही वजह है कि अरिजीत के इस कदम से संगीत कंपनियाँ या यूं कहें कि संगीत माफिया का सिंहासन डोल रहा है।
/mayapuri/media/post_attachments/wp-content/uploads/2026/01/620x450-12340-106704.jpg)
फिल्म निर्माता व निर्देशक बने अरिजीत सिंह
अरिजीत सिंह बहुत ही ज़्यादा क्रिएटिव इंसान हैं। वह हमेशा कुछ न कुछ रचनात्मक काम करते रहते हैं। फिल्मों के लिए गाने न गाने का फैसला भी इसी क्रिएटिव भूख को शांत कर कुछ नया-बड़ा काम करने की मंशा भी है। टाइम्स ऑफ इंडिया और मनी कंट्रोल सहित कुछ मीडिया में छपी खबरों के अनुसार अरिजीत सिंह इन दिनों एक फिल्म का निर्माण व निर्देशन कर रहे हैं। फिल्म की कहानी व पटकथा उन्होंने अपनी पत्नी कोयल रॉय के साथ मिलकर लिखी है। फिल्म की कुछ दिन की शूटिंग कोलकाता के शांति निकेतन में हो चुकी है। जानकारी के अनुसार इस फिल्म में अरिजीत सिंह का बेटा हीरो और नवाजुद्दीन सिद्दीकी की पंद्रह वर्षीय बेटी शोरा हीरोइन है। इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी अभिनय कर रहे हैं। वैसे अरिजीत इस फिल्म से संबंधित सारी जानकारी छिपाकर रख रहे हैं। बॉलीवुड में चर्चा है कि बॉलीवुड के ‘म्यूजिक माफिया’ को चुनौती देने से पहले अरिजीत सिंह ने पूरी योजना बनाकर अपने पैर कई क्षेत्रों में फैला लिए हैं। फिल्म का निर्माण, निर्देशन व लेखन करते समय वैसे भी फिल्मों में पार्श्व गायन का उनके पास उतना समय नहीं हो सकता। खबर यह भी है कि अरिजीत सिंह खुद ही अपनी फिल्म में संगीत देने के साथ ही कुछ गाने गा भी रहे हैं। वैसे हमें याद रखना चाहिए कि बॉलीवुड में फिल्मों के लिए उन्होंने जो अब तक काम किया है, वह कम से कम दो साल तक आता रहेगा। मसलन, अरिजीत सिंह पहले ही करण जोहर व यशराज सहित कई निर्माताओं की आने वाली फिल्मों के लिए गाने रिकॉर्ड करा चुके हैं। इस बीच उन्होंने अपने संगीत लेबल ‘आरियन म्यूजिक’ और ‘गुनगुनालो’ ऐप के लिए भी कुछ गाने दे दिए हैं। उन्होंने ‘म्यूजिक माफिया’ से लड़ने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है, तभी तो बॉलीवुड में सन्नाटा पसरा हुआ है। टिप्स कंपनी के रमेश तोरानी ने ज़रूर कहा है कि अरिजीत सिंह अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर वापसी करना चाहिए। तो वहीं गायिका श्रेया घोषाल की भी प्रतिक्रिया आई है। कुमार सानू ने इसे एक ‘साहसी फैसला’ बताया, वहीं विशाल ददलानी और अरमान मलिक जैसे कलाकारों ने भी उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया है। अन्यथा सभी गायक और संगीत कंपनियों के मालिकों के मुँह पर चुप्पी है। अब संगीत कंपनियों को डर सता रहा है कि अगर अरिजीत सिंह सफल रहे, ‘गुनगुनालो’ से अरिजीत को फायदा हुआ, तो दूसरे गायक भी उनके पदचिन्हों पर चलेंगे, तब उनका क्या होगा?
/mayapuri/media/post_attachments/img/article-l-202511416521960739000-xl-816050.webp)
/mayapuri/media/post_attachments/wp-content/uploads/2025/07/BREAKING-Arijit-Singh-turns-director-with-a-unique-jungle-adventure-film-Pan-India-film-to-be-produced-by-Mahaveer-Jain-471358.jpg)
बागी बने अरिजीत
मूलतः पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के एक गाँव में जन्मे अरिजीत सिंह, कभी ‘फेम गुरुकुल’ के मंच से बाहर कर दिए गए थे, पर आज वह दुनिया के सबसे बड़े स्वतंत्र ब्रांड बन चुके हैं। सलमान खान के साथ विवाद से लेकर म्यूजिक कंपनियों द्वारा गानों के रीमिक्स कल्चर तक, अरिजीत की नाराजगी हमेशा दबी ज़ुबान में सामने आती रही है। अब उन्होंने सिस्टम के भीतर रहकर लड़ने के बजाय, सिस्टम से बाहर निकलकर अपनी ‘आज़ाद सल्तनत’ बनाने का फैसला किया है।
/mayapuri/media/post_attachments/rf/image_size_960x540/HT/p2/2020/04/25/Pictures/_3329077a-86cd-11ea-81b1-a01beea4c212-378663.jpg)
अरिजीत को फिल्मों के मुकाबले ‘‘गुनगुनालो’’ ऐप से क्या-क्या फायदे हो सकते हैं, उस पर भी गौर किया जाना चाहिए:
1.रॉयल्टी और मालिकाना हक
बॉलीवुड में जब कोई गायक गाना गाता है, तो म्यूजिक कंपनियाँ (जैसे टी-सीरीज़ या ज़ी म्यूजिक) उस गाने की मालिक बन जाती हैं। गायक को सिर्फ एक बार की फीस मिलती है। जबकि गुनगुनालो ऐप से जुड़ने का फायदा यह होगा कि इस प्लेटफॉर्म पर कलाकार खुद अपने गाने का मालिक होता है। भविष्य में वह गाना जितनी बार सुना जाएगा, उसका पैसा सीधे अरिजीत को मिलेगा, न कि किसी कंपनी को। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, यह ऐप रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा सीधे क्रिएटर को देता है।
/mayapuri/media/post_attachments/ibnlive/uploads/2025/05/Image-2025-05-795a0ac563c04fc935b47b79382ecf89-154217.png)
2. फिल्मों में गायक को फिल्म की कहानी, हीरो की इमेज और डायरेक्टर की पसंद के हिसाब से गाना पड़ता है।
पर अपने म्यूजिक लेबल या गुनगुनालो ऐप जैसे प्लेटफॉर्म के लिए अब अरिजीत वही धुनें बनाएँगे जो वो बनाना चाहते हैं। वह शास्त्रीय संगीत या सूफी के साथ ऐसे प्रयोग कर पाएँगे जो शायद व्यावसायिक फिल्मों में संभव नहीं थे।
/mayapuri/media/post_attachments/aajtak/images/story/202601/6979da1027eda-arijit-singh-284234543-16x9-229712.png?size=948:533)
3. म्यूजिक कंपनियों को सीधी चुनौती
अरिजीत सिंह वर्तमान में भारत के सबसे बड़े ‘म्यूजिक ब्रांड’ हैं। अगर वो फिल्मों के लिए गाना बंद करते हैं, तो फिल्म इंडस्ट्री और म्यूजिक लेबल्स को भारी नुकसान होगा।
4. अरिजीत का यह कदम अन्य गायकों को भी प्रेरित करेगा कि वे बड़ी कंपनियों के पीछे भागने के बजाय स्वतंत्र रूप से अपना संगीत रिलीज़ करें। यह म्यूजिक इंडस्ट्री में ‘डी-सेंट्रलाइज़ेशन’ की शुरुआत है।
शुरुआत में शायद फिल्मों जैसा मोटा ‘साइनिंग अमाउंट’ न मिले, लेकिन लॉन्ग-टर्म (दीर्घकालिक) में फायदा ज़्यादा है। फिल्मों में गाना हिट होने पर करोड़ों रुपये कंपनी कमाती है।
‘गुनगुनालो’ जैसे प्लेटफॉर्म पर अगर अरिजीत के करोड़ों फैंस गाना सुनते हैं, तो सब्सक्रिप्शन और स्ट्रीमिंग से होने वाली कमाई का बराबर हिस्सा सीधा उन्हें मिलेगा। द हिंदू के मुताबिक, यह मॉडल कलाकारों को ‘पेंशन’ की तरह ताउम्र कमाई का ज़रिया देता है।
/mayapuri/media/post_attachments/newsgram/2026-01-28/ciq9bvij/task01kg1zzm4ge02v2e6vxy843tpw1769593671img0-712852.webp?w=480&auto=format%2Ccompress)
इस आधार पर देखा जाए तो अरिजीत का यह निर्णय केवल एक ‘रिटायरमेंट’ नहीं, बल्कि संगीत की आज़ादी का आंदोलन है। वह अब एक ‘कर्मचारी गायक’ के बजाय एक ‘स्वतंत्र उद्यमी’ बनने की राह पर हैं।
Also Read:Kiara Advani का थर्सडे मूड, बोल्ड रेड लिपस्टिक लुक और raised eye brows
अरिजीत के हटने से बॉलीवुड के सामने एक बड़ा ‘खालीपन’ पैदा होगा। पिछले एक दशक में शायद ही कोई ऐसी बड़ी फिल्म रही हो जिसमें उनका गाना न हो। संगीत निर्देशकों को अब नए विकल्पों की तलाश करनी होगी, जिससे फिल्म संगीत में एक नया बदलाव आ सकता है।
/filters:format(webp)/mayapuri/media/media_files/2026/01/31/6g3h5ovs_arijit-singh_625x300_28_january_26-2026-01-31-11-11-08.webp)
अरिजीत सिंह ने साबित कर दिया है कि एक कलाकार के लिए उसकी कलात्मक संतुष्टि व्यावसायिक सफलता से कहीं ऊपर होती है। वे अब भले ही फिल्मी पर्दों पर न सुनाई दें, लेकिन उनके ‘इंडिपेंडेंट’ म्यूजिक का इंतज़ार पूरी दुनिया को रहेगा।
क्या होगा आगे?
म्यूजिक लेबल्स के लिए अरिजीत का जाना किसी बड़े आर्थिक झटके से कम नहीं है। क्या यह बॉलीवुड संगीत के अंत की शुरुआत है या स्वतंत्र संगीत के स्वर्ण युग का उदय? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन अरिजीत ने संगीत की बिसात पर सबसे बड़ी चाल चल दी है।
/mayapuri/media/post_attachments/wp-content/uploads/2019/08/what-makes-arijit-singh-so-popular-with-the-masses-3-868838.jpg)
Ganesh Kartikeya | Ganesh Kartikey Latest Episode | Sony Sab | Lord Ganesha | Divine Chintamani | Mythological Story | Devotional TV Show not present in content
Follow Us
/mayapuri/media/media_files/2026/01/30/cover-2678-2026-01-30-17-15-19.png)